90% लोग Technical analysis में करते हैं ये गलती! आप मत करना

Technical analysis of stocks: क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग शेयर बाजार में लगातार पैसा कैसे कमाते हैं। जबकि बाकी लोग बार-बार नुकसान उठाते हैं? सच ये है कि मार्केट में सफल होने के लिए “सिर्फ किस्मत” नहीं, बल्कि सही Analysis की जरूरत होती है और यही काम करता है  Technical Analysis आइए जानते हैं- 90% लोग Technical analysis में करते हैं ये गलती! आप मत करना
                                                                                   
Technical Analysis
अगर आप भी बार-बार गलत टाइम पर एंट्री लेते हैं। Profit आने से पहले ही घबरा कर निकल जाते हैं या Loss में फंस जाते हैं तो यह गाइड आपकी सोच बदल सकता है।

Technical analysis क्या है? 

Technical Analysis एक ऐसी विधि है। जिसमें आप Stock के price movement Chart patterns और Indicators का उपयोग करके यह अनुमान लगाते हैं कि भविष्य में स्टॉक का price किस दिशा में जा सकता है। आसान भाषा में “Past price देखकर future का अंदाजा लगाना”

किसी भी स्टॉक का टेक्निकल एनालिसिस करने के लिए ट्रेडर्स को सबसे पहले स्टॉक के ट्रेंड की पहचान करनी चाहिए। क्योंकि ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी stocks के ट्रेंड को फॉलो करती हैं या ट्रेंड के विपरीत होती हैं। उसके बाद सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस लेवल के समानांतर ट्रेंड लाइन खींचनी चाहिए। उसके बाद ट्रेड के एन्ट्री और एग्जिट पॉइंट्स तय करने चाहिए। फिर पोजीशन साइजिंग और रिस्क मैनेजमेंट करना चाहिए।

स्टॉक्स मार्केट ( कमोडिटी मार्केट, स्टॉक्स, करेंसी आदि ) के प्राइस और ट्रेडिंग वॉल्यूम के ऐतिहासिक डेटा के अध्ययन को टेक्निकल एनालिसिस कहा जाता है। टेक्निकल एनालिस्ट द्वारा मार्केट साइकोलॉजी, व्यवहारिक अर्थशास्त्र, क्वांटिटिव एनालिसिस करके stocks के प्राइस का पूर्वानुमान लगाया जाता है। 


इसके लिए स्टॉक्स के पिछले प्राइस मूवमेंट का अध्ययन किया जाता है। जिसके आधार पर Stocks के फ्यूचर्स प्राइस मूवमेंट का अनुमान लगाया जाता है और जिससे ट्रेडर्स को प्रॉफिट कमाने के लिए आवश्यक जानकारी मिलती है। 

ट्रेडर्स Stock trading के लिए एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स की पहचान करने के लिए चार्ट्स पर टेक्निकल एनालिसिस टूल्स का उपयोग करते हैं। Technical analysis में यह माना जाता है कि स्टॉक्स के बारे में मार्केट में सभी जानकारी उपलब्ध है और जिसका प्रभाव स्टॉक्स के प्राइस में समाहित है। Technical analysis की मुख्य दो फॉर्म हैं-
  1. चार्ट पैटर्न्स 
  2. टेक्निकल इंडीकेटर्स 
Technical analysis एक टर्म है, जो विभिन्न ट्रेडिंग स्ट्रेटेजीज के लिए इस्तेमाल होता है। जो किसी स्टॉक के प्राइस एक्शन की व्याख्या पर निर्भर करता है। ज्यादातर टेक्निकल एनालिसिस यह निर्धारित करने पर फोकस होते हैं कि मौजूदा प्राइस ट्रेंड जारी रहेगा या नहीं, अगर नहीं तो ट्रेंड रिवर्सल कब होगा?

कुछ टेक्निकल एनालिस्ट ट्रेंडलाइंस का यूज करते हैं। तो कुछ कैंडलस्टिक पैटर्न्स का उपयोग करते हैं। अधिकांश traders स्टॉक्स के टेक्निकल एनालिसिस टूल्स ( इंडीकेटर्स और चार्ट पैटर्न्स ) का उपयोग ट्रेडों के संभावित एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स को पहचानने के लिए करते हैं। 

उदाहरण के लिए एक चार्ट पैटर्न किसी शार्ट सेलर के लिए एंट्री पॉइंट का संकेत दे सकता है। लेकिन ट्रेडर ब्रेकडाउन की पुष्टि करने के लिए अलग-अलग टाइम फ्रेम में मूविंग एवरेज को भी देख सकता है। 

Technical analysis का इतिहास 

Stocks का टेक्निकल एनालिसिस और trend का उपयोग सैकड़ों सालों से किया जाता है। शेयरों और ट्रेंड्स का टेक्निकल एनालिसिस सैकड़ों वर्षों से किया जाता रहा है। यूरोप में, जोसेफ डे ला वेगा ने 17वीं शताब्दी में डच बाजारों की भविष्यवाणी करने के लिए प्रारंभिक टेक्निकल एनालिसिस टेक्निक्स को अपनाया। हालाँकि, अपने आधुनिक रूप में, Technical analysis का श्रेय चार्ल्स डॉव, विलियम पी. हैमिल्टन, रॉबर्ट रिया, एडसन गोल्ड और कई अन्य लोगों को जाता है। 

इन लोगों ने  में Stock market में एक नए दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें stocks के विवरण के बजाय शेयर के प्राइस को चार्ट पर ऊंचे ( हाईएस्ट लेवल ) और निचले स्तर ( लोअर लेवल ) में सबसे अच्छा मापा जाता है। प्रारंभिक टेक्निकल एनालिस्ट के सिद्धांतों के विविध संग्रह को 1948 में रॉबर्ट डी. एडवर्ड्स और जॉन मैगी द्वारा Technical analysis of stock trends के नाम से एक साथ लाया गया और औपचारिक रूप से प्रकाशित किया गया था।

कैंडलस्टिक पैटर्न जापानी चावल के ट्रेडर्स के समय का है। जो अपने चावल की फसल के लिए ट्रेडिंग पैटर्न का पता लगाना चाहते थे और उन्होंने ही जापानी कैंडलस्टिक चार्ट पैटर्न का अविष्कार किया था। इन प्राचीन पैटर्न का अध्ययन 1990 के दशक में अमेरिका में इंटरनेट डे ट्रेडिंग के आगमन के साथ लोकप्रिय हो गया था। 

ट्रेडों की अनुशंसा करते समय उपयोग के लिए नए पैटर्न खोजने के लिए उत्सुक निवेशकों ने ऐतिहासिक स्टॉक चार्ट का विश्लेषण किया। विशेष रूप से कैंडलस्टिक रिवर्सल पैटर्न investors के लिए पहचानना अत्यंत जरूरी होता है। कई अन्य आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले कैंडलस्टिक चार्टिंग पैटर्न हैं। डोजी और एनगल्फिंग पैटर्न आदि अन्य कई का उपयोग ट्रेंड रिवर्सल की भविष्यवाणी करने के लिए किया जाता है। 

Technical analysis का उपयोग कैसे करें? 

टेक्निकल एनालिसिस का मुख्य सिद्धांत यह है कि किसी भी शेयर का मार्केट प्राइस उन सभी उपलब्ध मार्केट सूचनओं को दर्शाता है। जो share के प्राइस को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए ट्रेडर्स को शेयर के इकनोमिक , फंडामेंटल और नए डवलपमेंट पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। क्योंकि ये stocks के मार्केट प्राइस में पहले से ही समाहित होते हैं। 

टेक्निकल एनालिस्ट आमतौर पर मानते हैं कि शेयर के प्राइस trends के अनुसार तय होते हैं। जब Stock market के समग्र मनोविज्ञान की बात आती है तो इतिहास खुद को दोहराता है। किसी भी शेयर का technical analysis करने के दो मुख्य प्रकार होते हैं। चार्ट पैटर्न्स और टेक्निकल इंडीकेटर्स। 

चार्ट पैटर्न्स टेक्निकल एनालिसिस का सब्जेक्टिव रूप है। जिसमे टेक्निकल एनालिस्ट विशिष्ट पैटर्न को देखकर सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस लेवल की पहचान करने का प्रयास करते हैं। मनोवैज्ञानिक कारकों पर आधारित ये पैटर्न यह अनुमान लगाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। कि किसी विशेष प्राइस पॉइंट पर ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन के बाद Stock का प्राइस किस ओर जा रहा है। 

उदाहरण के लिए, एक असेंडिंग ट्राएंगल चार्ट पैटर्न एक तेजी का चार्ट पैटर्न है। जो रेजिस्टेंस लेवल के एरिया को दिखाता है। इस रेजिस्टेंस लेवल के टूटने से ब्रेकआउट के बाद शेयर के प्राइस अपट्रेंड की दिशा में चढ़ते हैं। टेक्निकल इंडिकेटर, Technical analysis का एक सांख्यिकीय रूप होते हैं। जिसमें टेक्नीशियन शेयर के प्राइस और ट्रेडिंग वॉल्यूम में गणितीय फार्मूला लागू करते हैं। 

सबसे आम टेक्निकल इंडिकेटर मूविंग एवरेज है। जो स्मूथ प्राइस डेटा की सहायता से trend को पहचानने में सहायता करते हैं। अधिक कठिन technical indicator की श्रेणी में मूविंग एवरेज कन्वर्जेन्स डायवर्जेंस ( MACD ) आते हैं। जो कई मूविंग एवरेज के बीच आपसी प्रक्रिया को दिखाता है। बहुत से ट्रेडिंग सिस्टम टेक्निकल इंडीकेटर्स के ऊपर आधारित होते हैं। क्योंकि उनकी गणना मात्रात्मक रूप से की जा सकती है। 

Tecnicalanalysis और Fundamentalanalysis के बीच अंतर 

फंडामेंटल एनालिसिस और टेक्निकल एनालिसिस फाइनेंशियल मार्केट के दो बड़े अलग-अलग धड़े हैं। टेक्निकल एनालिसिस मे माना जाता है कि सबसे अच्छा Stocks के प्राइस ट्रेंड को फॉलो करना है क्योंकि यह मार्केट एक्शन से बनता है। जबकि फंडामेंटल एनालिसिस को मानने वालों का कहना है कि मार्केट अक्सर स्टॉक्स के प्राइस को नजरअंदाज कर देता है। 

फंडामेंटल एनालिसिस वर्तमान में शेयर के प्राइस में प्रतिबिंबित नहीं होने वाले आंतरिक मूल्य ( intrinsic value ) की तलाश में किसी कंपनी की बैलेंस शीट और मार्केट प्रोफ़ाइल को खंगालते हैं। इसलिए फंडामेंटल एनालिस्ट स्टॉक के प्राइस चार्ट पर trend को नजरअंदाज कर देंते हैं। 

Stock market में सफल investors के कई उदाहरण हैं, जो शेयर मार्केट ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग के लिए टेक्निकल और फंडामेंटल दोनों तरह के एनालिसिस का उपयोग करते हैं। और यहां तक कि जो दोनों के तत्वों को शामिल करते हैं। 

हालाँकि,  टेक्निकल एनालिसिस के आधार पर ट्रेडर्स शार्ट-टर्म और मीडियम टर्म ट्रेडिंग करते हैं। जबकि फंडामेंटल एनालिसिस के आधार पर आमतौर पर स्टॉक्स को लॉन्ग-टर्म के लिए होल्ड किया जाता है।

Technical analysis of stocks की सीमाएँ 

टेक्निकल एनालिसिस में चार्ट का गलत मतलब निकाला जा सकता है। चार्ट का गठन कम ट्रेडिंग वॉल्यूम पर आधारित हो सकता है। आप जिस प्रकार का ट्रेड लेना चाहते हैं, उसके लिए मूविंग एवरेज के लिए उपयोग किया जाने वाला समय बहुत अधिक या बहुत कम हो सकता है। उनको छोड़कर, stocks और trend का टेक्निकल एनालिसिस अपने आप में एक यूनिक काम है।

जैसे-जैसे अधिक स्टॉक्स का अधिक टेक्निकल एनालिसिस किया जाता है। उसमे टेक्निक्स, टूल्स और स्ट्रेटेजी को इन्वॉल्व किया जाता है तो इसका प्राइस एक्शन पर प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए यदि चार्ट पर थ्री ब्लेक क्रो कैंडलस्टिक पैटर्न बन रहा है और शेयर का प्राइस इसे सही ठहराते हुए बेयरिश रिवर्सल पैटर्न दिखा रहा है।

मार्केट में ऐसी स्थिती बनने पर आपको शार्ट सेलिंग की पोजीशन बना लेनी चाहिए। हालाँकि यह एक दिलचस्प बात है, एक सच्चे technical analyst को वास्तव में तब तक इसकी परवाह नहीं होती जब तक कि उसका ट्रेडिंग मॉडल प्रॉफिटेबल काम करना जारी रखता है। 

निष्कर्ष: शेयर बाजार में सफलता कोई जादू नहीं है, बल्कि यह सही ज्ञान, धैर्य और अनुशासन का परिणाम है। Technical Analysis आपको यह समझने की ताकत देता है कि मार्केट कब खरीदने और कब बेचने का सही मौका दे रहा है। लेकिन एक सच्चाई हमेशा याद रखें — सिर्फ Technical Analysis सीख लेना ही काफी नहीं है। 

उसे लगातार practice करना और अपनी गलतियों से सीखना ही आपको एक सफल ट्रेडर बनाता है। शुरुआत में छोटे-छोटे स्टेप लें, Chart को समझें और Indicators को धीरे-धीरे सीखें। Risk Management को कभी ignore न करें। समय के साथ आपकी समझ बेहतर होगी और आपका confidence भी बढ़ेगा। अंत में बस इतना याद रखें,
“Market में वही जीतता है जो सीखना बंद नहीं करता।”

FAQs- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

प्रश्न1. टेक्निकल एनालिसिस क्या होता है?
उत्तर: टेक्निकल एनालिसिस एक ऐसी विधि है जिसमें शेयर के पिछले price, volume और chart patterns का उपयोग करके भविष्य के price movement का अनुमान लगाया जाता है।

प्रश्न 2. क्या Technical Analysis सच में काम करता है?
उत्तर: हाँ, Technical Analysis काम करता है, लेकिन यह 100% accurate नहीं होता। सही strategy + risk management के साथ इसका success rate बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न3. Beginners के लिए कौन-सा chart सबसे अच्छा है?
उत्तर: Beginners के लिए Candlestick Chart सबसे अच्छा होता है क्योंकि यह market की पूरी जानकारी (Open, High, Low, Close) दिखाता है।

प्रश्न 4. Support और Resistance क्या होते हैं?
उत्तर: Support: वह level जहाँ price गिरकर रुकता है। Resistance: वह level जहाँ price बढ़कर रुकता है। इन levels का उपयोग Entry और Exit तय करने में किया जाता है।

प्रश्न5. सबसे अच्छे Technical Indicators कौन-से हैं?
उत्तर: Beginners ट्रेडर के लिए ये indicators best हैं-
  1. RSI (Relative Strength Index)
  2. MACD
  3. Moving Average
प्रश्न6. क्या बिना Technical Analysis के trading की जा सकती है?
उत्तर: हाँ, लेकिन यह बहुत risky होता है। बिना analysis के trading करना एक तरह से “अंधेरे में तीर चलाना” है।

प्रश्न7. Technical Analysis सीखने में कितना समय लगता है?
उत्तर: Basic समझने में 1–2 महीने लग सकते हैं, लेकिन expert बनने में समय और practice दोनों लगते हैं।

प्रश्न8. क्या Technical Analysis long-term investment में काम आता है?
उत्तर: हाँ, Technical Analysis long-term investors के लिए भी useful है, खासकर सही entry और exit point तय करने में।

प्रश्न9. Trading में सबसे बड़ी गलती क्या होती है?
उत्तर: Stop Loss ना लगाना, Overtrading करना, Emotions में आकर decision लेना

प्रश्न10. क्या Technical Analysis से guaranteed profit मिलता है?
उत्तर: नहीं, कोई भी method 100% profit की guarantee नहीं देता। लेकिन सही knowledge और discipline से losses को कम और profits को बढ़ाया जा सकता है।

उम्मीद है, आपको यह शेयरों का तकनीकी विश्लेषण कैसे करें ? आर्टिकल पसंद आया होगा। अगर आपको यह How to do Technical analysis of stocks and trend in Hindi. आर्टिकल पसंद आये तो इसे अपने दोस्तों के साथ सोशल मिडिया पर जरूर शेयर करें। आपको यह आर्टिकल कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताएं। कमेंट बॉक्स आपके लिए ही है। ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त करने के लिए इस साइट को जरूर सब्स्क्राइब करें।    

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ