Free Float Market Capitalization: क्या आप भी सिर्फ कंपनी का नाम और शेयर प्राइस देखकर investment कर देते हैं? लेकिन क्या आपको पता है कि जिस कंपनी को आप बहुत 'बड़ी' समझ रहे हैं। असल में उसके बहुत कम शेयर ही आम जनता के लिए उपलब्ध हो सकते हैं? शेयर बाजार में असली खिलाड़ी 'मार्केट कैप' नहीं, बल्कि 'फ्री फ्लोट मार्केट कैप' को देखते हैं। अगर आप इस गणित को नहीं समझते, तो आप भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) में फंस सकते हैं। आइए जानते हैं- निवेश से पहले जान लें Free Float Market Cap क्या होता है, वरना नुकसान हो सकता है!
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| फ्री फ्लोट मार्केट कैप की गणना करने का आसान फॉर्मूला। |
Free Float Market Capitalization क्या है?
फ्री फ्लोट मार्केट कैपिटलाइज़ेशन का मतलब है कि किसी कंपनी का मूल्यांकन केवल सार्वजनिक रूप से स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग के लिए रखे गए शेयरों पर निर्भर करता है। अतः यह केवल उन शेयरों की गणना करता है, जिनको ट्रेड किया जा सकता है। इसमें कंपनी के सभी शेयर शामिल नहीं होते क्योंकि कुछ शेयरों को प्रतिबंधित या निकट धारित माना जाता है। विशेषकर कंपनी के प्रमोटर्स के स्वामित्व वाले शेयर।
मार्केट केपेटलाइजेशन या बाज़ार पूंजीकरण किसी कंपनी के बकाया शेयरों को प्रत्येक शेयर की कीमत से गुणा करने का माप है। उदाहरण के लिए, एक कंपनी जिसके पास 25000 बकाया शेयर हैं। उसके प्रत्येक शेयर का प्राइस 40 रुपये है तो उसका मार्केट केपेटलाइजेशन 10 लाख रूपये होगा।
किसी कंपनी के Market Capitalization का आकार उसे स्मॉल-कैप, मिड-कैप और लार्ज-कैप कंपनियों में वर्गीकृत करने में सक्षम बनाता है। हालाँकि, फ्री-फ्लोट बाज़ार पूंजीकरण एक अलग अवधारणा है। पूर्ण-बाज़ार पूंजीकरण में कंपनी द्वारा स्टॉक जारी करने की योजना (जैसे आईपीओ) के माध्यम से प्रदान किए गए सभी शेयर शामिल होते हैं।
कंपनियां अक्सर स्टॉक विकल्प क्षतिपूर्ति योजनाओं के माध्यम से अपने लोगों को अनएक्सरसाइज स्टॉक जारी करती हैं। एक इंडेक्स जो Free Float Market Capitalization पद्धति का उपयोग करता है। वह सटीक मार्केट ट्रेन्ड को दर्शाता करता है क्योंकि इसमें केवल वे शेयर होते हैं। जो शेयर मार्केट मे ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हैं। यह इंडेक्स को अधिक व्यापक भी बनाता है क्योंकि यह इंडेक्स पर कुछ टॉप कंपनियों के प्रभाव को कम करता है।
Free Float Market Capitalization की गणना
जब हम किसी कंपनी की कुल वैल्यू की बात करते हैं, तो उसे Market Capitalization कहा जाता है। लेकिन, कंपनी के सभी शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध नहीं होते। कुछ शेयर प्रमोटरों के पास होते हैं, कुछ सरकार के पास और कुछ रणनीतिक निवेशकों के पास।
फ्री फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन (Free Float Market Cap) कंपनी के उन शेयरों की कुल मार्केट वैल्यू होती है जो सार्वजनिक रूप से स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होते हैं। सरल शब्दों में, कंपनी के शेयरों का वह हिस्सा जिसे आप और मैं (आम निवेशक) आज ही buy & sell सकते हैं।
एक स्टेंडर्ड मार्केट केपेटलाइजेशन के केलकुलेशन में सभी शेयरों (सक्रिय और निष्क्रिय दोनों शेयरों) का उपयोग करने के बजाय, Share market में ट्रेड होने वाले शेयरों की गणना की जाती है। जैसा कि Free Float Market Capitalizatio पद्धति के मामले में होता है। फ्री-फ्लोट पद्धति में लॉक-इन शेयरों को शामिल नहीं किया जाता है, जैसे कि अंदरूनी सूत्रों, प्रमोटरों और सरकारों द्वारा रखे गए शेयर लॉक-इन शेयर होते हैं।
फिर इस शेयर संख्या को प्रत्येक शेयर की कीमत से गुणा किया जाता है। इस संपूर्ण गणना में, निजी स्वामित्व वाले शेयरों को बाहर रखा जाता है। इसलिए, ट्रस्टों, सरकारी निकायों और प्रमोटरों के स्वामित्व वाले शेयरों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि Free Float Market Capitalization का मूल्य हमेशा कंपनी के वास्तविक बाजार पूंजीकरण मूल्य से कम होता है।
उदाहरणस्वरूप अंकित टेक्सटाइल्स के पास 50000 बकाया शेयर हैं और प्रत्येक शेयर का मार्केट प्राइस 28 रूपये प्रति शेयर चल रहा है। इनमें से 27000 शेयर सार्वजनिक रूप से रखे गए हैं। जबकि शेष 23000 शेयर कंपनी के प्रमोटर के पास निजी तौर पर रखे हैं। इस डेटा से, मार्केट कैप और फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइज़ेशन दोनों का केलकुलेशन कर सकते हैं।
फ्री फ्लोट मार्केट कैप की गणना कैसे करें?
गणित से डरने की जरूरत नहीं है! यह बहुत सीधा है।
Free Float Market Cap = (Total Shares - Restricted Shares) × times Current Share
यहाँ Restricted Shares का मतलब है-
- प्रमोटरों की हिस्सेदारी।
- सरकार की होल्डिंग (PSUs में)।
- लॉक-इन पीरियड वाले शेयर।
- विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) का वह हिस्सा जो रणनीतिक है।
अंकित टेक्सटाइल का मार्केट केपेटलाइजेशन
कुल बकाया शेयर x प्रत्येक शेयर की कीमत
50000 x 28 = 14,00000 रूपये
अंकित टेक्सटाइल का फ्री-फ्लोट मार्केट केपेटलाइजेशन
सार्वजनिक स्वामित्व वाले बकाया शेयर x प्रत्येक शेयर की कीमत
27000 x 28 = 7,56,000 रूपये
उपर्युक्त यह अंतर उन कंपनियों के लिए अधिक स्पष्ट है। जिनके पास बड़ी सरकारी हिस्सेदारी है। उदाहरण के लिए, कोल इंडिया का फ्री-फ्लोट मार्केट कैप इसके नियमित मार्केट केपेटलाइजेशन से बहुत कम है। क्योंकि इसके अधिकांश शेयर भारत सरकार के पास निजी तौर पर रखे हैं।
यह 'Full Market Cap' से अलग कैसे है?
अक्सर नए निवेशक इन दोनों के बीच भ्रमित हो जाते हैं। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए एक कंपनी जैसे Wind Energy है जिसके कुल 1,000 शेयर हैं। 600 शेयर कंपनी के मालिक (Promoters) के पास हैं। 400 शेयर स्टॉक मार्केट में आम जनता के लिए उपलब्ध हैं। मान लेते हैं कि फिलहाल इसके शेयर की कीमत 100 रूपये है-
- Full Market Cap: 1,000 × 100 = ₹1,00,000
- Free Float Market Cap: 400 × 100 = ₹40,000
यही वह ₹40,000 है जो इंडेक्स (जैसे Nifty या Sensex) में कंपनी की ताकत तय करते हैं।
शेयर बाजार में इसका महत्व क्यों है?
अगर आप सोच रहे हैं कि एक आम निवेशक को इससे क्या फर्क पड़ता है, तो इसके निम्नलिखित 3 बड़े कारण हैं-
कम उतार-चढ़ाव (Stability): जिस कंपनी का फ्री फ्लोट मार्केट कैप ज्यादा होता है, उसके शेयर में अचानक बड़ी गिरावट या उछाल आने की संभावना कम होती है। क्योंकि बहुत सारे शेयर बाजार में सर्कुलेट हो रहे हैं, इसलिए कोई एक व्यक्ति बाजार को 'मैनिपुलेट' नहीं कर सकता।
इंडेक्स में जगह (Nifty/Sensex Weightage): आज के समय में NSE (Nifty) और BSE (Sensex) अपनी रैंकिंग के लिए इसी तरीके का इस्तेमाल करते हैं। जिस कंपनी का फ्री फ्लोट जितना अधिक होगा, इंडेक्स में उसकी अहमियत उतनी ही ज्यादा होगी।
लिक्विडिटी (Liquidity): ज्यादा फ्री फ्लोट का मतलब है कि आप जब चाहें शेयर बेचकर बाहर निकल सकते हैं। कम फ्री फ्लोट वाले शेयरों में अक्सर 'लोअर सर्किट' लगने का डर रहता है क्योंकि वहां खरीदार और विक्रेता कम होते हैं।
सेबी (SEBI) के नियमों के अनुसार, हर लिस्टेड कंपनी को कम से कम 25% फ्री फ्लोट (Public Shareholding) बनाए रखना अनिवार्य है। अगर प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी कम करते हैं, तो फ्री फ्लोट बढ़ता है, जो आमतौर पर संस्थागत निवेशकों (FIIs/DIIs) को आकर्षित करता है।
Free Float Market Cap का उपयोग कैसे करें?
एक स्मार्ट इन्वेस्टिंग स्ट्रॅटजी बनने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-
- Large Cap फोकस: अगर आप सुरक्षित निवेश चाहते हैं, तो उन कंपनियों को चुनें जिनका फ्री फ्लोट मार्केट कैप बहुत अधिक है (जैसे Reliance या HDFC Bank)।
- Penny Stocks से बचें: कई पेनी स्टॉक्स का फ्री फ्लोट बहुत कम होता है, जिससे ऑपरेटर्स के लिए उन्हें मैनिपुलेट करना आसान हो जाता है।
- इंडेक्स फंड्स: यदि आप इंडेक्स फंड में पैसा लगा रहे हैं, तो आप अनजाने में ही फ्री फ्लोट मेथड का लाभ उठा रहे हैं।
FAQs फ्री फ्लोट मार्केट केपेटलाइजेशन के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न1. क्या फ्री फ्लोट मार्केट कैप हर दिन बदलता है?
उत्तर: हाँ, क्योंकि यह शेयर की कीमत (Current Market Price) पर निर्भर करता है, इसलिए शेयर की कीमत बदलते ही यह भी बदल जाता है।
प्रश्न2. क्या कम फ्री फ्लोट वाली कंपनी खराब होती है?
उत्तर: जरूरी नहीं। लेकिन कम फ्री फ्लोट वाली कंपनी में 'लिक्विडिटी रिस्क' ज्यादा होता है। ऐसी कंपनियों में बड़े ऑर्डर्स एग्जीक्यूट करना मुश्किल हो सकता है।
प्रश्न3. भारत में फ्री फ्लोट की शुरुआत कब हुई?
उत्तर: BSE Sensex ने 1 सितंबर, 2003 को फ्री फ्लोट पद्धति को अपनाया था। उससे पहले 'फुल मार्केट कैप' का उपयोग होता था।
प्रश्न4: फ्री-फ्लोट पद्धति को उदाहरण सहित समझाइए
उत्तर: मान लीजिए कि स्टॉक एबीसी 100 रूपये पर ट्रेड कर रहा है और उसके पास कुल 125,000 शेयर हैं। इस राशि में से, 25,000 शेयर लॉक इन हैं (जिसका अर्थ है कि वे बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स और कंपनी प्रबंधन के पास हैं और मार्केट में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध नहीं हैं )। फ्री-फ्लोट पद्धति का उपयोग करते हुए, एबीसी का बाजार पूंजीकरण 100 x 100,000 (ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध शेयरों की कुल संख्या) = एक करोड़ रूपये है।
प्रश्न5: फ्री फ्लोट की गणना कैसे करते हैं?
उत्तर: Free Float Market Capitalization की गणना करने के लिए, आप किसी कंपनी के बकाया शेयर लेते हैं और उसके प्रतिबंधित शेयरों को घटाते हैं। कंपनी का फ्री-फ्लोट मार्केट केपेटलाइजेशन प्राप्त करने के लिए, फ्री-फ्लोट नंबर लें और इसे कंपनी के शेयर मूल्य से गुणा करें।
प्रश्न6: क्या S&P 500 इंडेक्स फ्री फ्लोट है?
उत्तर: हाँ, S&P 500 इंडेक्स फ्री-फ्लोट पद्धति का उपयोग करता है। इसका मतलब यह है कि एसएंडपी 500 में सभी कंपनियों के लिए, उनका मार्केट कैप फ्री फ्लोटिंग है। केवल पब्लिक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध शेयरों को गणना के लिए ध्यान में रखा जाता है; कोई प्रतिबंधित शेयर नहीं है।
मार्केट कैप (Market cap) की गणना कैसे करते हैं?
मार्केट कैप, या बाज़ार पूंजीकरण, की गणना किसी कंपनी के बकाया शेयरों को लेकर और उन्हें कंपनी के शेयर मूल्य से गुणा करके की जाती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी कंपनी के 50,000 शेयर बकाया हैं। और शेयर की कीमत 10 रूपये है, तो उसकी मार्केट कैप 500,000 रूपये होगी
Free Float Market Capitalization पद्धति किसी कंपनी के लॉक-इन शेयरों को हटाकर उसकी मार्केट कैप की गणना करने की एक विधि है। ट्रेडिंग के लिए किसी कंपनी के उपलब्ध शेयरों की अधिक सटीक तस्वीर पेश करने के लिए इंडेक्स प्रदाताओं द्वारा इसका उपयोग किया जाता है।
निष्कर्ष: कमाई का एंगल, शेयर बाजार में जानकारी ही पैसा है। जब आप Free Float Market Capitalization को समझकर निवेश करते हैं, तो आप उन कंपनियों को फिल्टर कर पाते हैं जो सुरक्षित और भरोसेमंद हैं। उच्च फ्री फ्लोट वाली कंपनियां न केवल आपको स्थिरता देती हैं, बल्कि बड़े फंड मैनेजरों का भरोसा भी जीतती हैं।
Pro-Tip: अगली बार जब आप किसी शेयर का विश्लेषण करें, तो NSE की वेबसाइट पर जाकर उसकी 'Free Float' वैल्यू जरूर चेक करें। यह छोटी सी आदत आपaको बड़े नुकसान से बचा सकती है और लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएट करने में मदद करेगी।
उम्मीद है, आपको यह निवेश से पहले जान लें Free Float Market Cap क्या होता है, वरना नुकसान हो सकता है! आर्टिकल पसंद आया होगा। अगर आपको यह Free Float Market Capitalization in Hindi. आर्टिकल पसंद आये तो इसे अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें। ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप इस साइट को जरूर सब्स्क्राइब करें। यह आर्टिकल आपको कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताएं।
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