Stock Market Crash: रिच डैड पुअर डैड के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने चेतावनी दी है कि "इतिहास का सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट क्रैश" आ गया है। हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में, कियोसाकी ने दावा किया कि 2013 में उन्होंने जिस मंदी की भविष्यवाणी की थी, वह अब हकीकत बन रही है। आइए जानते हैं- रिच डैड पुअर डैड के लेखक ने इतिहास के सबसे बड़े स्टॉक मार्केट क्रैश' की चेतावनी दी Why is the stock market crashing?
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| बाजार के क्रैश होने से निवेशकों में बढ़ी चिंता, क्या पोर्टफोलियो खाली करने का समय आ गया है? |
क्या आप जानते हैं जब दुनिया पैनिक में होती है तब कुछ लोग अपनी तिजोरियां भर रहे होते हैं। Robert Kiyosaki ने कहा है कि महामंदी आ रही है। रिच डैड पुअर डैड बुक के लेखक ने दुनिया को डराया भी है और रास्ता भी दिखाया है। लेकिन यही वो समय है जब आप अपने कल्पना से भी ज्यादा अमीर बन सकते हैं। इससे पहले 2013 में भी इन्होनें महामंदी आने की चेतावनी दी थी जो अब सच साबित हो रही है।
ज़्यादातर निवेशकों के बीच गिरते मार्केट को लेकर बड़ी चिंताओं के बावजूद, कियोसाकी उन लोगों के लिए आशावादी हैं, जो इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, "आने वाला मार्किट क्रैश आपको आपके सबसे बड़े सपनों से भी ज़्यादा अमीर बना देगा। उन्होंने इसे कीमती एसेट्स की "बिक्री" के रूप में बताया है।
Rich Dad Poor Dad के author ने कहा कि वह सोना, चांदी, इथेरियम और Bitcoin सहित "असली" एसेट्स को होल्ड करके मंदी के लिए तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह Bitcoin को लेकर खास तौर पर बुलिश हैं और इसकी कीमत गिरने पर और खरीदेंगे।
रॉबर्ट कियोसाकी ने अपना रुख समझाते हुए बिटकॉइन की 21 मिलियन कॉइन की सीमित सप्लाई पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि ज़्यादातर बिटकॉइन पहले से ही सर्कुलेशन में हैं। उन्होंने कहा कि पैनिक सेलिंग के समय में वह इसे और ज़्यादा खरीदने का प्लान बना रहे हैं। उन्होंने कहा, "सिर्फ़ 21 मिलियन बिटकॉइन ही होंगे और लगभग 21 मिलियन बिटकॉइन पहले से ही सर्कुलेशन में हैं।"
एक निवेशक के तौर पर जब आप अपनी मेहनत की कमाई को गिरते हुए देखते हैं, तो डर लगना स्वाभाविक है। लेकिन शेयर बाजार में "डर" और "लालच" ही वह दो भावनाएं हैं जो बाजार को चलाती हैं। आज के इस विस्तृत लेख में, हम उन 10 बड़े कारणों का पोस्टमार्टम करेंगे जिनकी वजह से भारत का स्टॉक मार्केट भी क्रैश (Stock Market Crash) हो रहा है और यह भी जानेंगे कि आपको इस स्थिति में क्या करना चाहिए।
1. अमेरिकी टैरिफ और ट्रेड वॉर का नया खतरा
- रूस-भारत तेल संबंध: अमेरिका द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों और भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद पर उठ रहे सवालों ने भारतीय कंपनियों के लिए अनिश्चितता पैदा कर दी है।
- निर्यात पर असर: अगर अमेरिका भारतीय सामानों पर दंडात्मक टैरिफ (Punitive Tariffs) लगाता है, तो आईटी (IT) और फार्मा (Pharma) जैसे सेक्टर सीधे प्रभावित होंगे। यही कारण है कि इन सेक्टर्स के शेयर आज कौड़ियों के भाव बिक रहे हैं।
2. विदेशी निवेशकों (FIIs) की बेतहाशा बिकवाली
- High Valuations: भारत का बाजार अभी भी अन्य इमर्जिंग मार्केट्स (जैसे चीन या कोरिया) के मुकाबले महंगा है।
- AI Trade Shift: वैश्विक स्तर पर पैसा अब "AI (Artificial Intelligence)" आधारित कंपनियों की तरफ शिफ्ट हो रहा है, जो फिलहाल अमेरिका और ताइवान में ज्यादा केंद्रित हैं।
- Currency Weakness: भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर ₹91 के स्तर को पार कर चुका है, जिससे विदेशी निवेशकों का मुनाफा कम हो रहा है।
3. मिडकैप और स्मॉलकैप का "बबल" फूटना
पिछले दो सालों में हमने मिडकैप (Midcap) और स्मॉलकैप (Smallcap) शेयरों में जो अंधाधुंध तेजी देखी थी, अब उसका अंत होता दिख रहा है। कई ऐसी कंपनियां थीं जिनका बिजनेस मॉडल कमजोर था लेकिन शेयर की कीमतें आसमान छू रही थीं।
अब जब बाजार में लिक्विडिटी कम हुई है, तो ये शेयर ताश के पत्तों की तरह ढह रहे हैं। साथ ही रिटेल इन्वेस्टर्स, जिन्होंने "FOMO" (छूट जाने का डर) में आकर महंगे भाव पर शेयर खरीदे थे, अब घबराहट में बेच रहे हैं, जिससे गिरावट और गहरी हो गई है।
4. कॉर्पोरेट अर्निंग्स में सुस्ती
शेयर बाजार अंततः कंपनियों के मुनाफे पर निर्भर करता है। 2025 की आखिरी तिमाही के नतीजों ने मार्केट को निराश किया है। आम आदमी की खर्च करने की क्षमता (Disposable Income) कम होने से FMCG और ऑटो सेक्टर के मुनाफे पर असर पड़ा है।
इससे कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पद रहा है कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से कंपनियों का नेट प्रॉफिट मार्जिन (Net Profit Margin) गिर गया है।
5. भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions)
दुनिया के किसी भी कोने में अगर युद्ध की चिंगारी भड़कती है, तो उसका असर दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) पर जरूर पड़ता है। 2026 में वेनेजुएला संकट और मध्य-पूर्व (Middle East) में अस्थिरता ने कच्चे तेल की कीमतों को फिर से अस्थिर कर दिया है। भारत अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है इसलिए तेल महंगा होने का मतलब भारत में महंगाई का बढ़ना और शेयर बाजार गिरना।
- जियो फाइनेंशियल और ब्लैकरॉक म्युचुअल फंड की पूरी जानकारी।
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Indian Stock markat प्रमुख ऐतिहासिक गिरावटें और आज की स्थिति
- 2008 में अमेरिका के रियल एस्टेट क्राइसिस की वजह से भी भारी गिरावट आयी थी।
- 2020 में कोविड-19 महामारीकी वजह से भी भारतीय स्टॉक मार्केट क्रैश हुआ था।
- अब 6 2024-25 हाई वैल्यूएशन और भारत पर 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ के 500% तक बढ़ने की आशंका की वजह से FII सेलिंगकी भारतीय शेयर मार्केट में लगातार बिकवाली जारी है...
इस market crash में खुद को कैसे बचाएं?
- पोर्टफोलियो की 'सफाई' करें: यह समय उन "पेनी स्टॉक्स" (Penny Stocks) से बाहर निकलने का है जिनका कोई भविष्य नहीं है। केवल उन्हीं कंपनियों में बने रहें जिनका फंडामेंटल मजबूत है और जिनके पास कैश फ्लो अच्छा है।
- SIP (Systematic Investment Plan) बंद न करें: इतिहास गवाह है कि जिन्होंने क्रैश के दौरान अपनी SIP जारी रखी, उन्होंने ही सबसे ज्यादा वेल्थ बनाई। गिरते बाजार में आपको कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं (Rupee Cost Averaging)।
- कैश बचाकर रखें (Dry Powder): बाजार जब अपने 'सपोर्ट लेवल' (Support Level) पर आए, तब अच्छे लार्जकैप शेयरों को धीरे-धीरे खरीदना शुरू करें। "एक साथ सारा पैसा न लगाएं।"

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