फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में हेजिंग (Hedging) कैसे करें?

हैजिंग एक एडवांस रिस्क मैनेजमेंट रणनीति है। जिसमें शेयर मार्केट में बनायीं हुई वर्तमान पोजीशन में संभावित नुकसान से बचने के लिए स्टॉक्स को फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस मार्केट में खरीदा या बेचा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो हैजिंग एक रिस्क मैनेजमेंट स्ट्रेटेजी है, जिसका उपयोग फाइनेंशियल मार्केट में लोगों द्वारा अपने इन्वेस्टमेंट को नुकसान से बचाने के लिए उसके विपरीत पोजीशन बनाकर किया जाता है।  

जिससे उनके इन्वेस्टमेंट में होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई की जा सके। हैजिंग से जोखिम तो खत्म हो जाता है लेकिन इससे संभावित प्रॉफिट में भी कमी आती है। क्योंकि हैजिंग करने के लिए भी पैसे लगते हैं, जिसे प्रीमियम के नाम से जाना जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं- फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में  हेजिंग स्ट्रेटेजी (Hedging) कैसे बनायें? What is Hedging Futures and Options in Hindi.

                                                                                 
Hedging Futures and Options


पुस्तक शेयर बाजार की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। जिसका नाम शेयर बाजार से पैसा कमाने की सफल तकनीकेँ है। इस बुक में शेयर बाजार की बारीकियों को समझाया गया है। किस प्रकार आप एक अच्छे ट्रेडर और इन्वेस्टर बन सकते हैं। शेयर बाजार में कौन से शेयर भरोसेमंद होते है? जिसमें आपको ट्रेड करना चाहिए कितना मुनाफा रखना चाहिए? और स्टॉप-लॉस कहाँ पर रखना चाहिए? 

शेयर मार्केट ट्रेडिंग से जुड़ी हुई शब्दावली तथा टेक्निकल इंडिकेटर्स और विभिन्न प्रकार की ट्रेडिंग स्ट्रैटेजीज का वर्णन इस पुस्तक में किया गया है। बाजार में कॉल-पुट हैजिंग कैसे होती है और नुकसान से बचने के लिए Hedging कैसे की जाती है? इस प्रकार की विभिन्न तकनीकों से आप शेयर बाजार में पैसा कैसे कमा सकते हैं? यह इस बुक में सिखाया गया है। 

बाजार की कौन से जोखिमो का ध्यान रखना चाहिए। थिटा (समय हास) विशेष तकनीक है। जिनका इस्तेमाल करके ट्रेडर्स पैसा कमा सकता है। सही मायने में यह बुक नए ट्रेडर्स के लिए बहुत ज्ञानवर्धक व फायदेमन्द साबित हो सकती है। बाजार ट्रेन्ड के बारे में विश्व के शेयर मार्केट की जानकारी क्यो जरूरी है? कौन सी साधारण तकनीको के द्वारा शेयर बाजार में पैसा कमाया जा सकता है?

RSI , VWAP , ATP, PCR और भी बहुत सी महत्वपुर्ण इस पुस्तक में दी गई है। इसमें निफ़्टी बैंक निफ़्टी तथा कॉल व पुट ऑप्शन कि कई ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी दी गई है। जिससे आप फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस मार्केट को समझ कर अपनी जोखिम को कम कर सकते हैं और वहाँ से पैसा भी बना सकते हैं। अतः आपको एक बार शेयर बाजार से पैसा कमाने की सफल तकनीकें बुक जरूर पढ़नी चाहिए। 

Hedging क्या है? 

हैजिंग एक रिस्क मैनेजमेंट स्ट्रेटेजी है। जिसका उपयोग फाइनेंशियल मार्केट में ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स के अलावा बिजनेस हाउस के द्वारा नुकसान से बचने के लिए किया जाता है। फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस दो प्रसिद्ध फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट हैं। जिनका उपयोग Hedging के उद्देश्यों से किया जाता है। 

हेजिंग स्ट्रेटेजी का उपयोग निवेशकों द्वारा उस स्थिति में जोखिम को कम करने के लिए किया जाता है। जब उनके पोर्टफोलियो में शामिल किसी एसेट में गिरावट की आशंका होती है। तब हैजिंग स्ट्रेटेजी आपके पोर्टफोलियो में अनिश्चितता और संभावित नुकसान को कम करती है। आमतौर पर इन्वेस्टर्स अपने पोर्टफोलियो में शामिल कमजोर एसेट के साथ विपरीत रूप से संबंधित सिक्युरिटीज खरीदते हैं। 

यानि शेयर के प्राइस में प्रतिकूल उतार-चढ़ाव की स्थिती में नुकसान से बचने के लिए स्टॉक्स को फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में खरीदा या बेचा जाता है। क्योंकि एफ एंड ओ में केवल प्रीमियम ही चुकाना होता है जोकि बहुत मामूली होता है। जब Futures and Options का रणनीतिक रूप से उपयोग किया जाता है तो ये इन्वेस्टर्स और ट्रेडर्स के नुकसान को काफी हद तक सीमित कर देते हैं। यानि Hedge एक ऐसा निवेश है जो आपके पोर्टफोलियो को प्रतिकूल मूल्य उतार-चढ़ाव से बचाता है। 
 
शेयर मार्केट में अपनी पोजीशन की Hedging के दो तरीके हैं- 
  1. Futures Contracts 
  2. Options Contracts  

Hedging in Futures (वायदा में हैजिंग)  

किसी अंडरलेइंग एसेट को पूर्वनिर्धारित प्राइस पर बेचने और खरीदने के लिए फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स स्टैंडर्डाइज्ड अग्रीमेंट होते हैं। इनका उपयोग हैजिंग के लिए निम्नलिखित तरीके से किया जाता है- 

Long Hedge (लॉन्ग हैज) 

शेयर मार्केट, फ्यूचर्स ट्रेडिंग में, आप फ्यूचर्स में बनायीं गई पोजीशन को हैज करने के लिए ऑप्शंस में पोजीशन बना सकते हैं। जैसे यदि आपने फ्यूचर्स में शार्ट-सेल की पोजीशन बनायीं है। तो उसे Hedge करने के लिए आप ऑप्शंस में लॉन्ग कॉल की पोजीशन बना सकते हैं। इसी तरह आप लॉन्ग पोजीशन को हैज करने के लिए आप पुट खरीद सकते हैं। हैजिंग को फ्यूचर्स में कवर भी कहा जाता है। इसी तरह फ्यूचर्स में long buy को कवर करने के लिए ऑप्शंस में पुट को लॉन्ग या पुट को सेल भी किया जा सकता है। 

लॉन्ग हैज एक फ्यूचर्स पोजीशन को संदर्भित करता है। कमोडिटी मार्केट में खरीददार द्वारा प्राइस की स्थिरता के उद्देश्य से Long hedge की पोजीशन बनायीं जाती है। लॉन्ग हैज का उपयोग अक्सर मेन्यूफेक्चरर और प्रोसेसिंग वाली कंपनियों के द्वारा कमोडिटी की प्राइस वोलेटिलिटी से बचने के लिए किया जाता है। 

क्योंकि वे जिस मेटीरियल का उपयोग करती हैं। वे चाहती हैं कि उनकी खरीद का प्राइस पूरे वर्ष स्थिर रहे इसलिए वे लॉन्ग हैज की पोजीशन मार्केट में बनाती हैं। इसीलिए लॉन्ग हैज को इनपुट हेज, बायर्स हेज, बाय हेज, बायर हेज या सेल हेज के रूप में भी संदर्भित किया जा सकता है। लॉन्ग हैज, शार्ट हैज के विपरीत होती है। यह ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स को प्राइस के घटने से होने वाले नुकसान से बचाती है। 

Short Hedge (शार्ट हैज) 

जब आने वाले समय में शेयर के प्राइस गिरने की आशंका होती है। तब शार्ट हैज ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी को अपनाया जाता है। इसमें स्टॉक्स की फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में शार्ट सेल की पोजीशन बनायीं जाती है। इसमें शेयरों को पहले बेचा जाता है और प्राइस गिरने पर सस्ते में खरीदकर प्रॉफिट कमाया जाता है। शेयर मार्केट स्पेक्युलेटर्स के द्वारा इस स्ट्रटेजी का उपयोग बड़ी मात्रा में किया जाता है। 

शॉर्ट हेज एक निवेश रणनीति है, जिसका उपयोग भविष्य में एसेट के प्राइस में गिरावट के जोखिम से बचाव (हेज) के लिए किया जाता है। कंपनियां आम तौर पर अपने द्वारा बेचे जाने वाले माल के प्राइस के जोखिम को कम करने के लिए रणनीति का उपयोग करती हैं। इसके लिए वे ज्यादातर कमोडिटी मार्केट का उपयोग करती हैं। 

एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट करने वाली कंपनिया करेंसी के जोखिम को कम करने के लिए फोरेक्स मार्केट में फ्यूचर्स में अपने हिसाब से लॉन्ग और शार्ट हैजिंग की पोजीशन बनाती हैं। शार्ट हैं, लॉन्ग हैज के विपरीत होती है। यह ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स को प्राइस के बढ़ने से होने वाले नुकसान से बचाती है। 

Hedging in Options (ऑप्शंस में हैजिंग) 

ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट एक समझौता होता है, जिसका उपयोग दो पक्षों के बीच संभावित लेनदेन को सुविधाजनक बनाने के लिए किया जाता है। यह किसी अंडरलेइंग एसेट जैसे स्टॉक्स को एक निश्चित प्राइस पर खरीदने या बेचने का अधिकार देता है। लेकिन दायित्व नहीं देता है और निश्चित प्राइस को स्ट्राइक प्राइस कहा जाता है। 

इस कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी डेट होती है उसके बाद यह खत्म हो जाता है। यदि एक्सपायरी डेट तक ऑप्शन को एक्सरसाइज नहीं किया जाता है तो ऑप्शन बायर को प्रीमियम का नुकसान होता है। जो उसने ऑप्शन को खरीदने के लिए चुकाया था। 

हैजिंग के लिए ऑप्शंस का प्रयोग विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है। 

Protective Put (सुरक्षात्मक पुट) 

यदि आपके पास कोई एसेट है और आप उसके प्राइस में संभावित गिरावट से बचना चाहते हैं तो आप उसका पुट ऑप्शन खरीद सकते हैं। यदि एसेट का प्राइस गिरता है तो आपके खरीदे हुए पुट ऑप्शन का प्राइस बढ़ जायेगा। जिससे आपके नुकसान की भरपाई हो जाएगी। एक "सुरक्षात्मक पुट" से तात्पर्य है कि स्टॉक पहले खरीदा गया था और उस स्टॉक की मौजूदा पोजीशन के खिलाफ पुट खरीदेने को प्रोटेक्टिव पुट या सुरक्षात्मक पुट कहते हैं। 

Covered Call (कवर्ड कॉल) 

कवर्ड कॉल शब्द एक वित्तीय लेनदेन को दर्शाता है। जिसमे कॉल ऑप्शन बेचने वाले सेलर के पास अंडरलेइंग एसेट के बराबर राशि होती है। इसे किर्यान्वित करने के लिए कॉल ऑप्शन सेलर, एसेट में लॉन्ग पोजीशन होल्ड रखता है। उसके बाद कॉल ऑप्शन सेल (Writes) करता है, वह इनकम जेनरेट करने के लिए कॉल ऑप्शन सेल करता है। 

Risk Reversal (रिस्क रिवर्सल) 

इस रणनीति में कॉल ऑप्शन खरीदना और उसी अंडरलेइंग एसेट का पुट ऑप्शन बेचना शामिल है। इसका उपयोग तब किया जाता है, जब आप नकारात्मक जोखिम से बचाव करना चाहते हैं। इससे नुकसान वाली का प्रोटेक्शन तो हो जाता है लेकिन इससे संभावित लाभ सीमित हो जाता है। यानि अगर आपकी पोजीशन के प्राइस ट्रेंड के विरुद्ध ट्रेंड रिवर्सल हो जाता है। तो इस स्थिती में आप  लॉस से कैसे बचेंगे? इस स्थिती में होने वाले लॉस को सीमित करने के लिए ही रिस्क रिवर्सल स्ट्रेटेजी अपनायी जाती है। 
 
Hedging Strategies का Futures and Options का मार्केट में उपयोग करते समय आपको हैजिंग करने की लागत (ऑप्शंस के लिए प्रीमियम या फ्यूचर्स के लिए मार्जिन), टाइम होराइजन और आपकी पोजीशन को हैजिंग की कितनी जरूरत है। ऐसे कारकों पर आपको हैजिंग करने से पूर्व सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए। इसके अतिरिक्त प्रत्येक स्ट्रेटेजी को लागू करने से पहले उसके जोखिम और प्रभावों के बारे में आपको पूरी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।  

Hedging Strategies को लागू करना जटिल हो सकता है। साथ ही आपको लेवरेज भी लेना पड़ सकता है। लेवरेज लेने के भी अपने नुकसान हैं। इसकी वजह से आपको नुकसान और प्रॉफिट दोनों ही हो सकता है। यहाँ पर आपको मैं यह सलाह देना चाहूंगी कि किसी भी स्ट्रेटेजी को लागू करने से पहले अपने फाइनेंशियल सलाहकार की राय अवश्य लें। खासकर तब जब आप फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस से अच्छी तरह वाफिक ना हों क्योंकि इसमें मनी का जोखिम होता है। 

Collar Strategy (कॉलर स्ट्रेटेजी

कॉलर स्ट्रेटेजी एक ऑप्शन स्ट्रेटेजी है, जिसमें डाउनसाइड पुट खरीदा जाता है। और उसे प्रोटेक्ट करने के लिए अपसाइड कॉल बेचा जाता है। इसे बड़े नुकसान से बचने के लिए लागू किया जाता है। लेकिन यह बड़े अपसाइड प्रॉफिट को कम करता है। इसे हैज रैपर या रिस्क रिवर्सल के रूप में जाना जाता है। 

एक इन्वेस्टर जो पहले से ही अंडरलेइंग एसेट में लॉन्ग है। वह आउट-ऑफ-द-मनी (OTM) ऑप्शन खरीदकर कॉलर स्ट्रेटेजी बनाता है। साथ ही एक आउट-ऑफ-द-मनी (OTM) कॉल ऑप्शन लिखता है। यानि सेल करता है, कॉल राइट करना यानि कॉल सेल करना। यदि सही से किया जाय तो कॉल राइट करने से भी प्रॉफिट होता है। 

उम्मीद है,आपको यह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में  हेजिंग (Hedging) क्या है? आर्टिकल पसंद आया होगा। अगर आपको यह What is Hedging Futures and Options in Hindi. आर्टिकल पसंद आये तो इसे सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें। ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त करने के लिए इस साइट को जरूर सब्स्क्राइब करें। आपको यह आर्टिकल कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताये। अगर आप शेयर मार्केट से संबंधित किसी टॉपिक पर आर्टिकल पढ़ना चाहते हैं तो कमेंट में लिख सकते हैं। आप मुझे फेसबुक पर भी फॉलो कर सकते हैं।  

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