क्या आप जानते हैं कि जब देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कोई हलचल होती है, तो आपके बैंक अकाउंट और निवेश पर उसका सीधा असर क्यों पड़ता है? हर दिन टीवी और मोबाइल पर गूंजने वाला यह नाम "सेंसेक्स" (SENSEX) आखिर है क्या बला, जो मिनट-दर-मिनट ऊपर-नीचे होकर करोड़ों निवेशकों की धड़कनें बढ़ा देता है?
यदि आप शेयर बाजार में नए हैं और बिना किसी रिस्क के इसकी तह तक जाना चाहते हैं, तो यह विस्तृत गाइड आपके लिए ही है। आइए, बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि सेंसेक्स कैसे काम करता है और यह आपकी जेब को कैसे प्रभावित करता है।
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इंडेक्सबॉम सेंसेक्स क्या है और यह कैसे काम करता है?
सेंसेक्स (SENSEX), जिसका पूरा नाम "सेंसिटिव इंडेक्स" (Sensitive Index) है, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख बेंचमार्क स्टॉक मार्केट इंडेक्स है। सरल शब्दों में कहें तो यह भारत की अर्थव्यवस्था का थर्मामीटर है। जिस प्रकार थर्मामीटर शरीर का तापमान बताता है, ठीक उसी तरह सेंसेक्स देश की टॉप 30 वित्तीय रूप से मजबूत कंपनियों के प्रदर्शन के आधार पर यह बताता है कि शेयर बाजार तेजी है या गिरावट चल।
इस 30-कंपनियों के बास्केट में रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस और आईसीआईसीआई बैंक जैसी दिग्गज भारतीय कंपनियां शामिल हैं। जब इन चुनिंदा कंपनियों के शेयरों के भाव बढ़ते हैं, तो सेंसेक्स ऊपर जाता है (जिसे बुल रन या तेजी कहते हैं); और जब इनके शेयर गिरते हैं, तो सेंसेक्स नीचे आ जाता है (जिसे बेयर मार्केट या मंदी कहते हैं)।
उदाहरणस्वरूप मान लेते हैं, आज सेंसेक्स लगभग 76,900 के स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा है, तो इसका मतलब यह है कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड इन 30 प्रमुख कंपनियों का सामूहिक मार्केट वैल्यूएशन एक तय आधार वर्ष की तुलना में इस जादुई आंकड़े तक पहुंच चुका है।
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ये तो सभी को पता है कि सेंसेक्स शब्द भारत में बीएसई के बेंचमार्क इंडेक्स को संदर्भित करता है। सेंसेक्स में बीएसई पर 30 सबसे बड़े और सबसे सक्रिय रूप से कारोबार किए जाने वाले स्टॉक शामिल हैं। यह भारत की अर्थव्यवस्था का आंकलन प्रदान करता है। यानि इसके प्रदर्शन से भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का अनुमान लगाया जा सकता है।
- जैसे NSE के लिए “IndexNSE: NIFTY 50” होता है
- वैसे ही BSE के लिए “IndexBOM: SENSEX” होता है
बीएसई सेंसेक्स का इतिहास और इसकी शुरुआत कब हुई थी?
क्या आप जानते हैं कि जिस सेंसेक्स को आज पूरी दुनिया भारत की आर्थिक सेहत मापने के लिए देखती है। उसकी शुरुआत कब हुई थी? बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE), जो एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है (स्थापना 1875), ने 1 जनवरी 1986 को आधिकारिक तौर पर 'सेंसेक्स' की शुरुआत की थी।
इसकी गणना के लिए 1978-79 को आधार वर्ष (Base Year) माना गया था और इसका शुरुआती बेस इंडेक्स वैल्यू 100 अंक तय किया गया था। शुरुआत में यह बाजार के साधारण भार पर आधारित था, लेकिन सितंबर 2003 से बीएसई ने इसे फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन मेथड (Free-Float Market Capitalization Methodology) पर शिफ्ट कर दिया। इसका मतलब यह है कि इसमें केवल उन्हीं शेयरों को गिना जाता है जो आम जनता और निवेशकों के खरीदने-बेचने के लिए खुले बाजार में उपलब्ध होते हैं, न कि प्रमोटर्स या सरकार के पास लॉक्ड शेयर।
INDEXBOM SENSEX नाम डेटा प्रोवाइडर्स, API सिस्टम, और फाइनेंशियल सॉफ्टवेयर में इंडेक्स को पहचानने के लिए इस्तेमाल होता है। यह फ़्लोट-समायोजित और बाज़ार पूंजीकरण-भारित इंडेक्स है। जैसा कि ऊपर ऊपर बताया जा चुका इंडेक्सबोम सेंसेक्स और बीएसई सेंसेक्स दोनों सेंसेक्स के ही नाम है, यानि दोनों एक ही हैं।
हालांकि शहर का नाम अब मुंबई है, लेकिन BSE का इंटरनेशनल कोड अब भी “BOM” ही है। यह नाम इतिहास और तकनीकी पहचान के कारण बना हुआ है। जैसे “BOM” नाम पुर्तगाली शब्द “Bom Bahia” से आया है, जिसका मतलब है “अच्छी खाड़ी”।
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ब्रिटिश शासन में इसे “Bombay” कहा गया। 1995 में इसका नाम बदलकर “Mumbai” कर दिया गया लेकिन BSE का कोड अब भी BOM ही है। मैं इस आर्टिकल में सेंसेक्स शब्द का ही ज्यादा उपयोग करूंगी। सेंसेक्स शब्द भारत में बीएसई के बेंचमार्क इंडेक्स को संदर्भित करता है। सेंसेक्स में बीएसई के 30 सबसे बड़े और सबसे सक्रिय रूप से कारोबार किए जाने वाले स्टॉक शामिल हैं।
यह भारत की अर्थव्यवस्था का एक गेज प्रदान करता है। यह फ़्लोट-अडजस्टेड और मार्केट कैपिटलाइजेशन-वेटेड इंडेक्स है। सेंसेक्स की प्रत्येक छमाही (जून और दिसंबर) में समीक्षा की जाती है। INDEXBOM SENSEX को 1986 में बनाया गया था।
सेंसेक्स भारत के बाजारों को प्रतिबिंबित करने वाला सबसे पुराना स्टॉक इंडेक्स है। इसे स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) द्वारा संचालित किया जाता है। Stock market एक्सपर्ट और इन्वेस्टर्स इसका उपयोग भारत की अर्थव्यवस्था के चक्रों और विशेष उद्योगों के विकास और गिरावट का निरीक्षण करने के लिए करते हैं।
सेंसेक्स भारत की अर्थव्यवस्था का बेंचमार्क स्टॉक इंडेक्स है और बीएसई पर सूचीबद्ध देश के 30 सबसे बड़े और सबसे अच्छी पूंजी वाले शेयरों का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी गणना भारतीय रुपये और अमेरिकी डॉलर दोनों में की जाती है। 1991 में भारत द्वारा अपनी अर्थव्यवस्था खोलने के बाद से सेंसेक्स के प्राइस में बहुत अधिक वृद्धि हुई है।
जुलाई 2001 में BSE ने सेंसेक्स का डॉलर-लिंक्ड संस्करण DOLLEX-30 लॉन्च किया था। यह भारत की सबसे बड़ी और वित्तीय रूप से मजबूत तीस कंपनियों के प्रदर्शन को संयुक्त रूप से दर्शाता है। ये सभी कंपनियां बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं। INDEXBOM SENSEX का उपयोग स्टॉक मार्केट की तीस सबसे बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन को संयुक्त रूप से ट्रेक करने के लिए किया जाता है। यह भारत की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को को भी रीप्रजेन्ट करता है।
यह भारत का सबसे अधिक ट्रैक किया जाने वाला इंडेक्स है। 04 नवम्बर, 2026 तक, सूचकांक का औसत कुल बाजार पूंजीकरण करीब ₹1,54,17,101 करोड़ रूपये के करीब था। भारतीय आर्थव्यवस्था के विकास ने सेंसेक्स को वर्तमान आकर दिया है। पहले इसकी गणना मार्केट कैप के आधार पर की गई जाती थी। जब इसे पहली बार लॉन्च किया गया था, लेकिन सितंबर 2003 में इसे फ्री-फ्लोट कैपिटलाइज़ेशन पद्धति में स्थानांतरित कर दिया गया है।
INDEXBOM SENSEX इंडेक्स पर किसी कंपनी के प्रभाव के लिए एक भार प्रदान किया जाता है। इस इंडेक्स के प्राइस को तय करने में इसमें शामिल कंपनियों के फ्री फ्लोट शेयरों का इस्तेमाल किया जाता है। जो शेयर मार्केट में ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग के लिए उपलब्ध होते हैं।
जो शेयर कंपनी के प्रमोटर के पास होते हैं, उन शेयरों के वेटेज को सेंसेक्स के प्राइस कल्कुलेशन में शामिल नहीं किया जाता है। इसकी कार्यप्रणाली में तमाम बदलावों के बावजूद सेंसेक्स के उद्देश्यों में बिल्कुल भी बदलाव नहीं आया है। सेंसेक्स शब्द sensitive and index शब्दों का मिश्रण है।
- कारपोरेट इनकम: जब कंपनियां तिमाही नतीजे (Quarterly Results) में शानदार मुनाफा दिखाती हैं, तो निवेशकों का उत्साह बढ़ता है और सेंसेक्स ऊपर भागता है।
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नीतियां: यदि आरबीआई रेपो रेट (Repo Rate) घटाता है, तो बाजार में सस्ता लोन मिलता है, जिससे कंपनियों और आम आदमी की खर्च करने की क्षमता बढ़ती है। यह शेयर बाजार के लिए टॉनिक का काम करता है।
- विदेशी संस्थागत निवेशक: जब विदेशी निवेशक भारत के शेयर बाजार में ताबड़तोड़ पैसा लगाते हैं, तो सेंसेक्स में जबरदस्त तेजी आती है। इसके उलट, उनके पैसे निकालने पर बाजार गिर जाता है।
- वैश्विक बाजार और भू-राजनीति: अमेरिका के फेडरल रिजर्व के ब्याज दर के फैसले, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें और युद्ध जैसी स्थितियां सीधे तौर पर सेंसेक्स की चाल को प्रभावित करती हैं।
इंडेक्सबोम सेंसेक्स में शामिल कंपनियों का चयन कैसे होता है?
- कंपनी बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) पर सूचिबद्ध होनी चाहिए।
- उन्हें लार्ज-टू-मेगा-कैप कंपनी होनी चाहिए।
- कंपनी का स्टॉक लिक्विड होना चाहिए, यानि ट्रेडिंग वॉल्यूम सामान्य से अधिक होना चाहिए। जिससे उसमें आसानी से ट्रेडिंग की जा सके।
- कंपनियों को मुख्य गतिविधियों से राजस्व उत्पन्न करना चाहिए।
- भारतीय शेयर मार्केट के अनुरूप Sensex Index में विभिन्न सेक्टर्स से कंपनियों का चयन किया जाता है। जिससे इसमें सभी सेक्टर्स का प्रतिनिधित्व रहे।
सेंसेक्स और निफ्टी 50 में क्या मुख्य अंतर है?
| विशेषता | BSE सेंसेक्स (SENSEX) | NSE निफ्टी 50 (NIFTY 50) |
| संचालक एक्सचेंज | बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) | नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) |
| कंपनियों की संख्या | इसमें कुल 30 दिग्गज कंपनियां होती हैं | इसमें कुल 50 प्रमुख कंपनियां होती हैं |
| आधार वर्ष | 1978-79 (बेस वैल्यू 100) | 1995 (बेस वैल्यू 1000) |
| लोकप्रियता | यह भारत का सबसे पुराना और पारंपरिक सूचकांक है | आधुनिक ट्रेडर्स के बीच इसका डेरिवेटिव्स वॉल्यूम बहुत अधिक है |
इंडेक्सबॉम सेंसेक्स में शामिल कंपनियाँ
- अडानी पोर्ट्स
- एशियन पेंट्स
- एक्सिस बैंक
- बजाज फाइनेंस
- बजाज फिनसर्व
- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स
- भारती एयरटेल
- इटरनल (जोमैटो)
- एचसीएल टेक्नोलॉजीज
- एचडीएफसी बैंक
- हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड
- आईसीआईसीआई बैंक
- इंफोसिस
- आईटीसी लिमिटेड
- कोटक महिंद्रा बैंक
- लार्सन एंड टुब्रो
- महिंद्रा एंड महिंद्रा
- मारुति सुजूकी
- एनटीपीसी
- पावर ग्रिड
- रिलायंस इंडस्ट्री
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
- सन फार्मा
- टीसीएस
- टाटा मोटर्स
- टाटा स्टील
- टेक महिंद्रा
- टाइटन कंपनी
- ट्रेंट
- अल्ट्राटेक सीमेंट

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