ETF और Mutual Fund दोनों ही अच्छे निवेश विकल्प हैं। ETF कम खर्चीला और पारदर्शी होता है, जबकि म्यूच्यूअल फंड् सक्रिय प्रबंधन और SIP जैसी सुविधा देता है। रिटर्न किसमें अधिक मिलेगा यह आपके निवेश के प्रकार (Active vs Passive) और समयावधि पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं- ETF और Mutual Fund में से कौन सा बेहतर है? दोनों में किसका रिटर्न अधिक मिलता है?
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| "ETF और Mutual Fund के बीच मुख्य अंतर: एक नज़र में।" |
अगर आज के दौर में हर कोई अपने पैसे को बढ़ाना चाहता है। लेकिन जब बात शेयर बाजार में निवेश की आती है। तब सबसे बड़ा कन्फ्यूजन दो ही चीजों के बीच होता है। वह हैं, ETF (Exchange Traded Fund) और Mutual Fund (म्यूचुअल फंड)।
क्या आप भी इस बात को लेकर परेशान हैं कि अपनी मेहनत की कमाई कहाँ लगाएँ? क्या आप जानना चाहते हैं कि मार्केट सेंटिमेंट के हिसाब से कौन सा विकल्प आपको करोड़पति बना सकता है? अगर हाँ, तो यह ब्लॉग आपके लिए है। अगले 10-15 मिनट में हम इन दोनों के बीच के अंतर का विश्लेषण करेंगे और जानेंगे कि आपके पोर्टफोलियो के लिए असली 'विजेता' कौन है।
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ETF और Mutual fund आखिर क्या हैं?
- ETF क्या है? (What is Exchange Traded Fund?): ETF का मतलब है Exchange Traded Fund। जैसा कि नाम से पता चलता है, यह एक ऐसा फंड है जो स्टॉक एक्सचेंज (जैसे NSE या BSE) पर लिस्टेड होता है। आप इसे एक साधारण शेयर की तरह ही बाजार खुलने के दौरान कभी भी खरीद या बेच सकते हैं।
- Mutual Fund क्या है? (Understanding Mutual Funds): म्यूचुअल फंड एक ऐसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) द्वारा चलाया जाता है जो निवेशकों से पैसा इकट्ठा करती है। यहाँ आप सीधे फंड हाउस से यूनिट्स खरीदते हैं। इसमें निवेश करने के लिए आपको बाजार के बंद होने का इंतजार करना पड़ता है क्योंकि इसकी कीमत (NAV) दिन के अंत में ही तय होती है।
ETF vs Mutual Fund:
- Real-time Trading vs End of Day, ETF को आप इसे शेयर बाजार के घंटों (9:15 AM से 3:30 PM) के दौरान कभी भी खरीद सकते हैं। इसकी कीमत हर सेकंड बदलती है।
- Mutual Fund को आप इसे दिन में कभी भी ऑर्डर करें, लेकिन आपको उस दिन के अंत की NAV (Net Asset Value) के आधार पर ही यूनिट्स मिलेंगी।
- Expense Ratio यानि निवेश की लागत, निवेश की दुनिया में एक कहावत है—"कम खर्चा, ज्यादा मुनाफा।"
- ईटीएफ क्योंकि ये पैसिवली मैनेज्ड होते हैं (यानी किसी इंडेक्स को कॉपी करते हैं), इनका एक्सपेंस रेशियो बहुत कम (अक्सर 0.05% से 0.30%) होता है।
- Mutual Funds यानि एक्टिवली मैनेज्ड फंड्स में फंड मैनेजर को काफी रिसर्च करनी पड़ती है इसलिए इनकी फीस ज्यादा (1% से 2.5%) हो सकती है।
- निवेश की शुरुआत (SIP vs Lumpsum), Mutual Fund में आप मात्र ₹500 की SIP (Systematic Investment Plan) से शुरुआत कर सकते हैं। यह अनुशासित निवेश का सबसे अच्छा तरीका है।
- ETF में भी अब कई ब्रोकर्स SIP की सुविधा देते हैं लेकिन पारंपरिक रूप से इसमें आपको पूरी यूनिट की कीमत एक साथ देनी होती है।
रिटर्न का गणित (Investment Returns and performance)
टैक्स और चार्जेस (Tax Benefits and Charges)
- ब्रोकरेज: ETF खरीदने के लिए आपको डिमैट अकाउंट चाहिए और हर ट्रांजैक्शन पर ब्रोकरेज देना पड़ता है। म्यूचुअल फंड (Direct Plan) में कोई ब्रोकरेज नहीं लगता बल्कि इसमें एग्जिट चार्ज लगता है जिसे एग्जिट लोड के नाम से भी जाना जाता है।
- STT (Securities Transaction Tax): ETF की बिक्री पर STT देना होता है। आपके शेयर मार्केट में प्रत्येक ट्रेड पर STT लगता है।
- Capital Gains Tax: दोनों पर टैक्स के नियम लगभग समान हैं। ₹1.25 लाख से ऊपर के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर 12.5% टैक्स लगता है (2024-25 के नए नियमों के अनुसार)।
2026 के लिए बेस्ट इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी (Best Investment Strategy 2026)
- पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन: अपने पोर्टफोलियो का 60% हिस्सा इंडेक्स फंड या ETF में रखना चाहिए और 40% हिस्सा अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले एक्टिव म्यूचुअल फंड में।
- डिमैट अकाउंट का महत्व: अगर आप ETF चुनते हैं, तो एक अच्छे डिस्काउंट ब्रोकर के साथ डिमैट अकाउंट खुलवाएं।
- इमरजेंसी फंड: निवेश शुरू करने से पहले कम से कम 6 महीने का खर्च अलग रखें।

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