SLB: डीमैट में पड़े शेयरों से बिना बेचे हर महीने कमाएं

Stock Lending and Borrowing (SLB) एक आधिकारिक SEBI-स्वीकृत सिस्टम है, जिसके जरिए निवेशक अपने Demat Account में पड़े निष्क्रिय (idle) शेयर्स को अन्य ट्रेडर्स को उधार देकर अतिरिक्त ब्याज आय कमा सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसे आप अपना खाली मकान किराए पर देकर किराया पाते हैं। ठीक वैसे ही Reliance या Tata Motors जैसे शेयर्स को डिमैट से बिना बेचे उधार देकर कमाई की जा सकती है। इस प्रक्रिया में शेयर का मालिकाना हक, डिविडेंड और बोनस इश्यू का लाभ आपके पास ही रहता है।

Stock Lending and Borrowing (SLB)

SLB: Demat Account में पड़े खाली शेयर्स से 'किराया' कैसे कमाएं?

क्या आपके डिमैट अकाउंट में Reliance, TATA Motors या Infosys जैसे मजबूत शेयर्स सालों से यूं ही निष्क्रिय (idle) पड़े हुए हैं? आप सोच रहे होंगे कि जब तक इन शेयर्स को बेचा न जाए या कंपनी डिविडेंड न दे, तब तक इनसे कोई अतिरिक्त कमाई नहीं हो सकती। 

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जैसे आप अपने खाली पड़े मकान को किराए पर देकर हर महीने रेंट कमाते हैं, ठीक वैसे ही आप अपने डिमैट खाते में पड़े शेयर्स को किराए पर देकर नियमित ब्याज आय (Rental Yield) अर्जित कर सकते हैं? 

भारतीय शेयर बाजार में SEBI द्वारा स्वीकृत Stock Lending and Borrowing (SLB) एक ऐसा ही सुरक्षित और कानूनी जरिया है, जो आपके खाली शेयर्स को एक कमाई करने वाली परिसंपत्ति (earning asset) में बदल देता है। इस गाइड में आप बिना शेयर्स बेचे और बिना किसी कॉरपोरेट लाभ जैसे डिविडेंड या बोनस को खोए, SLB के माध्यम से अतिरिक्त इनकम बनाने का पूरा गणित सरल भाषा में समझेंगे।

Stock Lending and Borrowing (SLB) क्या है?

Stock Lending and Borrowing (SLB) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा संचालित एक आधिकारिक प्रणाली है। यह प्रक्रिया आपको अपने डिमैट अकाउंट में रखे लंबी अवधि के शेयर्स को उन ट्रेडर्स को उधार (lend) देने की अनुमति देती है जिन्हें बाजार में शॉर्ट-सेलिंग या आर्बिट्राज (arbitrage) के लिए शेयर्स की आवश्यकता होती है। इसे सरल शब्दों में समझते हैं-
  1. आप (Lender): SLB में अपने खाली शेयर्स एक्सचेंज के माध्यम से उधार देते हैं।
  2. उधारकर्ता (Borrower): शेयर्स का उपयोग करने के बदले में आपको एक तय 'लेंडिंग फीस' (Lending Fee) देता है।
  3. एक्सचेंज (NSE/NSCCL): मध्यस्थ के रूप में कार्य करता है और यह सुनिश्चित करता है कि आपके शेयर्स सुरक्षित रहें और समय पर वापस मिल जाएं।

यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है और इसमें काउंटरपार्टी रिस्क (डिफ़ॉल्ट का खतरा) शून्य होता है क्योंकि NSE का क्लियरिंग कॉरपोरेशन (NSCCL) इसकी शत-प्रतिशत सेटलमेंट गारंटी देता है।

SLB काम कैसे करता है?

SLB मार्केट ठीक उसी तरह काम करता है जैसे कोई मनी-लेंडिंग या रेंटल प्लेटफॉर्म काम करता है, लेकिन यहाँ लेनदेन सीधे व्यक्तियों के बीच न होकर मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से होता है। SLB की चरणबद्ध प्रक्रिया निम्नलिखित प्रकार है-
  1. ऑर्डर प्लेस करना: आप अपने स्टॉक ब्रोकर (जैसे Zerodha, ICICI Direct, HDFC Securities आदि) के SLB डेस्क के माध्यम से अपने शेयर्स उधार देने का ऑर्डर डालते हैं। इसमें आप अपनी अपेक्षित फीस (Lending Fee) तय करते हैं।
  2. मैचिंग (Matching): एक्सचेंज के SLB प्लेटफॉर्म पर जब आपके दिए गए रेट पर कोई उधारकर्ता (Borrower) सहमत होता है, तो ट्रेड एग्जीक्यूट हो जाता है।
  3. शेयर ट्रांसफर: आपके Demat account से शेयर्स अस्थायी रूप से क्लियरिंग कॉरपोरेशन को ट्रांसफर कर 
  4. दिए जाते हैं।
  5. मार्केट मार्जिन: उधारकर्ता को शेयर्स लेने के लिए 100% से अधिक का कैश या कोलैटरल मार्जिन एक्सचेंज के पास जमा कराना होता है, जिससे लेनदेन पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है।
  6. मैच्योरिटी और रिटर्न: अनुबंध की अवधि (1 महीने से लेकर 12 महीने तक) पूरी होने पर, आपके शेयर्स आपके डिमैट खाते में वापस आ जाते हैं और आपकी लेंडिंग फीस आपके बैंक खाते में जमा कर दी जाती है।
SLB को भारतीय शेयर मार्केट के प्रसिद्ध शेयर—Reliance Industries (RIL) के उदाहरण से समझते हैं।

उदाहरण 1: Reliance Industries (RIL): मान लीजिए आपके पास लंबी अवधि के निवेश के रूप में Reliance Industries के 500 शेयर्स हैं। शेयर का मौजूदा भाव 3,000 रूपये प्रति शेयर चल रहा है। और आपके कुल पोर्टफोलियो वैल्यू 15,00000 रूपये (15 लाख रुपये) है। 

अगर आप अपने शेयरों को SLB की अवधि 1 महीना (30 दिन) के लिए किराये पर देते हैं। SLB की वार्षिक लेंडिंग यील्ड (Annual Lending Yield): 8% प्रति वर्ष है इसलिए मासिक फीस दर ~0.66% प्रति माह होती है। 

कमाई का हिसाब: मंथली इनकम = 1500000 × 066 ÷ 100 = ₹9, 900 

परिणामस्वरूप आपको 1 महीने के लिए अपने 500 Reliance शेयर्स उधार देने पर ₹9,900 की अतिरिक्त शुद्ध आय प्राप्त हुई। 1 महीने बाद आपके पूरे 500 शेयर्स आपके डिमैट खाते में सुरक्षित लौट आए।

SLB में कॉरपोरेट एक्शन का क्या होता है? (Dividend, Bonus, Split)

अक्सर निवेशकों के मन में यह सवाल उठता है कि यदि शेयर्स डिमैट खाते में नहीं हैं, तो कंपनी द्वारा घोषित डिविडेंड या बोनस का क्या होगा? SEBI के नियमों के अनुसार, लेंडर के सभी अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।

कॉरपोरेट एक्शनलेंडर को (आपको) क्या मिलता है?
डिविडेंड उधारकर्ता को मिलने वाला डिविडेंड एक्सचेंज द्वारा काटकर सीधे आपके बैंक खाते में जमा कर दिया जाता है (इसे 'Manufactured Dividend' कहा जाता है)।
बोनस शेयर बोनस में मिलने वाले अतिरिक्त शेयर्स अनुबंध समाप्त होने पर आपके खाते में जोड़ दिए जाते हैं।
स्टॉक स्प्लिट स्प्लिट के अनुपात के अनुसार समायोजित शेयर्स आपको वापस मिलते हैं।
राइट्स इश्यू SLB अनुबंध समय से पहले बंद (Recall) कर दिया जाता है ताकि आप राइट्स इश्यू में भाग ले सकें।

 SLB के लाभ (Benefits for Long-Term Investors)

  • इसमें डिफ़ॉल्ट का जोखिम (Zero Counterparty Risk) बिल्कुल भी नहीं होता है क्योंकि लेन-देन का निपटान NSCCL (National Securities Clearing Corporation Limited) द्वारा गारंटीकृत होता है। यदि उधारकर्ता शेयर वापस करने में विफल रहता है, तो एक्सचेंज उसके मार्जिन को जब्त करके उससे मार्केट से शेयर खरीदकर आपको वापस देता है।
  • पोर्टफोलियो पर एक्स्ट्रा रिटर्न मिलता है, यदि आपके शेयर्स सालाना 12% की दर से बढ़ रहे हैं और आपको SLB से 4% से 8% की अतिरिक्त फीस मिलती है, तो आपका कुल वार्षिक रिटर्न 16% से 20% तक हो सकता है।
  • Stocks पर मालिक का स्वामित्व बना रहता है, आप शेयर्स के वास्तविक मालिक बने रहते हैं और भविष्य में शेयर की कीमत में होने वाली वृद्धि (Capital Appreciation) का पूरा फायदा आपको मिलता है।
  • SLB की लचीली समयावधि होती है, आप 1 महीने से लेकर 12 महीने तक की अवधि के लिए शेयर्स उधार दे सकते हैं। 

SLB की अन्य इन्वेस्टमेंट ऑप्शंस से तुलना 

मापदंडStock Lending (SLB)एफडी (Fixed Deposit)शेयर बेचना (Selling Shares)
अंतर्निहित परिसंपत्तिइक्विटी शेयर्सनकद (Cash)कोई नहीं
अपेक्षित रिटर्न3% - 12% p.a. (अतिरिक्त)6% - 7.5% p.a.केवल बिक्री मूल्य
शेयरों का स्वामित्वबना रहता हैलागू नहींसमाप्त हो जाता है
पूंजीगत लाभ (Capital Gains)सुरक्षित (मूल्य वृद्धि जारी)नहींकेवल बिक्री तक सीमित
सुरक्षाSEBI / NSE गारंटीकृतDICGC (₹5 लाख तक)बाजार जोखिम

SLB में भाग कैसे लें? (How to Start Stock Lending)

यदि आप अपने खाली शेयर्स को उधार देकर कमाई शुरू करना चाहते हैं, तो आपको निम्नलिखित चरणों का पालन करना चाहिए-
  1. ब्रोकर से संपर्क करें: अपने मौजूदा स्टॉक ब्रोकर (जैसे Zerodha, ICICI Direct, Kotak Securities, HDFC Securities आदि) के पास जांचें कि क्या वे SLB सुविधा प्रदान करते हैं।
  2. SLB सेगमेंट एक्टिवेट करें: अपने ट्रेडिंग खाते में SLB सेगमेंट को एक्टिवेट करने के लिए फॉर्म भरें या डिजिटल रिक्वेस्ट सबमिट करें।
  3. उपयुक्त शेयर्स का चयन करें: केवल वही शेयर्स SLB में पात्र होते हैं जो F&O (Futures & Options) सेगमेंट में ट्रेड होते हैं और जिनमें पर्याप्त लिक्विडिटी होती है।
  4. लेंडिंग रिक्वेस्ट दर्ज करें: अपनी वांछित लेंडिंग फीस और अवधि (Tenure) चुनकर मार्केट टाइमिंग (सुबह 9:15 से शाम 3:30 बजे तक) के दौरान ऑर्डर प्लेस करें।
SLB शेयरों के लिए टैक्स और नियम: भारतीय आयकर अधिनियम (Income Tax Act) के अनुसार SLB से होने वाली कमाई पर निम्नलिखित कर नियम लागू होते हैं-
  • अन्य स्रोतों से आय (Income from Other Sources), SLB से अर्जित लेंडिंग फीस को 'Income from Other Sources' के तहत वर्गीकृत किया जाता है। यह आय आपकी कुल वार्षिक आय में जोड़ी जाती है और आपके टैक्स स्लैब (Tax Slab) के अनुसार इस पर कर लगता है।
  • कोई कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं लगता है, चूंकि शेयर्स का स्थानांतरण बिक्री नहीं माना जाता (धारा 47(viii) के तहत), इसलिए शेयर्स उधार देने पर कोई शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (STCG/LTCG) लागू नहीं होता।
  • STT (Securities Transaction Tax), SLB लेनदेन पर STT लागू नहीं होता है।
  • कन्फर्मेशन और क्रेडिट, ऑर्डर मैच होने पर शेयर्स लेंड हो जाएंगे और अनुबंध की समाप्ति पर फीस सीधे आपके पंजीकृत बैंक खाते में जमा कर दी जाएगी।

शेयरों को SLB पर के लिए ध्यान देने योग्य बातें

यद्यपि SLB जोखिम-मुक्त अतिरिक्त आय का अवसर देता है, फिर भी निवेशकों को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-
  1. जिस अवधि के लिए आपने शेयर्स उधार दिए हैं, उस दौरान आप उन्हें तुरंत बाजार में बेच नहीं सकते (जब तक कि आप अर्ली रिकॉल विकल्प का उपयोग न करें, जिसमें अतिरिक्त शुल्क लग सकता है)।
  2. सभी शेयर्स की SLB मार्केट में हमेशा मांग नहीं होती, केवल उन शेयर्स पर उच्च फीस मिलती है जिनकी F&O बाजार में शॉर्ट-सेलिंग या आर्बिट्राज की मांग अधिक होती है।
  3. ब्रोकरेज शुल्क: कुछ ब्रोकर SLB लेनदेन पर एक छोटा प्रतिशत ब्रोकरेज शुल्क लेते हैं, इसलिए ऑर्डर देने से पहले अपने ब्रोकर के शुल्क संरचना की जांच कर लें।
निष्कर्ष: Stock Lending and Borrowing (SLB) भारतीय शेयर बाजार के लंबे समय के निवेशकों के लिए एक अत्यंत उपयोगी लेकिन कम इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण है। यदि आपका इरादा Reliance, TATA, Infosys या HDFC Bank जैसे मजबूत शेयर्स को 3 से 5 साल या उससे अधिक समय के लिए होल्ड करने का है, तो इन्हें अपने Demat account में निष्क्रिय रखने के बजाय SLB में उधार देकर हर महीने अतिरिक्त कैश-फ्लो बनाया जा सकता है। यह न केवल आपके कुल पोर्टफोलियो रिटर्न को बढ़ाता है, बल्कि आपको बाजार की उतार-चढ़ाव वाली स्थितियों में भी एक स्थिर आय का जरिया प्रदान करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या SLB में शेयर्स डूबने का खतरा होता है?
जी नहीं, SLB का संचालन NSE/BSE के क्लियरिंग कॉरपोरेशन द्वारा किया जाता है। उधारकर्ता से 100% से अधिक का मार्जिन लिया जाता है, जिससे डिफ़ॉल्ट की स्थिति में भी एक्सचेंज बाजार से शेयर खरीदकर लेंडर को वापस देता है।

2. क्या छोटे निवेशक भी SLB का लाभ उठा सकते हैं?
हाँ, कोई भी खुदरा निवेशक (Retail Investor) जिसके डिमैट खाते में F&O सेगमेंट वाले पात्र शेयर्स उपलब्ध हैं, SLB प्लेटफॉर्म के माध्यम से न्यूनतम 1 शेयर भी उधार दे सकता है।

3. SLB फीस कौन तय करता है?
SLB फीस बाजार में मांग और आपूर्ति (Demand and Supply) के आधार पर तय होती है। लेंडर अपनी मनपसंद फीस का ऑर्डर डाल सकता है, और यदि कोई बॉरोअर उस रेट पर सहमत होता है, तो ट्रेड पूरा हो जाता है।

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