Auto Square-Off: शेयर मार्केट में ऑटो-स्क्वेयर-ऑफ ट्रेडिंग ब्रोकर द्वारा उपयोग की जाने वाली एक स्वचालित प्रक्रिया है। जिसके तहत किसी Intraday Trade के लिए खुली ओपन पोजीशन को बाजार बंद होने से पहले निर्धारित समय (जैसे दोपहर 3:15 PM से 3:20 PM) पर अपने आप बेच/खरीदकर बंद कर दिया जाता है। यदि निवेशक खुद उसे समय पर क्लोज नहीं करता है। जानते हैं- Auto Square-Off का सच, क्या आपका ब्रोकर भी आपके शेयर चुपचाप बेच देता है?
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| ट्राडे ट्रेडिंग में ब्रोकर कट-ऑफ टाइम (3:15 PM - 3:20 PM) पर पोजीशन अपने आप क्लोज कर देता है। |
क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप शेयर मार्केट में मुनाफा कमाने की उम्मीद में बैठे होते हैं। तभी अचानक आपका ब्रोकर बिना पूछे आपका ट्रेड क्लोज (बेच) कर देता है और ऊपर से आपकी जेब से पेनाल्टी का पैसा भी काट लेता है? जी हां, यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि शेयर मार्केट का 'Auto Square-Off' नियम है, जो हर दिन लाखों नए और अनुभवी इंट्राडे ट्रेडर्स की गाढ़ी कमाई पर पानी फेर देता है। अगर आप भी Zerodha, Groww या Angel One में इंट्राडे ट्रेडिंग करते हैं और 3:15 PM के इस खौफनाक जाल से बचकर अपना प्रॉफिट सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो यह विस्तृत गाइड आपके लिए ही है।
Auto Square-Off Meaning क्या है?
ऑटो-स्क्वेयर-ऑफ ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एक स्वचालित प्रक्रिया है। जब आप इंट्राडे ट्रेडिंग (MIS Order) करते हैं, तो आपका इरादा उसी दिन शेयर खरीदकर बेचने का होता है। भारतीय शेयर बाजार (NSE/BSE) सुबह 9:15 AM से दोपहर 3:30 PM तक खुलता है।
अगर आप खुद दोपहर 3:15 PM तक अपनी ओपन पोजीशन (Open Position) को बंद नहीं करते हैं, तो ब्रोकर का रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम (RMS) एक्टिव हो जाता है। वह बाजार बंद होने से पहले आपकी पोजीशन को मार्केट प्राइस (Current Market Price) पर अपने आप बेच देता है।
यह कैसे काम करता है? इसे एक उदाहरण से समझते हैं- मान लीजिये अपने Reliance Industries Ltd. (RIL) के 100 शेयर Intraday (MIS) के लिए 2,500 रूपये के प्राइस पर खरीदे। जिनकी कुल वैल्यू: ₹2,50,000 है (आपको 5x मार्जिन मिला, इसलिए आपने खुद का सिर्फ ₹50,000 लगाया)। अब इस पोजीशन में दो तरह के सिनेरियो हो सकते हैं।
सिनेरियो A (प्रॉफिट वाली स्थिति): दोपहर 3:00 बजे Reliance का शेयर ₹2,520 हो जाता है। आपको ₹2,000 का सीधा प्रॉफिट हो रहा है। आप सोचते हैं कि 3:29 PM तक यह ₹2,530 हो जाएगा और आप ट्रेड बंद करना भूल जाते हैं।
सिनेरियो B (ऑटो-स्क्वेयर-ऑफ का असर): दोपहर 3:15 PM बजते ही ब्रोकर का सिस्टम एक्टिव होता है। उस समय Reliance का भाव गिरकर ₹2,510 पर आ जाता है। सिस्टम बिना आपसे पूछे ₹2,510 के भाव पर आपके 100 शेयर बेच देता है। इसके परिणाम स्वरूप आपका प्रॉफिट ₹2,000 से घटकर ₹1,000 रह गया।
आपके Stockbroker ने ऑटो-स्क्वेयर-ऑफ पेनल्टी के रूप में ₹50 + 18% GST (कुल ₹59) काट लिया। इस तरह आपके हाथ में उम्मीद से काफी कम प्रॉफिट आता है।
Auto Square-Off टाइमिंग और चार्ज (भारतीय ब्रोकर)
| ब्रोकर नाम | ऑटो-स्क्वेयर-ऑफ समय | चार्जेस (प्रति निष्पादित ऑर्डर) |
| Zerodha | 3:15 PM - 3:20 PM | ₹50 + 18% GST |
| Groww | 3:15 PM - 3:20 PM | ₹50 + 18% GST |
| Angel One | 3:15 PM | ₹20 + 18% GST |
| Upstox | 3:15 PM - 3:25 PM | ₹50 + 18% GST |
स्टॉक ब्रोकर ऑटो-स्क्वेयर-ऑफ क्यों करते हैं?
- रिस्क मैनेजमेंट (RMS) के लिए इंट्राडे में ब्रोकर आपको मार्जिन (उधार पैसा) देते हैं। बाजार बंद होने के बाद वे कोई रिस्क नहीं लेना चाहते।
- एक्सचेंज के रूल्स की वजह से, SEBI के नियमानुसार इंट्राडे पोजीशन को उसी दिन क्लोज करना अनिवार्य है।
- मार्जिन कॉल से बचाव करने के लिए, यदि शेयर की कीमत अचानक बहुत ज्यादा गिर जाए, तो ब्रोकर को घाटा न हो, इसलिए वे पोजीशन काट देते हैं।
Auto Square-Off से होने वाले 3 बड़े नुकसान
- अतिरिक्त पेनाल्टी चार्ज लगता है, प्रत्येक ब्रोकर ऑटो-स्क्वेयर-ऑफ के प्रति ऑर्डर ₹20 से ₹50 (प्लस GST) वसूलता है, जिससे आपका ट्रेडिंग बजट बिगड़ जाता है।
- इसमें स्लिपेज रिस्क (Slippage Loss) बहुत रहता है क्योंकि यह एग्जीक्यूशन मार्केट ऑर्डर पर होता है। अगर 3:15 PM पर अचानक बिकवाली आती है, तो आपको बहुत खराब प्राइस पर एग्जिट मिलेगा।
- भावनाओं पर नियंत्रण न रहना, ज्यादातर स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म आपकी ट्रेडिंग पोजीशन को ऑटो-स्क्वेयर-ऑफ, बिना आपकी मर्जी के करते हैं।

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