म्यूच्यूअल फंड्स एक ऐसी कंपनियां होते हैं जो लोगों से पैसे एकत्र करते हैं। उस पैसे को स्टॉक, बांड्स और शार्ट-टर्म डेट जैसी सिक्युरिटीज में इन्वेस्ट करते हैं। म्यूच्यूअल फंड्स की संयुक्त होल्डिंग्स को उनका पोर्टफोलियो कहा जाता है।
इन्वेस्टर्स म्यूच्यूअल फंड्स के शेयर खरीदते हैं। सभी लोग अपने भविष्य के लिए बचत करते है। लेकिन हमे अपनी बचत को सही तरीके से invest करना भी जरूरी है। ताकि हमे अपनी बचत पर अच्छा रिटर्न मिल सके। आइए जानते हैं- म्यूच्यूअल फंड्स में इन्वेस्ट करके वेल्थ कैसे बनायें? How to create wealth by investing in mutual funds?
अगर आप म्यूच्यूअल फंड्स के बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो आपको योगेश शर्मा द्वारा लिखित म्यूच्यूअल फंड्स में इन्वेस्टमेंट द्वारा मुनाफा कैसे कमाएँ बुक जरूर पढ़नी चाहिए।
आर्टिकल में आप म्युचअल फंड्स के बारे में विस्तार से जानेगे। ये कैसे काम करते है तथा आप इसमें कैसे इन्वेस्टमेंट कर सकते है? यह उन लोगों के लिए है, जो शेयर मार्केट में निवेश करना चाहते हैं। लेकिन उन्हें इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। म्यूचुअल फंड्स में निवेश करना ऐसे लोगों के लिए अच्छा विकल्प है।
जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि म्युचुअल फंड्स एक प्रसिद्ध investment tool है। जिसमें कोई भी व्यक्ति 1000 रूपये से कम में इन्वेस्टमेंट की शुरूआत कर सकता है। इसमें बैंक तथा पोस्टऑफ़िस की बचत योजनाओ से काफी अच्छा रिटर्न मिलता है।
Mutual funds में रिस्क तो रहता है, लेकिन सच्चाई यह है कि रिस्क तो जीवन के हर क्षेत्र में ही है। इसमें आप समझदारी से निवेश करके अच्छा रिटर्न पा सकते है। इसमें आप SIP (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के द्वारा 500 रूपये महीने भी आप इन्वेस्ट कर सकते है। इससे रिस्क काफी कम हो जाता है तथा अच्छा रिटर्न मिलता है।
म्युचुअल फंड क्या है?
Mutual शब्द काअर्थ है, लोगों का एक साथ आना तथा Funds का मतलब है। कुछ लोगों का अपने पैसे साथ में जमा करना। Stocks या Bonds खरीदने के लिए, तथा कभी-कभी दोनों एक साथ खरीदने के लिए लोग म्यूच्यूअल फंड्स में इन्वेस्ट करते हैं। स्टॉप-लॉस हंटिंग
इस पैसे को pool करके एक फंड हाउस को दे दिया जाता है। Fund house में तेजतर्रार तथा high qualified, मार्केट एक्सपर्ट फंड मैनेजर होते है। जो आपके पैसे को सभालते है। ये फंड मैनेजर आपके पैसे को अलग-अलग कंपनियों में invest करते है।
जो अच्छा प्रदर्शन कर रही हों। ये पैसे को bonds में भी निवेश करते है। जिससे रिस्क कम हो जाता है। इस तरह फंड मैनेजर आपका पोर्टफोलियो बनाते हैं।
फंड मैनेजर प्रोफेशनल व्यक्ति होते है इसलिए वो आपका पोर्टफोलियो, आपके द्वारा पसंद की गई स्कीम के अनुरूप ही बनाते है। इस तरह आपका पोर्टफोलियो कई अलग-अलग सेक्टर या कंपनियो में निवेश करके बनाया जाता है।
ऐसा इसलिए क्योंकि सभी Stocks तथा सेक्टर एक समय पर एक ही दिशा में और उतनी ही मात्रा में नहीं चलते। जिससे संतुलन बना रहता है तथा रिस्क भी कम हो जाता है। इंस्ट्रिन्सिक वैल्यू
Mutual Funds के प्रकार म्युचूअल फंड्स एक बड़े छाते की तरह है। इसमें बहुत सारी कैटेगरी है, जैसे इक्विटी, डेट में बहुत सारी एसेट क्लास है। यदि आप अपना एक investment portfolio बनाना चाहते है। तो अपना पूरा पोर्टफोलियो mutual funds के अंदर ही बना सकते है।
म्यूच्यूअल फंड्स इक्विटी, डेट, गोल्ड, तथा ग्लोबल फंड्स आदि काफी तरह के फंड्स उपलब्ध है।म्यूच्यूअल फंड्स निम्नलिखित प्रकार के होते हैं- - इक्विट फंड: Equity fund के अंदर लार्ज कैप, मिड कैप तथा स्माल कैप आदि फंड होते है। जैसा कि नाम से ही जाहिर है। लार्ज कैप फंड ब्लू चिप कंपनियों में ही पैसा निवेश करते है। जबकि मिड कैप फंड मिड कैप कंपनियों में पैसा निवेश करते है। तथा स्माल कैप फंड् छोटी कंपनियों में अपना पैसा निवेश करते है। स्माल कैप फंड में जोखिम ज्यादा रहता है परन्तु रिटर्न काफी अच्छा मिलने की संभावना रहती है।
- बैलेंस फंड: Balance funds इक्विटी के साथ-साथ डेट में भी investment करते हैं। जिससे रिस्क कम हो जाता है, यह बहुत अच्छा फंड है। यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी बहुत प्रसिद्ध हो रहा है। जब Stock market गिरता है तब यह इक्विटी फंड की तुलना में कम गिरता है।
- डेट फंड: Debt fund में लम्बे समय के लिए निवेश किया जाता है। डेट फंडस bonds और डिबेंचर आदि में निवेश किया करते हैं। डेट mutual funds के पोर्टफोलियो में कई तरह के बॉन्ड्स है। जैसे गवर्नमेंट सिक्युरिटीज, कॉर्पोरेट्स बॉन्ड्स, कन्वर्टेबल डिबेंचर अदि जिससे रिस्क काफी कम हो जाता है।
- गोल्ड फंड: Gold fund में निवेश करने के लिए आप गोल्ड फंड में पैसा लगा सकते है। इसका एक बड़ा फायदा है, कि सोने पर जो मेकिंग चार्ज देना पड़ता है। उसके भी पैसे बच जाते है। सोने की रखवाली भी करनी पड़ती है जबकि gold fund को संभालना आसान है।
- ओपन-एंडेड फंड: Open ended fund को आप कभी भी खरीद तथा बेच सकते है। यदि आपको बीच में पैसे की जरूरत है। अथव ये फंडस आपके मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर रहा तो इसे आप जब चाहे बेच सकते है।
- क्लोज-एंडेड फंड: Close ended fund को केवल ऑफर अवधि के दौरान ही खरीदा जा सकता है। तथा इसे परिपक़्वता अवधि तक होल्ड रखना ही पड़ता है। इसे आप परिपक़्वता अवधि से पहले नहीं बेच सकते।
म्यूच्यूअल फंड्स एक ऐसी कंपनियां होते हैं जो लोगों से पैसे एकत्र करते हैं। उस पैसे को स्टॉक, बांड्स और शार्ट-टर्म डेट जैसी सिक्युरिटीज में इन्वेस्ट करते हैं। म्यूच्यूअल फंड्स की संयुक्त होल्डिंग्स को उनका पोर्टफोलियो कहा जाता है।
इन्वेस्टर्स म्यूच्यूअल फंड्स के शेयर खरीदते हैं। सभी लोग अपने भविष्य के लिए बचत करते है। लेकिन हमे अपनी बचत को सही तरीके से invest करना भी जरूरी है। ताकि हमे अपनी बचत पर अच्छा रिटर्न मिल सके। आइए जानते हैं- म्यूच्यूअल फंड्स में इन्वेस्ट करके वेल्थ कैसे बनायें? How to create wealth by investing in mutual funds?
आर्टिकल में आप म्युचअल फंड्स के बारे में विस्तार से जानेगे। ये कैसे काम करते है तथा आप इसमें कैसे इन्वेस्टमेंट कर सकते है? यह उन लोगों के लिए है, जो शेयर मार्केट में निवेश करना चाहते हैं। लेकिन उन्हें इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। म्यूचुअल फंड्स में निवेश करना ऐसे लोगों के लिए अच्छा विकल्प है।
जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि म्युचुअल फंड्स एक प्रसिद्ध investment tool है। जिसमें कोई भी व्यक्ति 1000 रूपये से कम में इन्वेस्टमेंट की शुरूआत कर सकता है। इसमें बैंक तथा पोस्टऑफ़िस की बचत योजनाओ से काफी अच्छा रिटर्न मिलता है।
Mutual funds में रिस्क तो रहता है, लेकिन सच्चाई यह है कि रिस्क तो जीवन के हर क्षेत्र में ही है। इसमें आप समझदारी से निवेश करके अच्छा रिटर्न पा सकते है। इसमें आप SIP (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के द्वारा 500 रूपये महीने भी आप इन्वेस्ट कर सकते है। इससे रिस्क काफी कम हो जाता है तथा अच्छा रिटर्न मिलता है।
म्युचुअल फंड क्या है?
इस पैसे को pool करके एक फंड हाउस को दे दिया जाता है। Fund house में तेजतर्रार तथा high qualified, मार्केट एक्सपर्ट फंड मैनेजर होते है। जो आपके पैसे को सभालते है। ये फंड मैनेजर आपके पैसे को अलग-अलग कंपनियों में invest करते है।
फंड मैनेजर प्रोफेशनल व्यक्ति होते है इसलिए वो आपका पोर्टफोलियो, आपके द्वारा पसंद की गई स्कीम के अनुरूप ही बनाते है। इस तरह आपका पोर्टफोलियो कई अलग-अलग सेक्टर या कंपनियो में निवेश करके बनाया जाता है।
- इक्विट फंड: Equity fund के अंदर लार्ज कैप, मिड कैप तथा स्माल कैप आदि फंड होते है। जैसा कि नाम से ही जाहिर है। लार्ज कैप फंड ब्लू चिप कंपनियों में ही पैसा निवेश करते है। जबकि मिड कैप फंड मिड कैप कंपनियों में पैसा निवेश करते है। तथा स्माल कैप फंड् छोटी कंपनियों में अपना पैसा निवेश करते है। स्माल कैप फंड में जोखिम ज्यादा रहता है परन्तु रिटर्न काफी अच्छा मिलने की संभावना रहती है।
- बैलेंस फंड: Balance funds इक्विटी के साथ-साथ डेट में भी investment करते हैं। जिससे रिस्क कम हो जाता है, यह बहुत अच्छा फंड है। यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी बहुत प्रसिद्ध हो रहा है। जब Stock market गिरता है तब यह इक्विटी फंड की तुलना में कम गिरता है।
- डेट फंड: Debt fund में लम्बे समय के लिए निवेश किया जाता है। डेट फंडस bonds और डिबेंचर आदि में निवेश किया करते हैं। डेट mutual funds के पोर्टफोलियो में कई तरह के बॉन्ड्स है। जैसे गवर्नमेंट सिक्युरिटीज, कॉर्पोरेट्स बॉन्ड्स, कन्वर्टेबल डिबेंचर अदि जिससे रिस्क काफी कम हो जाता है।
- गोल्ड फंड: Gold fund में निवेश करने के लिए आप गोल्ड फंड में पैसा लगा सकते है। इसका एक बड़ा फायदा है, कि सोने पर जो मेकिंग चार्ज देना पड़ता है। उसके भी पैसे बच जाते है। सोने की रखवाली भी करनी पड़ती है जबकि gold fund को संभालना आसान है।
- ओपन-एंडेड फंड: Open ended fund को आप कभी भी खरीद तथा बेच सकते है। यदि आपको बीच में पैसे की जरूरत है। अथव ये फंडस आपके मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर रहा तो इसे आप जब चाहे बेच सकते है।
- क्लोज-एंडेड फंड: Close ended fund को केवल ऑफर अवधि के दौरान ही खरीदा जा सकता है। तथा इसे परिपक़्वता अवधि तक होल्ड रखना ही पड़ता है। इसे आप परिपक़्वता अवधि से पहले नहीं बेच सकते।
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