Exchange Traded Fund (ETF): क्या आप भी शेयर मार्केट में पैसा लगाकर हर महीने एक सुरक्षित और तगड़ी कमाई करना चाहते हैं? लेकिन दिक्कत यह है कि आपको कंपनियों के बैलेंस शीट देखने का टाइम नहीं है, और म्यूचुअल फंड के भारी-भरकम एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio) से आप परेशान हैं?

तो ठहरिए! आज हम एक ऐसे जादुई इन्वेस्टमेंट टूल के बारे में बात करने वाले हैं जिसे ETF (Exchange Traded Fund) कहते हैं। दुनिया के बड़े-बड़े इन्वेस्टर्स जैसे वॉरेन बफे भी आम लोगों को इसमें पैसा लगाने की सलाह देते हैं।
                                                                            
Exchange Traded Fund (ETF) in Hindi



ईटीएफ या "एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड" बिल्कुल वैसा ही है, जैसा कि इसके नाम से पता चलता है। ऐसे फंड्स जो Stock Exchanges पर ट्रेड करते हैं और सामान्यतः किसी विशिष्ट Index को ट्रैक करते हैं। जब आप ETF में इन्वेस्ट करते हैं तो आपको assets का एक बंडल मिलता है। जिसमें आप Market session के दौरान trading कर सकते हैं। ETF आपके पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन लाने में मदद करता है। जिससे आपका जोखिम कम होता है। आइए बिल्कुल आसान और देसी हिंदी में समझते हैं कि ETF क्या है (What is Exchange Traded Fund in Hindi) और यह कैसे आपके लिए पैसों का पेड़ बन सकता है।

Exchange Traded Fund (ETF) क्या है? 

सरल शब्दों में कहें तो, ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) म्यूचुअल फंड और शेयर (Stock) का एक अनोखा मिक्सचर है।
  • यह मूलाधार (Underlying Asset) के रूप में कई शेयर्स या एसेट्स का एक ग्रुप (Basket) होता है, बिल्कुल एक म्यूचुअल फंड की तरह।
  • इसे आप स्टॉक मार्केट (NSE या BSE) पर एक नॉर्मल शेयर की तरह दिनभर कभी भी खरीद और बेच सकते हैं।

इसे एक मजेदार उदाहरण से समझतें हैं, मान लीजिए आप एक चाट की दुकान पर जाते हैं। आप अलग से आलू टिक्की, पपड़ी, और दही खरीदते हैं (यह है अलग-अलग शेयर खरीदना)। लेकिन अगर आप एक 'ऑल-इन-वन चाट प्लेटर' ऑर्डर करते हैं जिसमें सब कुछ सही मात्रा में पहले से मिक्स है, तो वह मूलाधार बास्केट (ETF) है।

ईटीएफ या एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, एक Marketable Security है। जो इंडेक्स, कमोडिटी, बॉन्ड या इंडेक्स फंड जैसी assets की एक टोकरी को ट्रैक करते है। इसका मतलब है कि आप ट्रेडिंग सेशन के दौरान Stock market में इन्हें buy & sell करने का ऑर्डर दे कर सकते हैं और उसी समय आपका ऑर्डर एक्सीक्यूट (executed) भी होगा। जबकि दिन के दौरान रखा गया म्यूचुअल फंड ऑर्डर बाजार बंद होने के बाद एक्सीक्यूट किया जाएगा। 

ये भी जानें- निफ्टी आईटी ईटीएफ में निवेश करने का सही तरीका!

किसी कमोडिटी की कीमत से लेकर Stocks  के बड़े और डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो तक किसी भी चीज़ को ट्रैक करने के लिए ETF को संरचित किया जा सकता है। ईटीएफ को विशिष्ट Investment strategies को ट्रैक करने के लिए भी डिज़ाइन किया जा सकता है।

सरल शब्दों में, ईटीएफ वे फंड हैं जो CNX Nifty, BSE Sensex, BankNifty, FinNifty, Gold और Silver इत्यादि जैसे इंडेक्स को ट्रैक करते हैं। जिन्हें निफ्टी ईटीएफ, बैंक निफ़्टी ईटीएफ, गोल्ड ईटीएफ, फिननिफ़्टी ईटीएफ, सिल्वर ईटीएफ आदि नामों से जाना जाता है।  जब आप ईटीएफ के शेयर/यूनिट खरीदते हैं, तो आप एक पोर्टफोलियो के शेयरकी एक यूनिट खरीद रहे होते हैं। जो इसके मूल Index की उपज और रिटर्न को ट्रैक करता है।

 ETF और अन्य प्रकार के इंडेक्स फंड के बीच मुख्य अंतर यह है कि ईटीएफ अपने संबंधित इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश नहीं करते हैं। बल्कि केवल इंडेक्स के प्रदर्शन को दोहराते हैं। वे Market को हराने की कोशिश नहीं करते, वे बाज़ार बनने की कोशिश करते हैं।

नियमित म्यूचुअल फंड के विपरीत, ईटीएफ Stock Exchange पर एक आम स्टॉक की तरह trade करता है। ईटीएफ का trading price किसी भी अन्य स्टॉक की तरह पूरे दिन बदलता रहता है। क्योंकि इसे स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदा और बेचा जाता है।

ईटीएफ का  ट्रेडिंग प्राइस इसके अंडरलाइंग एसेट के शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य पर आधारित होता है जो ईटीएफ का प्रतिनिधित्व करता है। ईटीएफ में आमतौर पर म्यूचुअल फंड योजनाओं की तुलना में अधिक लिक्विडिटी (ट्रेडिंग वॉल्यूम) होता है। इन्हें खरीदने और बेचने में म्यूच्यूअल फंड्स की तुलना में कम फीस लगती है। जो इन्हें  Retail investors के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाता है। 

ETF काम कैसे करता है?

ETF किसी न किसी इंडेक्स (Index), कमोडिटी (जैसे सोना या चांदी), या सेक्टर को ट्रैक करता है। अगर आपने Nifty 50 ETF खरीदा है, तो इसका मतलब है कि आपका पैसा भारत की टॉप 50 कंपनियों (जैसे रिलायंस, टीसीएस, एचडीएफसी) में उसी अनुपात में लग गया है जिस अनुपात में वे निफ्टी में शामिल हैं।
  • अगर निफ्टी 50 ऊपर जाएगा, तो आपका ETF भी ऊपर जाएगा।
  • अगर निफ्टी 50 नीचे आएगा, तो आपका ETF भी नीचे आएगा।

ETF के मुख्य प्रकार (Types of ETFs in India)

भारतीय शेयर बाजार में मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकार के ETF उपलब्ध हैं-
  1. इंडेक्स ETF (Index ETFs): ये Nifty 50, Bank Nifty, या Sensex को ट्रैक करते हैं। सबसे सुरक्षित माने जाते हैं।
  2. गोल्ड और सिल्वर ETF (Gold & Silver ETFs): बिना फिजिकल सोना या चांदी घर लाए, डिजिटल रूप में शुद्ध सोने-चांदी में निवेश करने का तरीका।
  3. सेक्टर ETF (Sectoral ETFs): जो किसी खास सेक्टर जैसे IT, Pharma, या Banking की कंपनियों में पैसा लगाते हैं (जैसे Nifty IT ETF)।
  4. इंटरनेशनल ETF (International ETFs): भारत में बैठे-बैठे अमेरिका की Google, Apple, या Tesla जैसी कंपनियों में निवेश करने का जरिया।

Passive Management 

ईटीएफ को पैसिवली मैनेज किया जाता है, ईटीएफ का उद्देश्य एक विशेष Market index से मैच करना है। इस फंड प्रबंधन शैली को निष्क्रिय प्रबंधन (Passive management) के रूप में जाना जाता है। पैसिव मैनेजमेंट ईटीएफ की मुख्य विशिष्ट विशेषता है। यह इंडेक्स फंड में investors के लिए कई फायदे लाता है।

पैसिव मैनेजमेंट का मतलब है कि फंड मैनेजर फंड को उसके इंडेक्स के अनुरूप रखने के लिए उसमें केवल मामूली, प्रियोडिक एडजस्टमेंट करता है। Exchange Traded Fund के इन्वेस्टर्स नहीं चाहते कि फंड मैनेजर्स उनके पैसे को मैनेज करें। यानि यह तय करें कि कौन से स्टॉक खरीदने,बेचने और होल्ड करने हैं। लेकिन वह बस बेंचमार्क इंडेक्स की तरह रिटर्न चाहता है।

चूंकि निफ्टी 50  (जिसमें 50 शेयर हैं) के सभी Share  रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए खरीदना संभव नहीं है। इसलिए इन्वेस्टर्स ऐसे ईटीएफ में निवेश कर सकते हैं, जो निफ्टी 50 को ट्रैक करता हो। ETF एक्टिवली मैनेज फंड्स जैसे कि म्यूच्यूअल फंड्स से काफी अलग होते हैं। एक्टिव फंड्स में फंड मैनेजर्स बेहतर प्रदर्शन के प्रयास में फंड्स एसेट्स की लगातार ट्रेडिंग करते रहते हैं।

क्योंकि ईटीएफ एक विशेष index  से बंधे होते हैं और ईटीएफ, म्यूचुअल फंड के विपरीत, शेयरों की एक अलग संख्या को कवर करते हैं। जिनके निवेश का दायरा लगातार परिवर्तित होता रहता है। इन कारणों से, ईटीएफ "प्रबंधकीय जोखिम" को कम करते हैं। किसी फंड मैनेजर द्वारा मैनेज एक्टिव फंड में invest करने के बजाय, जब आप ईटीएफ के शेयर खरीदते हैं तो आप बाजार की शक्ति का ही उपयोग कर रहे होते हैं। 

ETF और म्यूचुअल फंड में क्या अंतर है? (ETF vs Mutual Fund)

कई लोग इन दोनों में कंफ्यूज हो जाते हैं। आइए निम्नलिखित टेबल से सारा डाउट क्लियर करते हैं-

फीचर्सएक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF)म्यूचुअल फंड (Mutual Fund)
ट्रेडिंग का समयलाइव मार्केट के दौरान (सुबह 9:15 से दोपहर 3:30 तक) कभी भी।केवल मार्केट बंद होने के बाद (दिन में एक बार NAV पर)।
डीमैट अकाउंटअनिवार्य (Mandatory) है।डीमैट अकाउंट की कोई जरूरत नहीं होती।
खर्च (Expense Ratio)बहुत ही कम (आमतौर पर 0.05% से 0.25% तक) होता है। ज्यादा होता है (आमतौर पर 1% से 2.5%तक)
मैनेजमेंट का तरीकापैसिव (Passive) - इंडेक्स को कॉपी करता है।एक्टिव (Active) - फंड मैनेजर खुद दिमाग लगाता है।

ETFs में इन्वेस्टमेंट के फायदे 

एक कंपनी के स्टॉक्स में इन्वेस्टमेंट के मुकाबले ईटीएफ में इन्वेस्ट करने के निम्नलिखित फायदे हैं-

1. बहुत कम खर्चा (Low Expense Ratio): म्यूचुअल फंड को चलाने के लिए एक महंगा फंड मैनेजर होता है, इसलिए उनकी फीस ज्यादा होती है। ETF में कोई फंड मैनेजर रोज-रोज शेयर बदलता नहीं है, वह सिर्फ इंडेक्स को फॉलो करता है। इसलिए इसका खर्च न के बराबर होता है, जिससे लॉन्ग टर्म में आपका लाखों रुपया बचता है।

2. रियल-टाइम ट्रेडिंग (Real-Time Trading): म्यूचुअल फंड में आपको नहीं पता होता कि आज आपको किस रेट पर यूनिट्स मिलेंगी। लेकिन ETF को आप लाइव मार्केट में स्क्रीन पर प्राइस देखकर तुरंत खरीद या बेच सकते हैं।

3. कोई मिनिमम लॉक-इन पीरियड नहीं: जब आपका मन करे, आप इसे बेचकर अपना पैसा अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर सकते हैं (लिक्विडिटी बहुत हाई होती है)।

4. डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो: ईटीएफ एक सिंगल स्टॉक में trading की सरलता के साथ एक डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो के लाभ को जोड़ते हैं। निवेशक ईटीएफ शेयरों को मार्जिन पर खरीद सकते हैं, शेयरों को शार्ट सेल भी कर सकते हैं और लॉन्ग-टर्म के लिए होल्ड भी सकते हैं। ईटीएफ को देश भर के टर्मिनलों के माध्यम से स्टॉक एक्सचेंज पर किसी भी अन्य स्टॉक की तरह आसानी से खरीदा/बेचा जा सकता है।

5. एसेट एलोकेशन: पोर्टफोलियो के प्रॉपर डायवर्सिफिकेशन के लिए Asset Allocation के उचित स्तर को प्राप्त करने के लिए जरूरी लागत और एसेट्स को खरीदने के लिए Individual investors के लिए पैसे का प्रबंधन करना मुश्किल हो सकता है। ईटीएफ इन्वेस्टर्स को Stocks market के ब्रॉड सेगमेंट में एक्सपोजर प्रदान करते हैं। ETFs एक यूनिट में साथ मार्केट के बड़े सेक्टर्स की एक श्रृंखला को कवर करते हैं। जिससे इन्वेस्टर्स को उनकी वित्तीय आवश्यकताओं, जोखिम सहनशीलता और इन्वेस्टमेंट होराइजन के अनुरूप निवेश पोर्टफोलियो बनाने में मदद मिलती है। इंस्टीट्यूशनल और रिटेल दोनों तरह के investor अपनी एसेट्स को सुविधाजनक, कुशलतापूर्वक और लागत प्रभावी ढंग से आवंटित करने के लिए ईटीएफ का उपयोग करते हैं। 

6. नकद समीकरण ( Cash Equitisation ): इन्वेस्टर्स आमतौर पर Share market में इन्वेस्ट करना चाहते हैं। लेकिन उनके पास शेयर मार्केट इन्वेस्टिंग के बारे में जानने का समय नहीं होता है। लेकिन ईटीएफ में इन्वेस्ट करने के लिए ज्यादा सिखने की जरूरत नहीं होती है। इसलिए ETFs नकदी को parking Place भी प्रदान करते हैं। इसे इक्विटी इन्वेस्टमेंट के लिए ही डिजाइन किया गया है। इसमें इन्वेस्ट करने के लिए आपको इसकी बेसिक जानकारी होना ही काफी है। तो जिन इन्वेस्टर्स के पास Stockmarket के बारे में जानने का समय नहीं होता है। वे इन्वेस्टर्स ETFs में अपने पैसे को इन्वेस्ट कर सकते हैं। 

7. हेजिंग रिस्क: ईटीएफ एक उत्कृष्ट हेजिंग माध्यम हैं क्योंकि इन्हें उधार लिया जा सकता है और कम समय में बेचा भी जा सकता है। छोटे मूल्यवर्ग जिसमें ईटीएफ अधिकांश डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सापेक्ष व्यापार करते हैं, विशेष रूप से small investment पोर्टफोलियो के लिए अधिक सटीक जोखिम प्रबंधन प्रदान करते हैं। 

8. आर्बिट्रेज (नकद बनाम वायदा) और कवर विकल्प रणनीतियाँ: ईटीएफ का उपयोग केश और फ्यूचर मार्केट के बीच मध्यस्थता के लिए किया जा सकता है। क्योंकि इनमें trading  करना बहुत आसान है। ईटीएफ का उपयोग इंडेक्स पर कवर ऑप्शन ट्रेडिंग स्ट्रेटेजीज के लिए भी किया जा सकता है। 

ETF के नुकसान या कमियां (Disadvantages of ETF)

जहाँ फायदे हैं, वहाँ कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं-
  • ब्रोकरेज और टैक्स: चूंकि यह शेयर की तरह ट्रेड होता है, इसलिए हर बार खरीदने और बेचने पर आपको ब्रोकरेज चार्ज और STT (Securities Transaction Tax) देना होता है।
  • लिक्विडिटी की समस्या: भारत में कुछ छोटे या सेक्टर ETFs ऐसे हैं जिनमें खरीदार और विक्रेता बहुत कम होते हैं। हमेशा हाई वॉल्यूम वाले ETF (जैसे Nippon India, SBI, या HDFC के ETFs) ही चुनें।
  • डीमैट अकाउंट जरूरी: बिना डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट के आप इसमें ₹1 भी इन्वेस्ट नहीं कर सकते।

भारत के बेस्ट ETFs कौन से हैं? (Best ETFs to Invest in India)

यदि आप शुरुआत करना चाहते हैं, तो इन सबसे लोकप्रिय और सुरक्षित ETFs पर नज़र रख सकते हैं-
  1. Nippon India ETF Nifty BeES: यह भारत का सबसे पुराना और सबसे ज्यादा लिक्विडिटी वाला निफ्टी ETF है।
  2. SBI ETF Nifty 50: सरकारी भरोसे के साथ बेहतरीन ट्रैकिंग।
  3. CPSE ETF: सरकारी कंपनियों में निवेश करने के लिए बेस्ट।
  4. HDFC Gold ETF / Nippon India Gold BeES: सोने में निवेश का सबसे बेस्ट डिजिटल तरीका।a

ETF में इन्वेस्ट कैसे करें? (How to Buy ETF in Hindi)

ETF में निवेश करना उतना ही आसान है जितना कोई मोबाइल ऐप चलाना। बस इन स्टेप्स को फॉलो करें-
  • सबसे पहले किसी अच्छे ब्रोकर (जैसे Zerodha, Groww, Angel One या Upstox) के साथ अपना Trading and Demat account खोलें।
  • अपने ऐप के सर्च बार में जाएं और टाइप करें (जैसे- NIFTYBEES या GOLDBEES)।
  • जितने यूनिट्स आप खरीदना चाहते हैं, वह संख्या दर्ज करें।
  • Buy बटन पर क्लिक करें। बस! यह आपके होल्डिंग्स में आ जाएगा
निष्कर्ष: क्या आपको ETF में पैसा लगाना चाहिए? अगर आप एक ऐसे इन्वेस्टर हैं जो बिना ज्यादा रिस्क लिए, कम खर्चे में शेयर बाजार के बढ़ने का फायदा उठाना चाहते हैं, तो ETF आपके लिए सबसे बेस्ट विकल्प है। लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएट करने के लिए हर महीने अपनी कमाई का एक छोटा हिस्सा अच्छे इंडेक्स ETF में लगाना एक बेहद समझदारी भरा फैसला हो सकता है।

आपका क्या सोचना है? क्या आपने कभी किसी ETF या म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट किया है? अपना अनुभव नीचे Comment Box में जरूर शेयर करें! इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ जरूर Share करें जो शेयर मार्केट से डरते हैं।

ETFs के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQs 

प्रश्न 1. क्या ETF कॉस्ट इफेक्टिव होते हैं?
उत्तर: ईटीएफ किसी इंडेक्स को उससे बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश किए बिना ट्रैक करता है। इसलिए इसमें एक्टिवली मैनेज पोर्टफोलियो की तुलना में कम एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट लगती है। विशिष्ट ईटीएफ एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट एक्टिवली मैनेज फंड की तुलना में कम होती है। जो प्रति वर्ष 0.20% से कम आती है, जबकि कुछ एक्टिवली मैनेज म्यूचुअल फंड योजनाओं की 1% से अधिक वार्षिक कॉस्ट होती है। जबकि ETF का  एक्सपेंस रेश्यो कम होता है इसलिए ईटीएफ रिटर्न बढ़ जाते हैं।

प्रश्न 2. ETFs की लागत कम क्यों है?
उत्तर: ईटीएफ का एक्सपेंस रेश्यो कम है, कुछ निश्चित लागतें हैं जो ईटीएफ के लिए अद्वितीय हैं। चूंकि ईटीएफ को स्टॉक ब्रोकर के माध्यम से स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदा और बेचा जाता है। हर बार जब कोई इन्वेस्टर ईटीएफ में खरीदारी या बिक्री करता है। तो वह लेनदेन के लिए ब्रोकरेज का भुगतान करता है। 

प्रश्न 3. क्या ETFs केवल स्टॉक के लिए हैं? 
उत्तर: नहीं, कोई भी asset class जिसका एक प्रकाशित इंडेक्स है। उसमें डेली ट्रेडिंग के लिए पर्याप्त लिक्विडिटी या ट्रेडिंग वॉल्यूम है। उसे ईटीएफ बनाया जा सकता है। बांड, रियल एस्टेट, कमोडिटी, करेंसी और मल्टी-एसेट फंड सभी ईटीएफ प्रारूप में उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए, भारत में म्यूचुअल फंड गोल्ड ईटीएफ की पेशकश करते हैं, जहां Underlying Investment फिजिकल गोल्ड में होता है। 

प्रश्न 4. ETFs अपनी लिक्विडिटी कैसे प्राप्त करते हैं? 
उत्तर: ईटीएफ अपनी लिक्विडिटी सैकेंडरी मार्केट या Share market से प्राप्त करते हैं। और दूसरे, निर्माण इकाई आकार में फंड के साथ वस्तु निर्माण/मोचन प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त करते हैं। इसके अलावा, एक इन्वेस्टर को एसटीटी और स्टॉक में ट्रेडिंग की सामान्य लागत भी लगती है। जिसमें Bid-ask spread आदि में अंतर भी शामिल है। फिर भी ETF को buy & sell करने की लागत अन्य फंड्स की लागत से कम होती है। इसलिए ये भी माँग उठती रही है कि पारंपरिक म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी अप्रत्यक्ष रूप से उसी ट्रेडिंग लागत के अधीन किया जाना चाहिए। जो कॉस्ट अन्य फंड्स के इन्वेस्टर्स को चुकानी होती है। 

प्रश्न 5. ETFs के प्राइस में लचीलापन कहाँ से आता है?

उत्तर: ईटीएफ शेयर बिल्कुल स्टॉक की तरह trade किये जाते हैं। इंडेक्स फंडों के विपरीत, जिनका प्राइस केवल बाजार बंद होने के बाद ही तय होता है। ईटीएफ का प्राइस और trading पूरे कारोबारी दिन में लगातार किया जाता है। उन्हें सामान्य स्टॉक की तरह मार्जिन पर खरीदा जा सकता है, कम समय में बेचा जा सकता है, या लंबी अवधि के लिए रखा जा सकता है।

क्योंकि ETFs का प्राइस उसके Underlying index के शेयरों पर आधारित होता है। ईटीएफ के investors एकल कंपनियों के शेयरों की तुलना में Diversified Portfolio के अतिरिक्त लाभों का आनंद लेते हैं। साथ ही कई निवेशक इसमें अधिक लचीलेपन  का अनुभव करते हैं। 

क्योंकि एसेटस के सभी प्रकार stocks की एक टोकरी का प्रतिनिधित्व करते हैं। जबकि ईटीएफ अलग -अलग बास्केट का प्रतिनिधित्व करते हैं। आपने वारेन बफे का प्रसिद्ध कोट तो "हमें अपने सभी अंडे एक ही बास्केट में नहीं रखने चाहिए" अर्थात आपको एक ही कंपनी के स्टॉक्स में अपना पूरा पैसा invest नहीं करना चाहिए। 

आमतौर पर ईटीएफ व्यक्तिगत स्टॉक की तुलना में बहुत अधिक मात्रा में ट्रेड करते हैं। हाई  ट्रेडिंग वॉल्यूम का मतलब हाई लिक्विडिटी होता है, जो निवेशकों को बहुत कम जोखिम और खर्चे के साथ निवेश की स्थिति में आने और बाहर निकलने में सक्षम बनाता है। 

प्रश्न 6. ईटीएफ और इंडेक्स फंड के बीच क्या अंतर है? 
उत्तर: वैसे तो ईटीएफ और इंडेक्स फंड दोनों को ही पैसिवली मैनेज किया जाता है। लेकिन फिर भी दोनों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि इंडेक्स फंड भी म्यूचुअल फंडों की तरह काम करते हैं। जिनमें अंडरलाइंग सिक्युरिटीज के NAV के आधार पर दिन के अंत में उनका प्राइस तय किया जाता है। 

जबकि ETFs का प्राइस ट्रेडिंग सेशन के दौरान मार्केट के अनुसार तय किया जाता है। इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर इन्हें खरीदना और जल्दी बेचना आसान है। दूसरे, ईटीएफ केवल स्टॉक एक्सचेंजों पर उपलब्ध हैं। इसलिए, आपको ईटीएफ में invest करने के लिए एक डीमैट अकाउंट की जरूरत होती है। 

जबकि इंडेक्स फंड के लिए, आपको डीमैट खाते की आवश्यकता नहीं होती है और आप इंडेक्स फंड की यूनिट्स को छोटी मात्रा में म्यूचुअल फंड से सीधे खरीद या बेच सकते हैं।

उम्मीद है, आपको यह शेयर मार्केट से रोज़ाना कमाई का सुरक्षित तरीका!  आर्टिकल पसंद आया होगा। अगर आपको यह Exchange Traded Fund (ETF) India in Hindi. आर्टिकल पसंद आये तो इसे अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें। ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप इस मनी मार्केट हिंदी साइट को जरूर सब्स्क्राइब करें। यह आर्टिकल आपको कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताएं।