How to analyze option chain: जीरो से एडवांस लेवल तक ऑप्शन चेन का विश्लेषण।

How to analyze option chain: क्या आप शेयर बाजार में ट्रेडिंग तो कर रहे हैं, लेकिन हर बार आपका स्टॉप लॉस हिट हो जाता है? क्या आपको ऐसा लगता है कि बड़े प्लेयर्स (Operators) को पहले से पता होता है कि मार्केट कहाँ जाएगा? असल में, वे कोई जादू नहीं करते, बल्कि वे 'Option Chain' के डेटा को पढ़ते हैं। अगर आप भी चार्ट के पीछे छिपे इस गणित को समझ गए।तो आप मार्केट के ट्रैप से बचकर एक प्रॉफिटेबल ट्रेडर बन सकते हैं। आइए जानते हैं- जीरो से एडवांस लेवल तक ऑप्शन चैन का विश्लेषण। How to analyze option chain.

How to analyze option chain

शेयर बाजार में ट्रेडिंग करना केवल चार्ट पर कैंडलस्टिक्स देखने तक सीमित नहीं है। अगर आप ऑप्शंस ट्रेडिंग (Options Trading) करते हैं, तो Option Chain आपके लिए एक जीपीएस (GPS) की तरह काम करती है। यह आपको बताती है कि बाजार की दिशा क्या हो सकती है, कहाँ सबसे ज्यादा सपोर्ट है और रेजिस्टेंस कहाँ है। 

Option Chain क्या है? 

ऑप्शन चैन एक स्टॉक या इंडेक्स के लिए सभी उपलब्ध कॉल और पुट ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स की एक विस्तृत टेबल है जो आपको मार्केट की आत्मा दिखाती है। यह आपको बताती है कि किस स्ट्राइक प्राइस पर ट्रेडर्स ने कितना पैसा लगाया है। किस लेवल पर बड़ा सपोर्ट और रेजिस्टेंस बन रहा है, और मार्केट की इमोशनल स्टेट क्या है। 

अगर आप डेटा के बजाय भावना से ट्रेड करते हैं या बिना रिसर्च के अंधाधुंध ऑप्शन खरीदते हैं, तो आप लगातार SL हिट होने के चक्कर में फंस सकते हैं। लेकिन ऑप्शन चेन एनालिसिस की ताकत आपको बताती है कि आज भी निफ्टी या बैंक निफ्टी में कहां रेजिस्टेंस और सपोर्ट बन रहे हैं। 

ताकि आप स्ट्राइक प्राइस चुनने में भूल न करें।ऑप्शन चेन एक ऐसी तालिका (Table) है जो किसी विशेष इंडेक्स (जैसे Nifty या Bank Nifty) या स्टॉक के सभी उपलब्ध ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स की सूची दिखाती है। इसमें मुख्य रूप से Calls और Puts का डेटा होता है। जब आप NSE की वेबसाइट पर ऑप्शन चेन देखते हैं, तो आपको दो हिस्से मिलते हैं-

  1. Left Side (Calls): यहाँ तेजी करने वालों का डेटा होता है। यहीं से आप रेजिस्टेंस लेवल का अनुमान लगा सकते हैं। 
  2. Right Side (Puts): यहाँ मंदी या सपोर्ट का डेटा होता है। इस डेट्स से आप सपोर्ट लेवल का अनुमान लगा सकते हैं। 
इससे पहले कि हम विश्लेषण शुरू करें, आपको इन शब्दों का अर्थ जानना बहुत जरूरी है। ऑप्शन चैन में मुख्य रूप से निम्नलिखित शब्दावली का प्रयोग किया जाता है-
  1. Strike Price: वह कीमत जिस पर खरीदार और विक्रेता ने कॉन्ट्रैक्ट किया है।
  2. प्रीमियम LTP (Last Traded Price): ऑप्शन प्रीमियम की वर्तमान कीमत।
  3. Open Interest (OI): यह सबसे महत्वपूर्ण डेटा है। यह बताता है कि कुल कितने कॉन्ट्रैक्ट्स अभी खुले (Open) हैं जो अभी तक सेटल नहीं हुए हैं।
  4. Change in OI: यह दिखाता है कि आज के दिन कितने नए कॉन्ट्रैक्ट्स जुड़े हैं या बाहर निकले हैं।
  5. Volume: एक निश्चित समय में ट्रेड किए गए कॉन्ट्रैक्ट्स की कुल संख्या।
  6. Implied Volatility (IV): यह बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव की संभावना को दर्शाता है।
इन सबको देखकर आप मार्केट की चाल को पढ़ सकते हैं। जैसे अगर निफ्टी स्पॉट 23800 पर है और 24000 CE पर OI बढ़ रहा है, तो यह बताता है कि बड़े प्लेयर्स ऊपर जाने की उम्मीद कर रहे हैं।

Option Chain Analysis करने का सही तरीका

ऑप्शन चेन को देखते समय हमेशा एक बात याद रखें, "Think like an Option Seller" (ऑप्शन राइटर की तरह सोचें)। क्योंकि एक ऑप्शन बायर कम पैसा लगाकर बड़ा प्रॉफिट चाहता है, लेकिन एक ऑप्शन सेलर करोड़ों रुपये लगाकर छोटा प्रीमियम खाने की कोशिश करता है। इसलिए, जहाँ ज्यादा Open Interest (OI) होता है, वहां बड़े प्लेयर्स की पोजीशन होती है।

Support और Resistance की पहचान कैसे करें: Resistance (रुकावट): कॉल साइड (Call Side) में जिस स्ट्राइक प्राइस पर सबसे ज्यादा Open Interest होता है, वह एक मजबूत रेजिस्टेंस माना जाता है। इसका मतलब है कि सेलर्स को लगता है कि मार्केट इस लेवल के ऊपर नहीं जाएगा।

Support (सहारा): पुट साइड (Put Side) में जिस स्ट्राइक प्राइस पर सबसे ज्यादा OI होता है। वह एक मजबूत सपोर्ट है। सेलर्स का मानना है कि मार्केट इस लेवल से नीचे नहीं गिरेगा।

Change in OI का महत्व: सिर्फ कुल OI देखना काफी नहीं है। आपको यह भी देखना होगा कि 'Change in OI' क्या कह रहा है। अगर कॉल साइड में बहुत तेजी से नए कॉन्ट्रैक्ट्स जुड़ रहे हैं, तो इसका मतलब है कि रेजिस्टेंस और मजबूत हो रहा है। अगर पुट साइड में लोग अपनी पोजीशन छोड़कर भाग रहे हैं (Negative OI Change), तो यह कमजोरी का संकेत है।

ओपन इंटरेस्ट से सपोर्ट और रेजिस्टेंस कैसे निकालें?

ओपन इंटरेस्ट ऑप्शन चेन का सबसे शक्तिशाली हथियार है। यह आपको बताता है कि किस लेवल पर बड़ी मात्रा में पैसा लगा हुआ है, जिससे वह लेवल एक प्राकृतिक सपोर्ट या रेजिस्टेंस बन जाता है-
  • सपोर्ट: जहां पुट ऑप्शन में सबसे ज्यादा OI होता है, वहां एक मजबूत सपोर्ट बनता है। जैसे यदि निफ्टी इंडेक्स में 23100 पे पुट OI 2 लाख है, तो 22100 के नीचे जाने का दबाव रहता है।
  • रेजिस्टेंस: जहां कॉल ऑप्शन में सबसे ज्यादा OI होता है, वहां एक मजबूत रेजिस्टेंस बनता है। जैसे 23500 CE पर OI 1.8 लाख है, तो 23500 पर रिजेक्शन की संभावना बढ़ जाती है।
आपको रोजाना ऑप्शन चेन को देखना चाहिए और उन स्ट्राइक्स पर नजर रखनी चाहिए जहां OI में अचानक बढ़ोतरी हो रही है। यह बताता है कि बाजार की भावना बदल रही है या नई ट्रेडिंग रणनीति बन रही है।

Put Call Ratio (PCR) का उपयोग कैसे करें?

PCR यानि पुट-कॉल रेश्यो एक जादुई इंडिकेटर है जो आपको बाजार का मूड बताता है। इसका फॉर्मूला सरल है-

👉 Put Call Ratio (PCR) = Put Options ÷ Call Options
  • PCR > 1.0: मार्केट बुलिश (Bullish) है। लोग पुट ज्यादा बेच रहे हैं, यानी उन्हें उम्मीद है कि मार्केट ऊपर जाएगा।
  • PCR < 0.7: मार्केट ओवरसोल्ड (Oversold) है। यहाँ से बाउंस बैक की उम्मीद की जा सकती है।
  • PCR = 1.0: मार्केट न्यूट्रल है।
PCR का सही उपयोग: पीसीआर के Extreme Levels देखें। अगर PCR बहुत ज्यादा यानि 1.5 से ज्यादा है तो मार्केट में Over fear है। इससे मार्केट में Bounce आ सकता है। अगर यह बहुत कम यानि 0.5 से नीचे है तो मार्केट में Over greed है यानि मार्केट में गिरावट आ सकती है। 

Put Call Ratio (PCR) का formula बहुत simple है, लेकिन इसका सही इस्तेमाल आपकी trading strategy को मजबूत बना सकता है। अगर आप इसे सही तरीके से analyze करते हैं, तो आप market trend और reversal को बेहतर तरीके से पकड़ सकते हैं।

पुट-कॉल रेश्यो को कभी भी अकेले यूज न करें। हमेशा सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस के साथ मिलाकर ट्रेंड एनालिसिस करें। तब ट्रेड किस दिशा (लॉन्ग या शार्ट साइड) में लेना है यह निर्णय करें।  

ITM, ATM और OTM का खेल: ऑप्शन चेन में आपको तीन रंग या सेक्शन दिखेंगे-
  1. In-the-Money (ITM): कॉल साइड में वह स्ट्राइक प्राइस जो ऑप्शन के मार्केट प्राइस से कम होता है।
  2. At-the-Money (ATM): वह स्ट्राइक प्राइस जो ऑप्शन के करंट मार्केट प्राइस के सबसे करीब होता है।
  3. Out-of-the-Money (OTM): यह स्ट्राइक प्राइस, कॉल साइड में ऑप्शन के मार्केट प्राइस से ऊपर होता है।
अगर आप ऑप्शन बायर हैं, तो हमेशा ITM या ATM में ट्रेड करें। OTM में 'Time Decay' (Theta) आपके पैसे को तेजी से खत्म कर देगा।

ऑप्शन चेन से ट्रेडिंग सेटअप कैसे बनाएं?

अब जब आपने OI और PCR समझ लिए हैं, तो आपको इन्हें ट्रेडिंग सेटअप में कैसे इस्तेमाल करना चाहिए-

स्ट्राइक प्राइस चुनें: जो स्ट्राइक प्राइस पर OI सबसे ज्यादा है, वहां से ट्रेड करना बेहतर होता है। जैसे अगर आप निफ्टी में बुलिश हैं, तो इसके वर्तमान प्राइस के आसपास जैसे 23000 CE या 23500 CE पर ट्रेड करें।

टाइम फ्रेम चुनें: अगर आप इंट्राडे ट्रेडर हैं, तो जो स्ट्राइक पर OI और वॉल्यूम दोनों बढ़ रहे हैं, वहां ट्रेड करें। अगर आप स्विंग ट्रेडर हैं, तो जिस साप्ताहिक या मासिक एक्सपायरी में OI ज्यादा है, उस पर ट्रेड करें।

रिस्क मैनेजमेंट: अल्वेज OI चेंज और वॉल्यूम पर नजर रखें। अगर OI घटने लगे या वॉल्यूम घटने लगे, तो ट्रेड से बाहर निकल जाना चाहिए। यह सब करके आप अपने ट्रेडिंग में 70% से ज्यादा रिस्क कम कर सकते हैं और प्रॉफिट चांस बढ़ा सकते हैं।

Option Chain analyze करने का सही तरीका 

कई बार आपने देखा होगा कि मार्केट रेजिस्टेंस तोड़ता है लेकिन तुरंत नीचे आ जाता है। इसे 'Bull Trap' कहते हैं।
इसे पहचानने के लिए देखें कि क्या ब्रेकआउट के वक्त कॉल राइटर्स (Call Sellers) अपनी पोजीशन छोड़ रहे हैं?अगर OI कम नहीं हो रहा और मार्केट ऊपर जा रहा है, तो समझ जाइये कि यह ट्रैप हो सकता है।

बस ट्रेड करने से पहले नहीं, बल्कि रोजाना मार्केट की भावना को समझने के लिए ऑप्शन चैन को प्रतिदिन देखना चाहिए।

ओवरऑल ट्रेंड देखना चाहिए इसलिए OI और PCR को अकेले नहीं, बल्कि कैंडल चार्ट के साथ मिलाकर देखें।स्ट्राइक प्राइस चुनते समय मार्जिन और लिक्विडिटी जरूर देखें। कम लिक्विडिटी वाले स्ट्राइक पर ट्रेड करने से बचें।

प्रत्येक ट्रेड में स्टॉप लॉस और टारगेट जरूर सेट करना चाहिए। ऑप्शन चेन से आपको सपोर्ट और रेजिस्टेंस मिलते हैं, उन्हीं पर स्टॉप लॉस और टारगेट सेट करें।

Expiry Day पर सावधानी रखें, एक्सपायरी के दिन डेटा बहुत तेजी से बदलता है। हर 15 मिनट में 'Change in OI' चेक करें। Greeks को न भूलें, केवल OI न देखें, Delta और Vega पर भी नजर रखें।

India VIX पर नजर रखें, अगर India VIX, 20 के ऊपर है। तो ऑप्शन प्रीमियम बहुत महंगे होंगे और Stock market में डर का माहौल होगा। अतः Price Action से कन्फर्मेशन लें। केवल ऑप्शन चेन के भरोसे ट्रेड न लें। इसे चार्ट पैटर्न और कैंडल्स के साथ मिलाएँ। अगर आप ट्रेड लेते समय ऊपर बताई गयी सावधानियों को फॉलो करते हैं, तो आप ऑप्शन चेन से बहुत ऊंचा रिटर्न ले सकते हैं।

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. क्या ऑप्शन चेन 100% सही होती है?
A: नहीं, मार्केट में कुछ भी 100% नहीं है। यह केवल एक संभावना (Probability) दिखाती है। डेटा कभी भी बदल सकता है।

Q2. NSE की वेबसाइट पर डेटा कितनी देर में अपडेट होता है?
A: आमतौर पर NSE की वेबसाइट पर डेटा 3 मिनट की देरी (Delay) से अपडेट होता है। रियल-टाइम डेटा के लिए आप पेड टूल्स का उपयोग कर सकते हैं।

Q3. सबसे अच्छा PCR लेवल क्या है?
A: एक स्थिर बुलिश मार्केट के लिए 1.2 से 1.4 का PCR अच्छा माना जाता है।

Q4. क्या इंट्राडे के लिए ऑप्शन चेन जरूरी है?
A: हाँ, इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण टूल है क्योंकि यह मार्केट की 'Range' तय करने में मदद करता है।

Q5. ऑप्शन चेन को कहां से देख सकते हैं?
A: आप NSE वेबसाइट, ब्रोकर वेबसाइट या ऐप्स जैसे Zerodha, Groww, या Paytm Money से ऑप्शन चेन देख सकते हैं।

Q6. ऑप्शन चेन का इस्तेमाल किस तरह के ट्रेडर्स के लिए ज्यादा फायदेमंद है?
A: यह इंट्राडे ट्रेडर्स, स्विंग ट्रेडर्स और ऑप्शन सेलर्स के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद है।

निष्कर्ष: Option Chain Analysis केवल डेटा का खेल नहीं है, यह मार्केट के मनोविज्ञान (Psychology) को समझने का तरीका है। जब आप यह जान जाते हैं कि बड़े इंस्टीट्यूशंस कहाँ पैसा लगा रहे हैं, तो आपके सफल होने की संभावना बढ़ जाती है। अभ्यास शुरू करें, छोटे ट्रेड लें और धीरे-धीरे इस कला में महारत हासिल करें।

Disclaimer: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। ट्रेडिंग करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें। 

उम्मीद है, आपको यह जीरो से एडवांस लेवल तक ऑप्शन चेन का विश्लेषण आर्टिकल पसंद आया होगा। अगर आपको यह How to analyze option chain आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें। 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ