Indian Stock Market Crash: जनवरी 2026 क्रैश में क्या करें?

Indian Stock Market Crash: क्या आपने भी आज सुबह अपना पोर्टफोलियो लाल निशान में देखा और आपका दिल बैठ गया? आप अकेले नहीं हैं। भारतीय शेयर बाजार में इस समय जो हलचल मची है, उसने बड़े-बड़े दिग्गजों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। सेंसेक्स और निफ्टी में आ रही यह गिरावट सिर्फ एक मामूली 'करेक्शन' है या किसी बड़े संकट की आहट? आइए जानते हैं-  जनवरी 2026 क्रैश में क्या करें? Why is the Indian stock market crashing?         

Indian Stock Market Crash
बाजार के क्रैश होने से निवेशकों में बढ़ी चिंता, क्या पोर्टफोलियो खाली करने का समय आ गया है?

एक निवेशक के तौर पर जब आप अपनी मेहनत की कमाई को गिरते हुए देखते हैं, तो डर लगना स्वाभाविक है। लेकिन शेयर बाजार में "डर" और "लालच" ही वह दो भावनाएं हैं जो बाजार को चलाती हैं। आज के इस विस्तृत लेख में, हम उन 10 बड़े कारणों का पोस्टमार्टम करेंगे जिनकी वजह से भारत का स्टॉक मार्केट क्रैश (Stock Market Crash) हो रहा है और यह भी जानेंगे कि आपको इस स्थिति में क्या करना चाहिए। 

👉 “लंबे समय बैठकर trading करते हैं? यह footrest आपकी body थकने नहीं देगा— 👉 अंडर-डेस्क फुटरेस्ट

1. अमेरिकी टैरिफ और ट्रेड वॉर का नया खतरा

Global Trade War, 2026 की शुरुआत के साथ ही वर्ल्ड मार्केट में "ट्रेड वॉर" की काली छाया मंडराने लगी है। अमेरिका की नई व्यापारिक नीतियों और भारत पर संभावित 500% तक के टैरिफ की खबरों ने निवेशकों के होश उड़ा दिए हैं। फिलहाल Indian share market crash होने के निम्नलिखित दो मुख्य कारण हैं-
  1. रूस-भारत तेल संबंध: अमेरिका द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों और भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद पर उठ रहे सवालों ने भारतीय कंपनियों के लिए अनिश्चितता पैदा कर दी है।
  2. निर्यात पर असर: अगर अमेरिका भारतीय सामानों पर दंडात्मक टैरिफ (Punitive Tariffs) लगाता है, तो आईटी (IT) और फार्मा (Pharma) जैसे सेक्टर सीधे प्रभावित होंगे। यही कारण है कि इन सेक्टर्स के शेयर आज कौड़ियों के भाव बिक रहे हैं।

2. विदेशी निवेशकों (FIIs) की बेतहाशा बिकवाली

भारतीय बाजार के crash का सबसे बड़ा और तात्कालिक कारण है FII Selling (विदेशी संस्थागत निवेशक)। 2025 के पूरे साल में विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड ₹2.4 लाख करोड़ से ज्यादा की निकासी की, और 2026 के पहले ही सप्ताह में उन्होंने ₹7,000 करोड़ से ज्यादा के शेयर बेच डाले हैं।

FIIs द्वारा भारतीय स्टॉक मार्केट से पैसा निकालने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-
  • High Valuations: भारत का बाजार अभी भी अन्य इमर्जिंग मार्केट्स (जैसे चीन या कोरिया) के मुकाबले महंगा है।
  • AI Trade Shift: वैश्विक स्तर पर पैसा अब "AI (Artificial Intelligence)" आधारित कंपनियों की तरफ शिफ्ट हो रहा है, जो फिलहाल अमेरिका और ताइवान में ज्यादा केंद्रित हैं।
  • Currency Weakness: भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर ₹91 के स्तर को पार कर चुका है, जिससे विदेशी निवेशकों का मुनाफा कम हो रहा है।

3. मिडकैप और स्मॉलकैप का "बबल" फूटना

पिछले दो सालों में हमने मिडकैप (Midcap) और स्मॉलकैप (Smallcap) शेयरों में जो अंधाधुंध तेजी देखी थी, अब उसका अंत होता दिख रहा है। कई ऐसी कंपनियां थीं जिनका बिजनेस मॉडल कमजोर था लेकिन शेयर की कीमतें आसमान छू रही थीं।

अब जब बाजार में लिक्विडिटी कम हुई है, तो ये शेयर ताश के पत्तों की तरह ढह रहे हैं। साथ ही रिटेल इन्वेस्टर्स, जिन्होंने "FOMO" (छूट जाने का डर) में आकर महंगे भाव पर शेयर खरीदे थे, अब घबराहट में बेच रहे हैं, जिससे गिरावट और गहरी हो गई है। 

ये भी जानें-

4. कॉर्पोरेट अर्निंग्स में सुस्ती

शेयर बाजार अंततः कंपनियों के मुनाफे पर निर्भर करता है। 2025 की आखिरी तिमाही के नतीजों ने मार्केट को निराश किया है। आम आदमी की खर्च करने की क्षमता (Disposable Income) कम होने से FMCG और ऑटो सेक्टर के मुनाफे पर असर पड़ा है।

इससे कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पद रहा है कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से कंपनियों का नेट प्रॉफिट मार्जिन (Net Profit Margin) गिर गया है।

5. भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions)

दुनिया के किसी भी कोने में अगर युद्ध की चिंगारी भड़कती है, तो उसका असर दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) पर जरूर पड़ता है। 2026 में वेनेजुएला संकट और मध्य-पूर्व (Middle East) में अस्थिरता ने कच्चे तेल की कीमतों को फिर से अस्थिर कर दिया है। भारत अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है इसलिए तेल महंगा होने का मतलब भारत में महंगाई का बढ़ना और शेयर बाजार गिरना। 

ये भी जानें- 
भारतीय शेयर मार्केट पहले भी कई बार Crash हो चुका है-
  1. 2008 में अमेरिका के रियल एस्टेट क्राइसिस की वजह से भी भारी गिरावट आयी थी। 
  2. 2020 में कोविड-19 महामारीकी वजह से भी भारतीय स्टॉक मार्केट क्रैश हुआ था। 
  3. अब 6 2024-25 हाई वैल्यूएशन और भारत पर 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ के 500% तक बढ़ने की आशंका की वजह से FII सेलिंगकी भारतीय शेयर मार्केट में लगातार बिकवाली जारी है...

इस market crash में खुद को कैसे बचाएं?

जब बाजार गिर रहा हो तो शांत रहना ही सबसे बड़ी स्ट्रेटेजी होती है। यहाँ कुछ प्रो-टिप्स दिए गए हैं-
  • पोर्टफोलियो की 'सफाई' करें: यह समय उन "पेनी स्टॉक्स" (Penny Stocks) से बाहर निकलने का है जिनका कोई भविष्य नहीं है। केवल उन्हीं कंपनियों में बने रहें जिनका फंडामेंटल मजबूत है और जिनके पास कैश फ्लो अच्छा है।
  • SIP (Systematic Investment Plan) बंद न करें: इतिहास गवाह है कि जिन्होंने क्रैश के दौरान अपनी SIP जारी रखी, उन्होंने ही सबसे ज्यादा वेल्थ बनाई। गिरते बाजार में आपको कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं (Rupee Cost Averaging)।
  • कैश बचाकर रखें (Dry Powder): बाजार जब अपने 'सपोर्ट लेवल' (Support Level) पर आए, तब अच्छे लार्जकैप शेयरों को धीरे-धीरे खरीदना शुरू करें। "एक साथ सारा पैसा न लगाएं।"

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या मुझे अपना सारा स्टॉक बेच देना चाहिए?

उत्तर: बिल्कुल नहीं! अगर आपने अच्छी क्वालिटी की कंपनियों में निवेश किया है, तो बेचने के बजाय "होल्ड" करना बेहतर है। पैनिक सेलिंग हमेशा नुकसान देती है।

Q2. शेयर बाजार कब तक संभलेगा?

उत्तर: एक्सपर्ट्स का मानना है कि मार्च 2026 की तक बाजार में स्थिरता आ सकती है। मार्च 2026 तक अमेरिका-भारत ट्रेड डील होने की संभावना है। साथ ही RBI द्वारा ब्याज दरों में कटौती करने की संभवना भी है।

Q3. इस समय कौन से सेक्टर सुरक्षित हैं?

उत्तर: गिरावट के समय 'डिफेंसिव सेक्टर्स' जैसे FMCG, Pharma और Utilities (बिजली, गैस) कम गिरते हैं। साथ ही, एक्सपोर्ट ओरिएंटेड कंपनियों पर नजर रखें। जिन्हें डॉलर के मजबूत होने से फायदा हो सकता है।

Q4. क्या यह निवेश का सही समय है?

उत्तर: हां, लेकिन केवल किस्तों में (Partial Entry)। बाजार अभी बॉटम (Bottom) तलाश रहा है, इसलिए धीरे-धीरे निवेश करना ही समझदारी है।

निष्कर्ष: डरें नहीं, धैर्य रखें! शेयर बाजार का इतिहास रहा है कि हर बड़ी गिरावट के बाद एक बड़ी तेजी आती है। भारत का स्टॉक मार्केट क्यों क्रैश हो रहा है? इसके पीछे वैश्विक कारण ज्यादा हैं और घरेलू अर्थव्यवस्था आज भी मजबूत है (GDP growth projections are still healthy)।

एक समझदार निवेशक वह नहीं है जो हर गिरावट में भाग जाए, बल्कि वह है जो इस गिरावट को एक अवसर (Opportunity) के रूप में देखे। याद रखिए, बाजार का "लाल रंग" आपके भविष्य के "हरे पोर्टफोलियो" की नींव हो सकता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ