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| शेयर बाजार में सही स्टॉक चुनने के लिए Stock Analysis बेहद जरूरी है। इस गाइड में जानें Fundamental और Technical Analysis के सीक्रेट तरीके जो आपको नुकसान से बचाएंगे। |
अगर आप दूसरों की टिप या अफवाहों के आधार पर शेयर खरीदते हैं, तो यह निवेश नहीं बल्कि जुआ है। अगर आप शेयर बाजार से लगातार मुनाफा कमाना चाहते हैं तो आपको स्टॉक एनालिसिस (Stock Analysis) सीखना ही होगा।
स्टॉक्स प्राइस की भविष्यवाणी करने वाले कुछ सामान्य इंडीकेटर्स में मूविंग एवरेज (MA), रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडिकेटर (RSI) बोलिंगर बैंड्स और MACD प्रमुख हैं। इन टेक्निकल इंडीकेटर्स की सहायता से स्टॉक मार्केट ट्रेडर्स ट्रेंड, मोमेंटम, पोटेंशियल रिवर्सल आदि का अनुमान लगाते हैं।
यदि आप Stock Market Investment करने के लिए बढ़िया शेयर चुनने में सफल हो जाते हैं। तो आप अपने investment पर कई गुना रिटर्न पा सकते है। इसके लिए हमें Stock analysis करना आना चाहिए। इस ब्लॉग-पोस्ट में आप आसान हिंदी भाषा में समझेंगे कि स्टॉक एनालिसिस क्या है और इसे आप खुद अपने मोबाइल या लैपटॉप से कैसे कर सकते हैं।
ये भी जानें- Stock market से कम नुकसान में ज्यादा पैसे कैसे कमाएं?
Stock Analysis क्या है?
- इससे नुकसान का जोखिम कम होता है और खराब वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों से बचाव होता है।
- स्टॉक एनालिसिस दे सही कीमत पर शेयर खरीदने में मदद है। विश्लेषण करने से शेयर सस्ता है या महंगा, इसका पता चलता है।
- भविष्य के मल्टीबैगर शेयर की पहचान कर सकते हैं, सही समय पर सही स्टॉक चुनने में आसानी होती है।
Stock Analysis के प्रकार
- फंडामेंटल एनालिसिस
- टेक्निकल एनालिसिस
फंडामेंटल एनालिसिस (Fundamental Analysis)
- बिजनेस मॉडल: कंपनी क्या बनाती या बेचती है? क्या भविष्य में इसके प्रोडक्ट की मांग रहेगी?
- मैनेजमेंट की ईमानदारी: क्या कंपनी के प्रमोटर्स पर कोई फ्रॉड का केस तो नहीं है?
- प्रतिस्पर्धी बढ़त (Moat): क्या कंपनी के पास ऐसा कोई यूनिक फायदा है जो उसके प्रतिस्पर्धियों (Competitors) के पास नहीं है?
- P/E Ratio (Price to Earnings): यह बताता है कि कंपनी ₹1 कमाने के लिए आपसे कितना पैसा मांग रही है।
- P/B Ratio (Price to Book): कंपनी की वास्तविक एसेट वैल्यू की तुलना शेयर प्राइस से करता है।
- ROCE और ROE: यह दर्शाता है कि कंपनी अपने फंड का कितने कुशलता से उपयोग कर रही है। (कम से कम 15% होना बेहतर माना जाता है)
- Debt to Equity Ratio (कर्ज): कंपनी पर कितना कर्ज है? (हमेशा 1 से कम Debt वाली कंपनियां चुनें)
- Promoter Holding: कंपनी के मालिकों की खुद की कितनी हिस्सेदारी है? (50% से अधिक होना अच्छा माना जाता है)
अक्सर लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स stocks के फंडामेंटल एनालिसिस करते हैं। तब कोई आदमी शेयर बेच रहा होता है तथा कोई उसी कीमत पर खरीद रहा होता है, तभी ट्रेड होता है। इसका मतलब दोनों की इन्वेस्टमेंट पर राय तथा इन्वेस्टमेंट एनालिसिस करने का तरीका अलग-अलग है। इसलिए Stock Analysis करने का कोई फिक्स-फॉर्मूला नहीं है। आगे स्टॉक एनालिसिस के तरीको के बारे में विस्तार से समझिये।
Stock Analysis करते समय फंडामेंटल एनालिसिस के द्वारा शेयर की सही कीमत पता करने की कोशिश की जाती है शेयर की कीमत पता करने के लिए, कम्पनी वर्तमान में जो कारोबार रही है। वह अगले दो, पांच या दस सालों में कितना बढ़ सकता है। मान लीजिये, आज कम्पनी को 500 करोड़ का प्रॉफिट हो रहा है, तो अगले साल कितना प्रॉफिट हो सकता है।
इस तरह हम जितने साल के लिए कम्पनी में इन्वेस्ट करना चाहते है। उतने साल तक का अनुमान Fundamental Analysis में लगाया जाता है। फंडामेंटल एनालिसिस में ये भी देखा है कि अगले दो , पांच या दस साल में कंपनी के कैशफ्लो कैसे रह सकते है। कैशफ्लो की आज की तरीख में नेट प्रजेंट वैल्यू निकलने की कोशिश की जाती है।
ऐसी आधार पर कम्पनी के प्रत्येक शेयर की प्रजेंट वैल्यु निकली जाती है। दूसरा तरीका है कि कम्पनी की इंट्रिनसिक वैल्यू क्या है? यानि की कम्पनी की सभी सम्पत्तियो तथा देनदारियों को निकालकर कम्पनी की नेट वैल्यू निकली जाती है। कई बार लोग stock Analysis करते समय ये भी देखते है कि कम्पनी की डिविडेंट पॉलिसी क्या है ?
यदि कम्पनी साल दर साल अच्छा डिविडेंड दे रही है। इसका मतलब कम्पनी कैश जेनरेशन भी कर रही है तथा Investor friendly भी है। ये सब मुददे स्टॉक एनालिसिस में देखे जाते है। उपर्यक्त सभी तरीको के द्वारा आप यह पता लगा सकते है कि कोई शेयर फंडामेंटली अच्छा है या बेकार
कई बार लोग stock Analysis करते समय ये भी देखते है कि कम्पनी की डिविडेंट पॉलिसी क्या है ? यदि कम्पनी साल दर साल अच्छा डिविडेंड दे रही है। इसका मतलब कम्पनी कैश जेनरेशन भी कर रही है तथा Investor friendly भी है। ये सब मुददे स्टॉक एनालिसिस में देखे जाते है। उपर्यक्त सभी तरीको के द्वारा आप यह पता लगा सकते है कि कोई शेयर फंडामेंटली अच्छा है या बेकार।
टेक्नीकल एनालिसिस (Technical Analysis)
- कैंडलेस्टिक चार्ट (Candlestick Charts): प्राइस के मूवमेंट को समझने के लिए विभिन्न पैटर्न्स (जैसे Hammer, Doji, Engulfing) देखें।
- सपोर्ट और रेजिस्टेंस (Support & Resistance): वह लेवल जहाँ से शेयर प्राइस बार-बार ऊपर जाता है (Support) या नीचे गिरता है (Resistance)।
- RSI (Relative Strength Index): 30 से नीचे हो तो Overbought, 70 से ऊपर हो तो Oversold माना जा सकता है।
- Moving Averages (50-Day, 200-Day EMA): ट्रेंड की दिशा पहचानने के लिए उपयोग करें।
इसमें शेयर का चार्ट देखकर भविष्य बताने की कोशिश की जाती है। पुराने डेटा के आधार पर अब तक शेयर ने कितना वॉल्यूम किया तथा किस तरह का प्राइस एक्शन शेयर ने किया। शेयर कब कितना ऊपर-नीचे हुआ तथा कितन कितने वॉल्यूम पर हुआ, कितने समय में हुआ। इस तरह Technical Analysis चार्ट पर पुराने डेटा को देखकर Stock Analysis करके किसी शेयर के भविष्य में होने वाले उतर-चढ़ाव को जानने की कोशिश को कहते है।
यदि आप शेयर ट्रडिंग और इन्वेस्टिंग में होने वाली गलतियों के कारण होने वाले नुकसान से बचना चाहते हैं तो आप Stock Market में बर्बाद होने से कैसे बचें? बुक पढ़ सकते हैं। बहुत से लोग टेक्निकल एनालिसिस को शेयर का पोस्टमार्टम कहते है, डायग्नोसिस नहीं क्योंकि इसमें पुराने डेटा से भविष्य का अनुमान लगते है। ये भी एक stock analysis का तरीका है इसलिए लोग ऐसा करते है अतः ये गलत नहीं है।
इसमें इस बात से कोई खास फर्क नहीं पड़ता कि कम्पनी फंडामेंटल कैसे है, कम्पनी अच्छी है या बुरी क्योंकि इसमें सिर्फ price और volume एक्शन देखा जाता है technical analysis उन लोगों के लिए अच्छा है जो ट्रेडर हैं, intraday या short term trade करते है। टेक्निकल एनालिसिस उन लोगो के लिए भी अच्छा है ,जो किसी शेयर में लम्बे समय तक निवेशित रहना चाहते है। वो चार्ट के आधार पर उस लेवल का पता लगा सकते है जिस पर शेयर में लम्बे समय के लिए निवेश करना फायदे का सौदा हो सकता है।
इसमें इस बात से कोई खास फर्क नहीं पड़ता कि कम्पनी फंडामेंटल कैसे है, कम्पनी अच्छी है या बुरी क्योंकि इसमें सिर्फ price और volume एक्शन देखा जाता है technical analysis उन लोगों के लिए अच्छा है जो ट्रेडर हैं, intraday या short term trade करते है। टेक्निकल एनालिसिस उन लोगो के लिए भी अच्छा है ,जो किसी शेयर में लम्बे समय तक निवेशित रहना चाहते है। वो चार्ट के आधार पर उस लेवल का पता लगा सकते है जिस पर शेयर में लम्बे समय के लिए निवेश करना फायदे का सौदा हो सकता है।
इन्वेस्टर के लिए टेक्निकल एनालिसिस के द्वारा किसी शेयर में एंट्री तथा एग्जिट के थोड़े संकेत मिलते है।ट्रेडर के लिए technical analysis सीखना आवश्यक है क्योंकि ट्रेडर को ट्रेड करने से पहले ही तय करना होता है, कि शेयर किस कीमत पर खरीदना तथा बेचना है। इसके लिए ट्रेडर को चार्ट पढ़ना आना चाहिए ,ये बात भी सही है कि जिन लोगों को चार्ट पढ़ना आता है वो शेयर बाजार में काफी पैसे कमाते है। टेक्निकल एनालिसिस में stop loss लगाना बहुत जरूरी होता है। कई बार यह ट्रिगर भी हो जाता है। स्टॉप लॉस ट्रेडर को बड़े नुकसान से बचता है। इसमें एक बात साफ होती है कि आपको शेयर एक निश्चित कीमत पर खरीदना होता है तथा निश्चित टार्गेट के लिए खरीदना होता है। आप टार्गेट को revise कर सकते है, टार्गेट के साथ-साथ स्टॉप लॉस को भी रीवाइज करना चाहिए।
फ्री में Stock analysis करने के टूल्स और वेबसाइट्स
- Screener.in यह फंडामेंटल एनालिसिस और रेशियो देखने के लिए बेस्ट वेबसाइट है।
- Tickertape यह वेबसाइट कंपनी के ओवरव्यू और फोरकास्ट के लिए बेस्ट है।
- TradingView टेक्निकल एनालिसिस और चार्टिंग के लिए बेस्ट वेबसाइट है।
- Moneycontrol / NSE India न्यूज और फाइनेंशियल रिजल्ट्स के लिए के लिए अच्छी है। यह ओवरऑल फाइनेंसियल मार्केट के लिए इंडिया में सबसे ज्यादा देखि जाने वाली वेबसाइट है।
क़्वालीटेटिव एनालिसिस (Qualitative analysis)
Stock analysis करने का तीसरा तरीका Qualitative analysis है इसमें ये देखा जाता है कि जो लोग चला रहे हैं ( कम्पनी के प्रमोटर) उनका बैकग्राउंड कैसा है ? मान लेते हैं कि टाटा, अंबानी, वाडिया ये लोग बिज़नेस चला रहे है इन लोगों ने बड़ा एम्पायर खड़ा किया है।
आपको ये जानने का प्रयास करना चाहिए कि इनका कम्पनी खड़ी करने का पुराना रिकॉर्ड कैसा है? गवर्नेंस तथा लेन-देन को लेकर कम्पनी के मेनेजमेंट का रिकॉर्ड कैसा है? कोई गलत काम तो नहीं किये। डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट खोले फ्री मेनेजमैंट के खिलाफ रेगुलेटर के कोई एक्शन तो नहीं हुए।
यह भी जरूर जानना चाहिए कि कम्पनी का बिज़नेस मॉडल कैसा है ? क्या उसमें कुछ बेरियर ? कॉम्पिटिशन कितना आ सकता है ? उस बिज़नेस में रेवेन्यू विसिबिल्टी कैसी रह सकती है ? ये भी देखना चाहिए कि इसकी इंडस्ट्री कितना ग्रोथ कर रही है क्योंकि यदि इसकी इंडस्ट्री में ही ग्रोथ नहीं होगी, तो ये कम्पनी भी कहाँ ग्रोथ कर पायेगी ? ये कुछ फैक्टर है जिनसे qualitative analysis किया जाता है।
- पेनी स्टॉक्स (Penny Stocks) से बचें: केवल सस्ता होने के कारण घटिया कंपनियों के शेयर न खरीदें।
- डायवर्सिफिकेशन (Diversification): अपना सारा पैसा एक ही स्टॉक में न लगाएं, 8-10 अलग-अलग मजबूत शेयरों में निवेश करें।

1 टिप्पणियाँ
nice
जवाब देंहटाएंDigital Marketing (Stock Market और Crypto Market) में Technical Analysis उतनी ही जरुरी है जितनी हमे जीवन जीने के लिए जीवन जीने का तरीका होना चाहिए जैसे :- हम क्या खायेगे , क्या पियेंगे ,क्या पहनेंगे इत्यादि |
टेक्निकल एनालिसिस में भी इसी तरह जानकारी होनी चाहिए जैसे:- हमे कब स्टॉक को Buy करना है और कब Sell करना है ,किस स्टॉक में Invest करना है और किस में नहीं करना है |
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