Stoploss Order: इस आर्टिकल में आप स्टॉपलॉस लगाने की उस गुप्त वैज्ञानिक कला (Art of Placing a Stop-Loss Order) को डिकोड समझेंगे। जिसे सीखकर आप न सिर्फ अपने कैपिटल को सुरक्षित रखेंगे, बल्कि हर महीने मार्केट से कंसिस्टेंट इनकम जनरेट कर पाएंगे। आइए जानते हैं- जानें Stop-Loss लगाने की वो गुप्त कला जो कोई नहीं बताता! 
                                                                                
Stoploss order

स्टॉप-लॉस ऑर्डर लगाने की कला क्या है? (What is The Art of Placing a Stop-Loss Order?)

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि आपने किसी शेयर या ऑप्शंस में एंट्री ली, डर के मारे एक स्टॉप-लॉस लगाया, और कुछ ही मिनटों में मार्केट ने ठीक आपके स्टॉप-लॉस को टच किया (Stop-loss hunting) और शेयर प्राइस वहीं से रॉकेट की तरह ऊपर भाग गया? उस वक्त दिल से जो चीख निकलती है और जो मानसिक दर्द होता है। उसे सिर्फ एक ट्रेडर ही समझ सकता है। 

सच तो यह है कि बिना सही तकनीक के स्टॉप-लॉस लगाना अपनी मेहनत की कमाई को बड़े संस्थागत निवेशकों (Whales/Operators) की थाली में परोसने जैसा है। अगर आप रोज़-रोज़ के इस नुकसान से थक चुके हैं और अपनी ट्रेडिंग को एक प्रॉफिटेबल बिज़नेस में बदलना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है। 

जब कोई भी ट्रेड किया जाता है। तब ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के द्वारा स्टॉप लॉस आर्डर का भी एक विकल्प दिया जाता है। इसे किसी भी समय बदला जा सकता है। एक बार जब मार्केट ऑर्डर लग जाता है तो स्टॉप लॉस आर्डर प्रभावी रूप से सक्रिय हो जाता है। ट्रेड लेते समय आमतौर पर ट्रेडर्स स्टॉप लॉस ऑर्डर देते हैं। 

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Stop-Loss क्या है?

शेयर मार्केट विशेषकर F&O (Futures and Options Trading), एक दोधारी तलवार की तरह है। यहाँ जितनी तेज़ी से पैसा बनता है, उससे दोगुनी तेज़ी से गायब भी हो जाता है। सरल शब्दों में कहें तो स्टॉप-लॉस (SL) स्टॉक मार्केट में आपका वह 'अदृश्य बॉडीगार्ड' है जो आपके नुकसान को एक तय सीमा से आगे बढ़ने नहीं देता। 

यह एक एडवांस ऑर्डर होता है, जिसे आप अपने ब्रोकर (जैसे Zerodha, Groww, Angel One) के टर्मिनल पर लगाते हैं कि यदि किसी शेयर या इंडेक्स की कीमत एक खास स्तर से नीचे गिरती है तो आपका ट्रेड अपने आप कट जाए।

जब ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स मार्केट में ट्रेड कर रहे होते हैं तो वे कोई भी नुकसान नहीं करना चाहते हैं। अतः ट्रेड के लिए एक स्टॉप लॉस लेवल निर्धारित करना जरूरी होता है, यहीं पर स्टॉप लॉस ऑर्डर लगाने की जरूरत पड़ती हैं।लेकिन कई ट्रेडर्स को यह तय करने में कठिनाई होती है कि उन्हें अपना स्टॉप लॉस लेवल कहां निर्धारित करना है।

यदि Share price विपरीत दिशा में चलता है और आपकी पोजीशन उसमें बनी रहती है तो इससे आपको बड़ा नुकसान हो सकता है। अतः नुकसान से बचने के लिए अपने स्टॉप-लॉस को बहुत करीब सेट करना चाहिए। जिससे आप बहुत जल्दी अवांछनीय ट्रेड से बाहर निकल सकें। 

बिना स्टॉप-लॉस के ट्रेडिंग करना, बिना ब्रेक की कार चलाने के समान होता है। कल्पना कीजिए कि आप पहाड़ी रास्ते पर 120 किमी/घंटा की रफ्तार से एक ऐसी कार चला रहे हैं। जिसमें ब्रेक ही नहीं है! बिना स्टॉप-लॉस के ट्रेडिंग करना बिल्कुल वैसा ही है।

स्टॉपलॉस से कैपिटल प्रोटेक्शन (Capital Protection) मिलता है। ट्रेडिंग में आपका सबसे बड़ा एसेट (Asset) आपका पैसा है। अगर पैसा ही खत्म हो गया तो आप अगली बाजी कैसे खेलेंगे?

इससे इमोशंस पर कंट्रोल होता है। जब लाइव मार्केट में स्क्रीन पर लाल रंग में लॉस (M2M Loss) बढ़ता हुआ दिखता है, तो इंसान का दिमाग काम करना बंद कर देता है। स्टॉप-लॉस आपको 'उम्मीद की जाल' (Hope Trade) से बचाता है।

Share market में दो सामान्य प्रकार के ऑर्डर होते हैं- 
  1. मार्केट ऑर्डर 
  2. लिमिट ऑर्डर 
इनमें से प्रत्येक में कुछ अलग-अलग विशेषताएँ होती हैं। इसके अलावा एक और प्रकार का ऑर्डर होता है। जिसे stoploss order (SL) कहते हैं। यह आपके ट्रेडों को अच्छे तरीके से संभालने में मदद कर सकता है। यह आपके मार्केट और लीमिट ऑर्डर के साथ ट्रिगर प्राइस सेट करने में मदद करता है। 

Stop-Loss Order क्या है? 

जब शेयर के प्राइस एक विशेष लेवल पर पहुँच जाते हैं तो उन्हें बेचने के लिए stockbroker के पास स्टॉप लॉस ऑर्डर रखा जाता है। ये ऑर्डर ट्रेडर्स को ट्रेडिंग पोजीशन में होने वाले संभावित नुकसान को सीमित करते हैं। यदि आप स्टॉप लॉस ऑर्डर को buying price से 10% नीचे सेट करते हैं तो आपका नुकसान 10% सीमित रहेगा। 

उदाहरण के लिए जैसे आप XYZ कंपनी के शेयर 25 रूपये प्रति शेयर पर खरीदते हैं। और आप 22.50 पर स्टॉप लॉस सेट करते हैं तो आपका नुकसान 10% तक ही सीमित रहेगा क्योंकि यदि आपके द्वारा खरीदे गए XYZ कंपनी के शेयर का प्राइस 22.50 से नीचे जायेगा। आपका सौदा अपने 22.50 के प्राइस पर आते ही ऑटोमेटिकली कट जायेगा। 

इस तरह आप इस ट्रेड में जितना जोखिम उठाने के लिए तैयार थे। आपको उतना ही जोखिम उठाना पड़ेगा। अगर उचित तरीके से उपयोग किया जाता है, तो स्टॉप-लॉस ऑर्डर आपके प्रॉफिट में बहुत बड़ा अंतर ला सकता है। लगभग हर कोई इस टूल से लाभ उठा सकता है। स्टॉप-लॉस ऑर्डर का उपयोग करने का एक प्रमुख लाभ यह है कि आपको प्रतिदिन अपनी होल्डिंग्स की निगरानी करने की जरूरत नहीं रहती है। 

इसका एक नुकसान भी है कि शार्ट टाइम प्राइस वोलेटिलिटी वोलेटिलिटी में भी आपकी पोजीशन कट सकती है। शेयर मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसान से बचने के लिए आप स्टॉप लॉस आर्डर के विकल्प के रूप में आप ऑप्शंस कॉन्ट्रेक्ट का भी उपयोग कर सकते हैं। 

Stop Loss Order का निर्धारण 

किसी एक ट्रेड में आप जितना जोखिम उठाना चाहते हैं। उसे निर्धारित करने के लिए स्टॉप-लॉस ऑर्डर दिया जाता है। अतः स्टॉप-लॉस प्राइस, ट्रेड में होने वाले नुकसान को सीमित करने के इरादे से रणनीतिक रूप से निकाला जाना चाहिए।
 
उदाहरण के लिए यदि आपने कोई  stock 30 रूपये के प्राइस पर खरीदा है और stoploss 24 रूपये पर लगाया है। इसका मतलब आप इस ट्रेड में 20% का जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं। यदि आप 20% का रिस्क उठाना चाहते हैं तो आपको ट्रेलिंग स्टॉप लॉस लगाना चाहिए। 

ट्रेड लेने से पहले निर्धारित कर ले कि आप stoploss किस प्राइस पर लगाना चाहते हैं? स्टॉप लॉस लगाने के बहुत सारे सिद्धांत हैं, टेक्निकल ट्रेडर्स stocks के प्राइस ट्रेंड का अनुमान लगाने के लिए नए-नए तरीके खोजते रहते हैं। अगल -अलग ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी के लिए स्टॉप-लॉस भी अलग तरह से लगाए जाते हैं। 

स्टॉप लॉस आर्डर देने के लिए आपको स्टॉप लॉस ट्रिगर प्राइस के कॉन्सेप्ट को समझने की जरूर पड़ेगी। आप मार्केट ऑर्डर और लिमिट ऑर्डर दोनों के लिए स्टॉप-लॉस ऑर्डर दे सकते हैं। कुछ traders प्रतिशत के हिसाब से stoploss लगाते हैं। इसमें stocks के बाइंग प्राइस के प्रतिशत के रूप में स्टॉप-लॉस लगाया जाता है। जैसे बाइंग प्राइस का 3, 5, 7% आदि। कुछ ट्रेडर्स सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस के नीचे और ऊपर स्टॉप लॉस लगाते हैं। 

Stop Loss लगाने के 5 सबसे अच्छे तरीके 

स्टॉप लॉस का सबसे प्रचलित और सामान्य तरीका प्रतिशत स्टॉप-लॉस है। स्टॉप-लॉस लगाने के प्रतिशत तरीके के रूप में शेयर के बाइंग प्राइस के प्रतिशत का स्टॉपलॉस लगाया जाता है। यह तरीका ट्रेडर्स को stock की वोलेटिलिटी के आधार पर रिस्क मैनेजमेंट स्ट्रेटेजी अपनाने की अनुमति देता है। Stop-loss order को शेयर के बाइंग प्राइस से 1 से 3% पर सबसे ज्यादा लगाया जाता है।

स्टॉप लॉस लगाने का दूसरा सबसे ज्यादा प्रचलित तरीका सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस लेवल पर लगाना है। यदि आप शेयर खरीद रहे हैं तो आपको शेयर के सपोर्ट प्राइस के थोड़ा सा ऊपर उसे खरीदना चाहिए और सपोर्ट लेवल के ठीक नीचे आपको स्टॉप लॉस लगाना चाहिए। इसी तरह अगर आप किसी शेयर को शार्ट-सेल कर रहे हैं तो आपको उसे रेसिस्टेन्स लेवल के ठीक नीचे बेचना चाहिए और रेजिस्टेंस लेवल के ठीक ऊपर स्टॉप लॉस लगाना चाहिए। 

स्टॉप लॉस लगते समय बस एक बात का ध्यान रखना चाहिए। यदि आप लॉन्ग टर्म ट्रेडर हैं तो आपको सबसे स्टॉन्ग सपोर्ट लेवल के नीचे स्टॉप लॉस लगाना चाहिए। किन्तु अगर आप शार्ट टर्म ट्रेडिंग कर रहे हैं तो आपको ज्यादा बड़ा स्टॉप लॉस नहीं रखना चाहिए। आप stoploss लगाने के लिए एवरेज ट्रू रेंज एवरेज ट्रू रेंज इंडिकेटर का यूज भी कर सकते हैं। 

एक प्रोफेशनल ट्रेडर कभी भी रैंडमली (जैसे- ₹5 या ₹10 का नुकसान सोचकर) स्टॉप-लॉस नहीं लगाता। इसके पीछे ठोस गणित और तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) होता है। आइए इन तरीकों को विस्तार से समझते हैं-

1. सपोर्ट और रेजिस्टेंस आधारित स्टॉप-लॉस (Support & Resistance Based SL): यह सबसे लोकप्रिय और प्रभावी तरीका है। यदि आप किसी शेयर को खरीद (Buy/Long) रहे हैं, तो आपका स्टॉप-लॉस हमेशा हालिया सपोर्ट लेवल (Swing Low) के थोड़ा नीचे होना चाहिए।

लॉजिक: अगर मार्केट उस मजबूत सपोर्ट को तोड़ देता है, तो इसका मतलब है कि मार्केट का ट्रेंड बदल चुका है और आपका ट्रेड में बने रहना बेवकूफी होगी। सपोर्ट के ठीक ऊपर या ठीक लाइन पर SL न रखें। ऑपरेटर्स के हंटिंग ज़ोन से बचने के लिए हमेशा सपोर्ट लाइन से 0.2% से 0.5% नीचे बफर (Buffer) देकर रखें।

2. मूविंग एवरेज आधारित स्टॉप-लॉस (Moving Average Based SL): इंट्राडे और स्विंग ट्रेडिंग में मूविंग एवरेज डायनामिक सपोर्ट और रेजिस्टेंस का काम करते हैं।
  • 20 EMA (Exponential Moving Average): इंट्राडे और मोमेंटम ट्रेडिंग के लिए बेस्ट है।
  • 50 EMA / 200 EMA: पोजीशनल और लॉन्ग टर्म ट्रेडिंग के लिए।
  • जब तक कैंडल मूविंग एवरेज के ऊपर क्लोज हो रही है, ट्रेड में बने रहें। जैसे ही कोई कैंडल मूविंग एवरेज के नीचे क्लोजिंग दे दे, तुरंत बाहर निकल जाएं।
3. एटीआर आधारित स्टॉप-लॉस (ATR - Average True Range Based SL): यह पूरी तरह से गणितीय और मार्केट की वोलैटिलिटी (Volatility) पर आधारित तरीका है। ATR इंडिकेटर आपको बताता है कि कोई शेयर एक निश्चित समय में औसतन कितना ऊपर-नीचे होता है। 

यदि किसी स्टॉक की कीमत ₹500 है और उसका ATR ₹5 है, तो आपका स्टॉप-लॉस मौजूदा कीमत से कम से कम 1 × ATR या 1.5 × ATR (यानी ₹7.5) नीचे होना चाहिए। यह तरीका शांत मार्केट में छोटा स्टॉप-लॉस और उथल-पुथल (Highly Volatile) वाले मार्केट में बड़ा स्टॉप-लॉस देता है, जिससे बेवजह SL हिट नहीं होते।

4. इंडिकेटर आधारित स्टॉप-लॉस (PSAR & Ichimoku Cloud): 
  • Parabolic SAR: यह इंडिकेटर चार्ट पर डॉट्स (Dots) के रूप में दिखता है। जब तक डॉट्स कैंडल के नीचे हैं, आपका ट्रेड सुरक्षित है। जैसे ही डॉट कैंडल के ऊपर शिफ्ट हो, वह आपका एग्जिट पॉइंट है।
  • Ichimoku Cloud: इस क्लाउड की निचली सीमा (Kumo Cloud Base) को एक बेहतरीन ट्रेलिंग स्टॉप-लॉस माना जाता है।
5. चार्ट पैटर्न और कैंडलस्टिक बेसिस (Chart Pattern Based SL): यदि आप Head and Shoulders, Double Bottom, या Inverted Hammer जैसी कैंडल देखकर ट्रेड ले रहे हैं, तो आपका स्टॉप-लॉस उस कैंडल के लो (Low) या पैटर्न के 'नेकलाइन' के थोड़ा पीछे होना चाहिए।

Risk Management और पोजीशन साइजिंग का गणित 

ट्रेडिंग में सफलता की कुंजी सही प्रेडिक्शन (Prediction) नहीं, बल्कि सही Risk-to-Reward Ratio (RRR) है।

पैरामीटररिटेल ट्रेडर का तरीकाप्रोफेशनल ट्रेडर का तरीका
रिस्क प्रति ट्रेडअपनी मर्जी से कुछ भी (₹5,000 - ₹10,000)कैपिटल का केवल 1% या अधिकतम 2%
रिस्क-टू-रिवॉर्ड1:0.5 (₹1000 का रिस्क, ₹500 का प्रॉफिट)न्यूनतम 1:2 (₹1000 का रिस्क, ₹2000 का प्रॉफिट)
पोजीशन साइजिंगबिना सोचे-समझे कितनी भी क्वांटिटीरिस्क के हिसाब से तय क्वांटिटी
Position Sizing Formula: मान लीजिए आपकी कुल ट्रेडिंग कैपिटल ₹1,00,000 है। आप एक ट्रेड में केवल 1% का रिस्क लेना चाहते हैं (यानी ₹1,000)। आपके द्वारा चुने गए शेयर की कीमत ₹200 है और तकनीकी चार्ट के अनुसार आपका स्टॉप-लॉस ₹195 (यानी ₹5 का रिस्क) पर बन रहा है।

यदि आप इस गणित के साथ चलेंगे, तो लगातार 5 ट्रेड गलत होने के बाद भी आपकी कैपिटल का सिर्फ 5% नुकसान होगा, और आप मार्केट में लंबे समय तक टिके रहेंगे।

ट्रेलिंग स्टॉप-लॉस क्या है? 

बहती गंगा में हाथ धोना (What is Trailing Stop-Loss?) ट्रेडिंग में एक कहावत है: "अपने नुकसान को छोटा करो और अपने प्रॉफिट को भागने दो (Cut your losses short and let your profits run)"। प्रॉफिट को अधिकतम करने की इसी कला को Trailing Stop-Loss (TSL) कहते हैं।

यह कैसे काम करता है? मान लीजिए आपने कोई ऑप्शन ₹100 पर खरीदा और उसका इनिशियल स्टॉप-लॉस ₹80 था। अब वह ऑप्शन बढ़कर ₹130 हो गया। यदि आप साधारण स्टॉप-लॉस का उपयोग करते हैं, तो आपका SL अभी भी ₹80 पर ही रहेगा। अगर मार्केट अचानक क्रैश हुआ, तो प्रॉफिट वाला ट्रेड भी लॉस में बदल जाएगा।

ट्रेलिंग का जादू: जैसे ही कीमत ₹130 हुई, आपने अपने स्टॉप-लॉस को मॉडिफाई करके ₹110 कर दिया। अब चाहे मार्केट कितना भी गिर जाए, आप ₹10 के प्रॉफिट के साथ ही बाहर निकलेंगे। इसे कहते हैं "Locking in the Profit"।

ऑप्शंस ट्रेडिंग में स्टॉप-लॉस लगाने की चुनौतियाँ (Stop-Loss in Options Trading)

निफ्टी (Nifty) और बैंक निफ्टी (Bank Nifty) के ऑप्शंस में ट्रेड करते समय सामान्य नियम काम नहीं आते क्योंकि यहाँ Time Decay (Theta) और Volatility (Vega) का सीधा असर पड़ता है।
  • चार्ट बनाम प्रीमियम (Spot Chart vs Premium): हमेशा स्टॉप-लॉस इंडेक्स के स्पॉट चार्ट (Spot Chart) के लेवल्स को देखकर तय करें, न कि ऑप्शन के प्रीमियम के उतार-चढ़ाव को देखकर। जब स्पॉट चार्ट पर आपका सपोर्ट लेवल टूट जाए, तो ऑप्शन चाहे किसी भी भाव पर हो, एग्जिट मार दें।
  • एक्सपायरी के दिन का खतरा: एक्सपायरी के दिन आउट-ऑफ-द-मनी (OTM) ऑप्शंस बड़ी तेज़ी से ज़ीरो होते हैं। ऐसे में बहुत छोटा या बहुत बड़ा स्टॉप-लॉस दोनों ही खतरनाक हैं। हमेशा इन-द-मनी (ITM) या एट-द-मनी (ATM) में ही काम करें ताकि आपका स्टॉप-लॉस तकनीकी रूप से सही काम करे।

स्टॉप-लॉस लगाते समय की जाने वाली 5 Common Mistakes 

यदि आप स्टॉक मार्केट से रेगुलर पैसिव इनकम कमाना चाहते हैं, तो आज ही इन गलतियों को करना बंद कर दें-
  1. दिमाग में स्टॉप-लॉस रखना (Mental Stop-Loss): कई ट्रेडर्स सोचते हैं कि "जब भाव ₹150 पर आएगा, तब मैं उंगली से बटन दबाकर बेच दूंगा।" लाइव मार्केट में जब भाव ₹150 पर आता है, तो आपकी भावनाएं आपको रोक लेती हैं और आप भारी नुकसान करवा बैठते हैं। हमेशा सिस्टम में ऑर्डर पंच करें।
  2. स्टॉप-लॉस को और नीचे खिसकाना (Moving SL Downwards): ट्रेड लेने के बाद जैसे ही मार्केट आपके विपरीत जाने लगता है, डर के मारे अपने ₹90 के स्टॉप-लॉस को ₹80 या ₹70 पर खिसकाना सबसे बड़ी आत्मघाती गलती है।
  3. बहुत छोटा स्टॉप-लॉस लगाना (Too Tight Stop-Loss): ब्रोकरेज बचाने या नुकसान के डर से बिल्कुल करंट प्राइस के पास SL लगा देना। इससे मार्केट का सामान्य शोर (Market Noise) ही आपका स्टॉप-लॉस उड़ा देगा।
  4. बिना बफर के एंट्री: सपोर्ट या रेजिस्टेंस के बिल्कुल सटीक आंकड़े पर ऑर्डर लगाना।
  5. लॉस रिकवरी मोड (Revenge Trading): एक बार स्टॉप-लॉस हिट होने के बाद गुस्से में आकर बिना किसी स्ट्रेटेजी के दोबारा बड़ी क्वांटिटी के साथ ट्रेड में कूदना।

Stop-Loss Order लगाने के फायदे

ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स को स्टॉप-लॉस के निम्नलिखित महत्वपूर्ण फायदे होते हैं- 
  • इसे लगाने में कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आता है। आपसे ब्रोकरेज तभी लिया जायेगा, जब स्टॉप-लॉस हिट हो जायेगा। यानि आपकी पोजीशन काटने पर ही ब्रोकरेज लगेगा। 
  • स्टॉप-लॉस ऑर्डर लगाने से आपको यह निगरानी करने की ज़रूरत नहीं है कि आपका स्टॉक प्रतिदिन कैसा प्रदर्शन कर रहा है। 
  • स्टॉप-लॉस ऑर्डर आपके निर्णय लेने को भावनात्मक प्रभावों से बचाने में भी मदद करते हैं। लोग स्टॉक के साथ "प्यार में पड़ जाते हैं"। 
  • इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस तरह के investor हैं। लेकिन आपको यह पता होना चाहिए कि आपने स्टॉक को क्यों खरीदा है। ग्रोथ इन्वेस्टर्स से वैल्यू इन्वेस्टर्स का नजरिया स्टॉक्स को लेकर अलग-अलग होता है। एक्टिव इन्वेस्टर्स का नजरिया दोनों से अलग होता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की आपकी स्ट्रेटेजी स्ट्रेटेजी क्या है? स्ट्रेटेजी तभी काम करती है, जब आप उस पर सख्ती से कायम रहते हैं। 
  • स्टॉप-लॉस ऑर्डर का लाभ यह है कि वे आपको ट्रैक पर बने रहने में मदद कर सकते हैं और आपके निर्णय को भावनाओं से घिरने से रोक सकते हैं।
  • समझना जरूरी है कि stoploss ऑर्डर यह गारंटी नहीं देते कि आप शेयर बाजार में पैसा कमाएँगे ही। आपको स्टॉप लॉस लगाने के बाद भी share market trading के बुद्धिमानीपूर्ण निर्णय लेने होंगे। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आप उतना ही पैसा खो देंगे जितना आप स्टॉप-लॉस के बिना खो देंगे। 
  • स्टॉप-लॉस ऑर्डर को पारंपरिक रूप से नुकसान को रोकने का एक तरीका माना जाता है। हालाँकि, इसका एक अन्य उपयोग प्रॉफिट को लॉक करना भी है। इसके लिए आप "ट्रेलिंग स्टॉप" का उपयोग कर सकते हैं।

StopLossOrder के नुकसान 

Share market ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स को स्टॉप लॉस ऑर्डर के निम्नलिखित नुकसान भी हो सकते हैं-
  • स्टॉप लॉस ऑर्डर का मुख्य नुकसान नुकसान यह है कि स्टॉक के price में होने वाले शार्ट टर्म उतार-चढ़ाव स्टॉप प्राइस को सक्रिय कर सकता है। अगर आपने स्टॉप-लॉस प्रतिशत चुना है, जो स्टॉक को दिन-प्रतिदिन उतार-चढ़ाव करने की अनुमति देता है।
  • स्टॉप-लॉस ऑर्डर जितना संभव हो उतना नकारात्मक जोखिम को रोकता है। उस स्टॉक पर 5% स्टॉप-लॉस ऑर्डर सेट करना, जिसमें एक सप्ताह में 10% या अधिक उतार-चढ़ाव का इतिहास हो, अच्छी स्ट्रेटेजी नहीं रहती क्योंकि ऐसा स्टॉप लॉस आसानी से हिट हो जाता है। 
  • एक बार जब आप अपने स्टॉप प्राइस पर पहुंच जाते हैं, तो आपका स्टॉप ऑर्डर मार्केट ऑर्डर बन जाता है। इसलिए, जिस कीमत पर आप बेचते हैं, वह स्टॉप प्राइस से काफी अलग हो सकती है। 
  • बहुत से stockbrokers पैनी स्टॉक्स और वोलेटाइल स्टॉक्स में स्टॉप -ऑर्डर की अनुमति नहीं देते हैं।

स्टॉप-लॉस हंटिंग क्या है? 

ऑपरेटर्स का मायाजाल, ट्रेडिंग की दुनिया का सबसे कड़वा सच है Stop-Loss Hunting। कई बार रिटेल ट्रेडर्स को लगता है कि मार्केट का ऑपरेटर सिर्फ उन्हीं का स्टॉप-लॉस खाने के लिए बैठा है। तकनीकी रूप से यह पूरी तरह गलत भी नहीं है। ऑपरेटर्स निम्नलिखित प्रकार से रिटेल ट्रेडर्स के साथ गेम खेलते हैं?

बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs और DIIs) को बड़ी मात्रा में शेयर्स खरीदने होते हैं। उन्हें बड़ी क्वांटिटी (Liquidity) कहाँ मिलती है? ठीक उसी जगह, जहाँ सबसे ज्यादा रिटेल ट्रेडर्स के स्टॉप-लॉस ऑर्डर लगे होते हैं।

वे जानबूझकर कीमत को किसी सपोर्ट लेवल के थोड़ा नीचे धकेलते हैं, जिससे हज़ारों ट्रेडर्स के स्टॉप-लॉस ट्रिगर हो जाते हैं। जैसे ही वे ऑर्डर्स ट्रिगर होते हैं, ऑपरेटर्स को सस्ती कीमत पर भारी लिक्विडिटी मिल जाती है और वे मार्केट को ऊपर खींच ले जाते हैं। इसी को "Liquidity Sweep" या स्टॉप-लॉस हंटिंग कहते हैं। इस जाल से बचने के लिए ही हमें स्टॉप-लॉस लगाने की 'कला' सीखनी होगी।

निष्कर्ष: अनुशासन ही सफलता की चाबी है, मशहूर इन्वेस्टर वॉरेन बफेट ने स्टॉक मार्केट के दो सबसे बड़े नियम बताए हैं-
  • नियम नंबर 1: कभी अपना पैसा मत गंवाओ।
  • नियम नंबर 2: कभी नियम नंबर 1 को मत भूलो।
स्टॉप-लॉस ऑर्डर लगाने की कला (Art of Placing a Stop-Loss Order) कोई ऐसी विद्या नहीं है जो रातों-रात आ जाए। यह एक सतत अभ्यास, कड़े अनुशासन और अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने का खेल है। एक बार जब आप सही जगह पर स्टॉप-लॉस लगाना और अपनी पोजीशन को साइज करना सीख जाते हैं, तो शेयर बाजार आपके लिए एक सट्टेबाज़ी का अड्डा न रहकर दुनिया का सबसे बेहतरीन और मुनाफेदार बिजनेस बन जाता है।

याद रखें, एक सफल ट्रेडर वह नहीं है जो कभी नुकसान नहीं उठाता, बल्कि वह है जो जब नुकसान उठाता है तो बहुत छोटा सा नुकसान देता है, और जब प्रॉफिट कमाता है तो पूरा ट्रेंड राइड करता है। आज ही से अपने मानसिक स्टॉप-लॉस को अलविदा कहें और सिस्टमैटिक, अनुशासित ट्रेडिंग की शुरुआत करें।

Frequently Asked Questions (FAQs) - 

प्रश्न 1: स्टॉप-लॉस मार्केट (SL-M) और स्टॉप-लॉस लिमिट (SL) ऑर्डर में क्या अंतर है?

उत्तर: SL-M ऑर्डर में जैसे ही आपका ट्रिगर प्राइस हिट होता है, आपका शेयर मार्केट में उपलब्ध सर्वोत्तम भाव पर तुरंत बिक जाता है। जबकि SL (Limit) ऑर्डर में आप एक रेंज (Trigger Price और Price) तय करते हैं, आपका ऑर्डर उसी तय की गई कीमत के अंदर ही एग्जिट होता है। अत्यंत उतार-चढ़ाव वाले मार्केट में SL-M का उपयोग करने से बचना चाहिए क्योंकि इसमें कभी-कभी भारी स्लिपेज (Slippage) हो जाता है।

प्रश्न 2: क्या स्टॉप-लॉस लगाने के बाद भी कभी बड़ा नुकसान हो सकता है?

उत्तर: हाँ, बहुत ही रेयर केस में ऐसा हो सकता है जिसे हम 'लोअर सर्किट' (Lower Circuit) या 'गैप डाउन ओपनिंग' (Gap Down Opening) कहते हैं। अगर कोई शेयर सीधे आपके स्टॉप-लॉस प्राइस के बहुत नीचे ही ओपन होता है, तो आपका ऑर्डर अगले उपलब्ध प्राइस पर एक्जीक्यूट होगा। इससे बचने के लिए ओवरनाइट पोजीशन में हेजिंग (Hedging) का इस्तेमाल करना चाहिए।

प्रश्न 3: इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए सबसे बेस्ट स्टॉप-लॉस इंडिकेटर कौन सा है?

उत्तर: इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए ATR (Average True Range) और 20 EMA (Exponential Moving Average) का कॉम्बिनेशन सबसे बेस्ट माना जाता है। यह आपको मार्केट की मौजूदा चाल के अनुसार एक सटीक और सुरक्षित स्टॉप-लॉस लेवल प्रदान करता है।

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