Morning Star Candlestick Pattern क्या है?
मॉर्निंग स्टार एक तीन कैंडल्स से बनने वाला बुलिश कैंडलस्टिक चार्ट है। मॉर्निंग स्टार डाउनट्रेंड के दौरान बनने वाला कैंडलस्टिक चार्ट पैटर्न है। यह अपट्रेंड की शुरुआत होने का संकेत देता है। यानि पिछले प्राइस ट्रेंड के रिवर्सल का संकेत देता है। ट्रेडर्स मॉर्निंग स्टार पैटर्न की फॉर्मेशन पर नजर बनाये रखते हैं और फिर ट्रेंड रिवर्सल के कन्फर्मेशन के लिए अतिरिक्त इंडिकेटर का यूज करके स्टॉक्स में लॉन्ग पोजीशन बनाते हैं।
मॉर्निंग स्टार एक कैंडलस्टिक चार्ट पर देखा जाने वाला पैटर्न है। यह एक बहुत ही लोकप्रिय चार्ट पैटर्न है। इसका उपयोग टेक्निकल एनालिस्टों द्वारा शार्ट-टर्म में स्टॉक्स, डेरिवेटिव्स, करेंसी और कमोडिटीज के प्राइस एक्शन का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है। यह तीन कैंडलस्टिक से बनने वाला चार्ट पैटर्न है। जैसे सुबह का तारा रात के अंधेरे के बाद उजाले का संकेत देता है, वैसे ही यह पैटर्न चार्ट पर Bear Trend के खत्म होने और Bullish Trend के शुरू होने का ऐलान करता है।
आमतौर पर एक लॉन्ग बेयरिश कैंडल और उसके बाद एक बुलिश या बेयरिश डोजी कैंडल होती है। उसके बाद एक तीसरी लॉन्ग बुलिश कैंडल आती है। एक वैध Morning Star पैटर्न के गठन के लिए अधिकांश ट्रेडर्स तीसरी कैंडल को पहली बेयरिश कैंडल की रियल बॉडी के कम से कम 50% या इससे अधिक लंबी देखना चाहते हैं। लाल कैंडल गिरते प्राइस का संकेत देती हैं। जबकि हरी कैंडल शेयर के प्राइस के बढ़ने का संकेत देती हैं।
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मॉर्निंग स्टार पैटर्न कैसे बनता है? (Structure of Morning Star)
यह एक थ्री-कैंडल पैटर्न (3-Candle Pattern) है, यानी इसे पूरा होने में तीन कैंडल लगती हैं। इसके बनने की प्रक्रिया को समझना बेहद आसान है-| कैंडल का क्रम | कैंडल का प्रकार | इसका क्या मतलब है? |
| पहली कैंडल (Day 1) | बड़ी लाल (Bearish) कैंडल | यह दर्शाती है कि मार्केट में अभी भी विक्रेता (Sellers) हावी हैं और मंदी का दौर जारी है। |
| दूसरी कैंडल (Day 2) | छोटी बॉडी वाली कैंडल (Doji या Spinning Top) | यह कैंडल गैप-डाउन ओपन होती है। इसकी छोटी बॉडी बताती है कि अब खरीदार और विक्रेता के बीच मुकाबला बराबरी का हो गया है (Indecision)। |
| तीसरी कैंडल (Day 3) | बड़ी हरी (Bullish) कैंडल | यह पहली कैंडल के आधे से अधिक हिस्से को कवर करते हुए ऊपर बंद होती है। यह संकेत है कि खरीदार (Bulls) वापस आ चुके हैं। |
Morning Star Candlestick Pattern कैसे काम करता है?
मॉर्निंग स्टार कैंडलस्टिक पैटर्न तीन कैंडलस्टिक्स से मिलकर बनता है। जिसमें एक स्ट्रांग लाल रंग की बेयरिश कैंडल होती है। दूसरी कैंडल ट्रेडर्स की अनिर्णय की स्थिती को दर्शाने वाली स्मॉल डोजी कैंडल होती है। जबकि तीसरी कैंडल हरे रंग की बुलिश कैंडल होती है। इस पैटर्न के बनने के समय मार्केट शार्ट-टर्म downtrend में होता है।
शेयर के प्राइस सपोर्ट एरिया के पास पहुंचते समय सेलर्स प्राइस को इस सपोर्ट एरिया से नीचे ले जाने की कोशिश करते हैं। जिससे चार्ट पर एक स्ट्रांग बेयरिश कैंडल बनती है। अगली कैंडल की ओपनिंग पिछली बेयरिश कैंडल के नीचे होती है। सेलर्स प्राइस को एक बार फिर से नीचे की तरफ खींचते हैं। लेकिन कमजोर सेलिंग प्रेशर के कारण प्राइस ज्यादा नीचे नहीं जा पाता है।
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प्राइस सपोर्ट एरिया के पास होने के कारण उस पॉइंट पर बायर्स स्टॉक को खरीदना शुरू कर देते हैं। जिससे शेयर का प्राइस थोड़ा सा ऊपर जाकर क्लोज होता है और चार्ट पर एक स्मॉल डोजी कैंडल बनती है। जो ट्रेडर्स की असमंजस की मानसिक स्थिती को दर्शाती है। इस कैंडल का रंग लाल या हरा कोई भी हो सकता है। इस कैंडल को देखकर बायर्स फिर से शेयर में भारी मात्रा में खरीदारी करते हैं।
जिससे यह कैंडल पिछली लाल कैंडल के 50% के करीब क्लोज करते हैं। इसका मतलब अब सेलर्स शेयर के प्राइस पर अपना कंट्रोल खो रहे हैं। और बायर्स ने शेयर के प्राइस पर अपना कंट्रोल स्थापित कर लिया है। अगर इस bullish candle की क्लोजिंग पिछली लाल कैंडल के 50% के पास या थोड़ा ऊपर होती है। तो यह एक स्टेंडर्ड बुलिश सिग्नल होता है।
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लेकिन अगर तीसरी कैंडल की क्लोजिंग पिछली लाल कैंडल के ओपनिंग प्राइस से ऊपर होती है तो यह एक स्ट्रांग बुलिश सिग्नल माना जाता है। क्योंकि यहाँ बायर्स अपना सेलर्स के ऊपर पूरा कंट्रोल बनाने में सफल हुए हैं। जिससे प्राइस रिवर्सल की संभावना काफी बढ़ जाती है।
इस पैटर्न को देखकर trade में एंट्री करने से पहले आपको स्टॉक बायर्स और सेलर्स की साइकोलॉजी को समझना चाहिए। जब टॉप लेवल से सेलर्स स्टॉक्स को sell करते हैं। जिससे शेयर की प्राइस नीचे आते हुए सपोर्ट लेवल को टच करता है। इसका मतलब यहाँ ज्यादातर सेलर्स को अपनी पोजीशन में प्रॉफिट हो रहा है।
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लेकिन अभी भी कुछ सेलर्स ऐसे भी होते है, जिन्हें लगता है कि शेयर का प्राइस इस सपोर्ट एरिया को ब्रेक कर देगा। अतः जिन ट्रेडर्स को ऊपर की तरफ स्टॉक को बेचने का मौका नहीं मिलता है। ऐसे नए सेलर्स इस लेवल पर ट्रेड में एंटर करते हैं। मगर इस वक्त तक शेयर का प्राइस नीचे आ जाता है और ऊपर जो लोग स्टॉक को sell करके बैठे हैं।
उनके टार्गेट हिट होने के कारण वे शेयर को वापस खरीदकर प्रॉफिट बुकिंग करते हैं। जिससे शेयर का price और नीचे नहीं जा पाता है। सेलर्स को कमजोर होता देखकर ट्रेडर्स इसे ट्रेंड रिवर्सल का संकेत मानकर शेयर में खरीदारी की लॉन्ग पोजीशन बनाते हैं। जिससे तीसरी कैंडल पहली लाल कैंडल से ऊपर जाकर क्लोज होती है।
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जैसे ही तीसरी कैंडल पहली लाल candle से ऊपर निकलती है। वैसे ही सेलर अपना प्रॉफिट बचाने और नुकसान से बचने के लिए sellers अपनी पोजीशन बंद करने लगते हैं। इस bullish सिग्नल को देखकर इस शेयर में बाइंग करने लगते हैं। जिससे शेयर का प्राइस यहाँ से रिवर्स होकर ऊपर निकल जाता है। इस तरह morning star candlestick pattern बनता है।
मॉर्निंग स्टार पैटर्न Trading Strategy
- एंट्री (Entry): जब तीसरी हरी कैंडल सफलतापूर्वक बंद (Close) हो जाए, तो उसके बाद अगली कैंडल के ओपन होने पर एंट्री लें।
- स्टॉपलॉस (Stop Loss): इस पूरे पैटर्न में जो सबसे निचला बिंदु (यानी दूसरी कैंडल का लो - Low) होगा, उसके थोड़ा नीचे अपना स्टॉपलॉस रखें।
- टारगेट (Target): अगला मजबूत रेजिस्टेंस लेवल आपका पहला टारगेट होना चाहिए, या आप $1:2$ का रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो रख सकते हैं।
वॉल्यूम चेक करें, जब तीसरी कैंडल (हरी कैंडल) बन रही हो, तो नीचे वॉल्यूम (Volume) को जरूर देखें। अगर हरी कैंडल के साथ वॉल्यूम में बड़ा उछाल (Spike) दिखता है, तो इस पैटर्न के सफल होने की संभावना 90% तक बढ़ जाती है।
मॉर्निंग स्टार पैटर्न हमेशा एक मजबूत डाउनट्रेंड (Downtrend) के बाद चार्ट के नीचे (Bottom) बनना चाहिए। अगर यह अपट्रेंड के बीच में बनता है, तो इसका कोई महत्व नहीं है।मॉर्निंग स्टार पैटर्न का उपयोग Bearish trend से bullish ट्रेंड रिवर्सल के संकेत के रूप में किया जाता है। लेकिन यह तब और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। जब अन्य टेक्निकल इंडीकेटर्स भी इस पैटर्न की पुष्टि करते हैं। ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स इस पैटर्न के निर्माण के दौरान तीन सेशन में ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ते हुए क्रम में देखना चाहते हैं।
तीसरे दिन सबसे ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम होता है। तीसरे दिन के हाई वॉल्यूम को morning star pattern की पुष्टि के रूप में माना जाता है। इसके बाद शेयरों में तेजी की पोजीशन बनाई जानी चाहिए। ट्रेडर्स तीसरे सेशन में मॉर्निंग स्टार पैटर्न बनते ही स्टॉक्स में तेजी की पोजीशन लेते हैं। जब तक शेयर का प्राइस अपट्रेंड में रहता है। तब तक प्रॉफिट पर राइड करते हैं।
ट्रेंड रिवर्सल के संकेत मिलने पर ट्रेडर्स अपनी इस पोजीशन में प्रॉफिट बुक करते हैं। टेक्निकल एनालिसिस स्टॉक के प्राइस में होने वाले उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाने के लिए उसके ऐतिहासिक डेटा का अध्ययन करता है। Stocks का ऐतिहासिक डेटा उसके चार्ट पर प्रदर्शित होता है। जिसे ट्रेडर्स चार्ट पर देखकर ट्रेड में एंट्री और एग्जिट के पॉइंट्स की पहचान करते हैं। Morning Star स्टॉक बुलिश ट्रेडिंग चार्ट पैटर्न है। जो बुलिश मार्केट का सिग्नल देता है।
निष्कर्ष: संक्षेप में कहें तो, मॉर्निंग स्टार कैंडलस्टिक पैटर्न (Morning Star Candlestick Pattern) तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) की दुनिया का एक बेहद शक्तिशाली और भरोसेमंद टूल है। यह न सिर्फ आपको गिरते हुए मार्केट में एक सुरक्षित एंट्री पॉइंट देता है, बल्कि बियरिश ट्रेंड के कमजोर होने का समय पर अलर्ट भी जारी करता है।
हालाँकि, शेयर मार्केट में कोई भी पैटर्न 100% फुलप्रूफ नहीं होता। इसलिए, एक सफल ट्रेडर बनने के लिए हमेशा मॉर्निंग स्टार पैटर्न के साथ सपोर्ट लेवल्स, वॉल्यूम (Volume) और आरएसआई (RSI) जैसे अन्य इंडिकेटर्स का डबल कन्फर्मेशन जरूर लें। उचित रिस्क मैनेजमेंट और स्टॉपलॉस का पालन करके ही आप इस पैटर्न के जरिए मार्केट से बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं।

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